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किसान का गौरवशाली अतीत था, आज किसान को मार्गदर्शन चाहिए

किसान का गौरवशाली अतीत था, आज किसान को मार्गदर्शन चाहिए आज किसान बहुत दुविधा में पड़ा है। वह चाहता है कि वह रासायनिक खाद से कैसे छुटकारा पाए ताकि उसकी धरती फिर से उपजाऊ हो। वह भुल सा गया है कि उनके पुरखे गोबर और गोमूत्र से खाद बनाकर इतने सम्पन्न थे कि उन्होंने आजादी की लड़ाइयों अर्थात 1857, 1905 ...

December 10th, 2009 | लेखक : प्रवक्‍ता ब्यूरो | 463 views | 1 Comment »
Posted in Category: खेत-खलिहान | Tags: Farmer, किसान

कोपनहेगन सम्मेलन का अर्थ और उसके परिणाम

कोपनहेगन सम्मेलन का अर्थ और उसके परिणाम कभी महात्मा गाँधी ने कहा था- इंसान की जरुरतों को प्रकृति तो पूरा कर सकती है लेकिन इंसान के लालच को नहीं। आज इंसान का लालच सभी सीमाओं को लांघ चुका है। इस लालच पर किस तरह से लगाम लगाया जाये, यही है इस सम्मेलन का प्रमुख मुद्दा। 192 देश के ...

December 7th, 2009 | लेखक : सतीश सिंह | 269 views | 3 Comments »
Posted in Category: पर्यावरण, विश्ववार्ता | Tags: Copenhagen Conference, कोपनहेगन सम्मेलन

परशुराम कुण्ड पर संकट, बांध-फांस में फंसी धरोहर

परशुराम कुण्ड पर संकट, बांध-फांस में फंसी धरोहर संस्कृति, विरासत और परंपरा बलिदान करिए, द्रुत गति से विकास मार्ग पर चलिए। हमारे विकासवादियों का ये मंत्र अपना असर बखूबी दिखाने लगा है। अब बारी परशुराम कुण्ड की है। अरूणाचल प्रदेश में लोहित नदी पर बन रहे एक बांध के चलते परशुराम कुण्ड अस्तित्वविहीन होने जा रहा है। 1750 मेगावाट ...

November 6th, 2009 | लेखक : राकेश उपाध्याय | 459 views | No Comments »
Posted in Category: पर्यावरण | Tags: Parshuram kund, परशुराम कुण्ड

सिर्फ बांधों के फायदे मत गिनाइए – इन स्याह तस्वीरों का क्या होगा!

सिर्फ बांधों के फायदे मत गिनाइए - इन स्याह तस्वीरों का क्या होगा! देश में बांधों की बाढ़ आ गई है। हिमाचल प्रदेश से लेकर अरूणाचल प्रदेश तक और उत्तराखण्ड से लेकर सुदूर केरल तक बांधों की पौ-बारह है। 'ले बांध, दे बांध' की तर्ज पर सरकारी मशीनरी बांध प्रस्तावों पर तेजी से कार्रवाई कर रही हैं। एक-एक नदी के प्रवाह पर दर्जनों ...

November 5th, 2009 | लेखक : राकेश उपाध्याय | 367 views | 3 Comments »
Posted in Category: पर्यावरण | Tags: Dams, बांध

धार्मिक आस्थाओं का हृदयप्रदेश छत्तीसगढ़ – संजय द्विवेदी

धार्मिक आस्थाओं का हृदयप्रदेश छत्तीसगढ़ - संजय द्विवेदी अपनी आदर्श परंपराओं और संस्कारों के लिए जाना जाने वाला छत्तीसगढ़ सही अर्थों में सद्भावना का टापू है। भारतीय परम्परा की उदात्तता इसकी थाती है और सामाजिक समरसता इसका मूलमंत्र। सदियों से अपनी इस परंपरा के निर्वहन में लगी यह धरती अपनी ममता के आंचल में सबको जगह देती आयी ...

November 3rd, 2009 | लेखक : संजय द्विवेदी | 234 views | 2 Comments »
Posted in Category: विविधा | Tags: Chattisgarh, Sanjay Dwedi, छत्तीसगढ़, संजय द्विवेदी

विकास की गंगा में बह गयीं गंगा मैया – राकेश उपाध्याय

विकास की गंगा में बह गयीं गंगा मैया - राकेश उपाध्याय [caption id="attachment_4626" align="alignleft" width="350" caption="उत्तरकासी के नजदीक का बैराज के निचे"][/caption] गंगोत्री के दर्शन को चलते चले जाइए लेकिन रास्ते में अपने प्रवाह-मार्ग में कहीं गंगा नहीं मिलेंगी। भागीरथी भी नहीं। उत्तरांचल के नरेंद्र नगर से चंबा तक सड़क मार्ग की यात्रा कर आगे बढ़िए और फिर देखिए महाकाय विकास के ...

November 2nd, 2009 | लेखक : राकेश उपाध्याय | 297 views | 1 Comment »
Posted in Category: पर्यावरण | Tags: Ganga, Ganga Maiya, Rakesh Upadhyay, गंगा, गंगा मैया, राकेश उपाध्याय

सपनों को सच करने की जिम्मेदारी -संजय द्विवेदी

सपनों को सच करने की जिम्मेदारी -संजय द्विवेदी मध्य प्रदेश यानि वह राज्य जो भारत का ह्रदय प्रदेश तो है ही परंपरा, संस्कृति और संस्कारों से रसपगा एक क्षेत्र है जहां सौहार्द और सौजन्यता स्वभाव में ही धुलमिल गयी है। अभाव, उपेक्षा और राजनीति ने भी इस स्वभाव पर कोई प्रभाव नहीं डाला है और मप्र आज भी ...

November 2nd, 2009 | लेखक : संजय द्विवेदी | 112 views | No Comments »
Posted in Category: विविधा | Tags: Sanjay Dwivedi, संजय द्विवेदी

गाँधी जी – कल, आज और कल : इसरार अहमद

गाँधी जी - कल, आज और कल : इसरार अहमद शायद ही कोई ऐसा भारतीय होगा जो गाँधी जैसे महान व्यक्तित्व वाले महापुरुष को नहीं जानता और तस्वीर को पहचानता न होगा. यह भारत और भारत-वासीयो का सौ- भाग्य था जो उनके जैसा सर्व गुण संपन महापुरुष मिला जिसने भारत की तस्वीर और इतिहास बदल दिया. उनके और उनके दुवारा ...

November 1st, 2009 | लेखक : इसरार अहमद | 509 views | 3 Comments »
Posted in Category: हिंद स्‍वराज | Tags: hind swaraj, हिंद स्‍वराज

हिंदुत्व ने बदल दिया है द्रविड़ आंदोलन का चेहरा

हिंदुत्व ने बदल दिया है द्रविड़ आंदोलन का चेहरा साक्षात्कार : एस. वेदांतम, अंतरराष्ट्रीय कार्याध्यक्ष, विश्व हिंदू परिषद भारत के धुर दक्षिण में एक अनूठी मूक क्रांति हो चूकी है। विश्व हिंदू परिषद के रचनात्मक प्रकल्पों और सामाजिक गतिविधियों ने इस क्रांतिकारी सामाजिक परिवर्तन का श्रीगणेश किया।  इस परिवर्तन के परिणाम स्वरूप हिंदू समाज की कथित अति दलित, अछूत व ...

November 1st, 2009 | लेखक : राकेश उपाध्याय | 538 views | 2 Comments »
Posted in Category: साक्षात्‍कार | Tags: Hinduism, हिंदुत्व

गाँधी जी और आज की यांत्रिक सभ्यता – भाग-3

गाँधी जी और आज की यांत्रिक सभ्यता - भाग-3 गाँधी जी ने सभ्यता के  जो रूप बताए है, वे  विचारणीय है। संवेदनशील पाठक आत्म-मंथन के लिए विवश होगा और सोचेगा, कि क्या सभ्यता के ये ही नए कँटीले शिखर हैं? गाँधी जी के विचारों का एक लम्बा अंश यहाँ प्रस्तुत करने का मोह संवरण नहीं कर पा रहा हूँ. ...

October 28th, 2009 | लेखक : गिरीश पंकज | 263 views | No Comments »
Posted in Category: हिंद स्‍वराज | Tags: Gandhi, Girish Pankaj, Mahatma Gandhi, गाँधी जी, गिरीश पंकज, महात्मा गाँधी, यांत्रिक सभ्यता, हिंद स्‍वराज

गाँधी जी और आज की तथाकथित यांत्रिक सभ्यता – भाग-2

गाँधी जी और आज की तथाकथित यांत्रिक सभ्यता - भाग-2 गाँधी जी ने इग्लैंड की पार्लियामेंट को 'बाँझ और वेश्या' कहा था। बाद सें उन्होंने वेश्या शब्द को विलोपित कर दिया था। लेकिन उनका आरोप सही था। आज भारतीय परिप्रेक्ष्य में भी ये दोनों शब्द अप्रासंगिक नही हैं। हमारी संसद जनहित में अनेक निर्णय तो करती है लेकिन वे कार्यरूप ...

October 27th, 2009 | लेखक : गिरीश पंकज | 239 views | No Comments »
Posted in Category: हिंद स्‍वराज | Tags: Gandhi, Gandhivadi, Mahatma Gandhi, गाँधी जी, गाँधीवाद, गाँधीवादी, महात्मा गाँधी, यांत्रिक सभ्यता, हिंद स्‍वराज

कंधमाल काण्ड की खुलने लगी परतें – कुलदीप चंद अग्निहोत्री

कंधमाल काण्ड की खुलने लगी परतें - कुलदीप चंद अग्निहोत्री स्वामी लक्ष्माणानंद सरस्वती की हत्या की जांच के लिए राज्य सरकार ने न्यायमूर्ती महापात्र को अधिकृ त किया था। यह अलग बात है कि जब महापात्र ने स्वामी जी की हत्या और उसके उपरांत हुई हिंसा की गहराई से जांच करनी प्रारम्भ की तो सरकार को असुविधा होने लगी। इसलिए ...

October 27th, 2009 | लेखक : डॉ. कुलदीप चन्‍द अग्निहोत्री | 181 views | 3 Comments »
Posted in Category: विविधा | Tags: Kandhmal Case, कंधमाल काण्ड

गाँधी जी और आज की तथाकथित यांत्रिक सभ्यता – भाग-1

गाँधी जी और आज की तथाकथित यांत्रिक सभ्यता - भाग-1 'प्रवक्ता' के माध्यम से 'हिंद स्वराज्य' पर गंभीर-विमर्श की एक सार्थक शुरुआत  हुई. पूरी टीम को बधाई. अनेक विचार पढने के बाद  मेरे  मन भी हलचल हुई. सोचा, कि कुछ तो लिखा जाये. 'हिंद स्वराज्य' में गाँधी जी ने यंत्रो को लेकर भी गंभीर चर्चा की है. मै गाँधी जी ...

October 24th, 2009 | लेखक : गिरीश पंकज | 324 views | 2 Comments »
Posted in Category: हिंद स्‍वराज | Tags: Gandhi Ji, Girish Pankaj, Machinery Civilization, गाँधी जी, गिरीश पंकज, यांत्रिक सभ्यता, हिंद स्‍वराज

भारतीय जनता पार्टी के शलाखा पुरूष थे प्यारेलाल खण्डेलवाल : मयंक चतुर्वेदी

भारतीय जनता पार्टी के शलाखा पुरूष थे प्यारेलाल खण्डेलवाल : मयंक चतुर्वेदी रोज इस दुनिया में अनेक लोग जन्म लेते हैं लेकिन उनमें से कुछ बिरले ही होते हैं जो अपने आस-पास के वातावरण समाज और राष्ट्र के लिए स्वयं का समर्पण कर उदाहरण प्रस्तुत करते हुए इतिहास में अमर हो जाते हैं। चैत्र कृष्ण द्वादशी संवत् 1985, 6अप्रैल1929 को मध्यप्रदेश के ...

October 24th, 2009 | लेखक : मयंक चतुर्वेदी | 198 views | No Comments »
Posted in Category: विविधा | Tags: Bharatiya Janta Party, bjp, Pyarelal Khandewal, प्यारेलाल खण्डेलवाल, भारतीय जनता पार्टी, मयंक चतुर्वेदी, श्रद्धांजलि

मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान के नाम खुला पत्र

मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान के नाम खुला पत्र प्रिय श्री शिवराज सिंह जी, “अत्याचार ना भ्रष्टाचार, हम देंगें अच्छी सरकार”, “राज आप बदलें, व्यवस्था हम बदलेंगें” और बिजली पानी सड़क के मुद्दों पर प्रदेश की जनता ने भाजपा को सत्ता सौंपी थी। आज प्रदेश में भाजपा सरकार की दूसरी पारी शुरू हुये एक साल का समय बीत गया है। ...

October 22nd, 2009 | लेखक : आशुतोष वर्मा | 162 views | No Comments »
Posted in Category: विविधा | Tags: Chief Minister, Madhya Pradesh, Open Letter, Shivraj Singh Chauhan, खुला पत्र, मध्य प्रदेश, मुख्यमंत्री, शिवराज सिंह चौहान

अंधेरों की चीरती शब्दों की रौशनी – हिन्द स्वराज्य की शताब्दी वर्ष पर विशेष

अंधेरों की चीरती शब्दों की रौशनी - हिन्द स्वराज्य की शताब्दी वर्ष पर विशेष महात्मा गांधी की मूलतः गुजराती में लिखी पुस्तक हिन्द स्वराज्य एक बार फिर अपने सौ साल पूरे होने पर चर्चा में है। महात्मा गांधी की यह बहुत छोटी सी पुस्तिका कई सवाल उठाती है और अपने समय के सवालों के वाजिब उत्तरों की तलाश भी करती है। सबसे महत्व की ...

October 16th, 2009 | लेखक : संजय द्विवेदी | 1,605 views | 3 Comments »
Posted in Category: हिंद स्‍वराज | Tags: hind swaraj, हिंद स्‍वराज

दीवाली पर एक काम करना- गरीबों का भी ध्यान रखना….

दीवाली पर एक काम करना- गरीबों का भी ध्यान रखना.... सामने दीवाली है. एकदम सामने...हर कोई उसके स्वागत को तैयार है. धनपति की अपनी तैयारी है. निर्धन की अपनी आधी-अधूरी तैयारी है . दरअसल दीवाली का सम्बन्ध दिल से है. कहा भी तो गया है, न , कि मन चंगा तो कठौती में गंगा. मन में उदासी है, जेब खाली ...

October 15th, 2009 | लेखक : गिरीश पंकज | 176 views | No Comments »
Posted in Category: विविधा | Tags: Diwali, दीवाली

2 अक्टूबर को हम भी गांधी से मिले

2 अक्टूबर को हम भी गांधी से मिले गांधी को गुजरे दशकों बीत गए लेकिन वे आज भी करोड़ों दिलों में जिंदा हैं। कम से कम उनके जन्मदिन पर राजघाट स्थित उनके समाधि स्थल पर दो फूल चढाने वालों का तो यही मानना है। क्या पूरब, क्या पश्चिम, क्या उत्तर और क्या दक्षिण, देश के सुदूरवर्ती इलाकों से ...

October 15th, 2009 | लेखक : आरती शर्मा | 293 views | 7 Comments »
Posted in Category: विविधा | Tags: Mahatma Gandhi, गांधी

हिन्द स्वराज में दुनिया के सभी समस्याओं का समाधान नहीं है – गौतम चौधरी

हिन्द स्वराज में दुनिया के सभी समस्याओं का समाधान नहीं है - गौतम चौधरी हिन्द स्वराज पर टिप्पणी करने से पहले इस देश के अतीत और अपने पारिवारिक पृष्ठभूमि को खंगाला तो लगा कि जो गांधी कह रहे हैं वह हम पीढियों से करते आ रहे हैं। मेरा ननिहाल दरभंगा से सीतामढी की ओर जाने वाली छोटी लाईन के रेलवे स्टेषन कमतौल में है। ...

October 15th, 2009 | लेखक : गौतम चौधरी | 247 views | 1 Comment »
Posted in Category: हिंद स्‍वराज | Tags: hind swaraj, हिंद स्‍वराज

हिंद स्वराज की प्रासंगिकता पर विमर्श का आयोजन

१० अक्तूबर को भारत नीति संस्थान के द्वारा दीनदयाल शोध संस्थान, नई दिल्ली में " वर्तमान सन्दर्भ में हिंद स्वराज की प्रासंगिकता " विषय पर एक संगोष्ठी का आयोजन किया गया . इस संगोष्ठी में वरिष्ठ गांधीवादी चिन्तक और पूर्व सांसद राम जी सिंह , जेएनयु के प्राध्यापक अमित शर्मा ...

October 12th, 2009 | लेखक : जयराम 'विप्लव' | 326 views | 3 Comments »
Posted in Category: हिंद स्‍वराज | Tags: Jayram Viplav, जयराम "विप्लव", लोकतंत्र, सांस्कृतिक राष्ट्रवाद, हिंद स्वराज, हिंद स्‍वराज

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