लेखक परिचय

डॉ. मधुसूदन

डॉ. मधुसूदन

मधुसूदनजी तकनीकी (Engineering) में एम.एस. तथा पी.एच.डी. की उपाधियाँ प्राप्त् की है, भारतीय अमेरिकी शोधकर्ता के रूप में मशहूर है, हिन्दी के प्रखर पुरस्कर्ता: संस्कृत, हिन्दी, मराठी, गुजराती के अभ्यासी, अनेक संस्थाओं से जुडे हुए। अंतर्राष्ट्रीय हिंदी समिति (अमरिका) आजीवन सदस्य हैं; वर्तमान में अमेरिका की प्रतिष्ठित संस्‍था UNIVERSITY OF MASSACHUSETTS (युनिवर्सीटी ऑफ मॅसाच्युसेटस, निर्माण अभियांत्रिकी), में प्रोफेसर हैं।

Posted On by &filed under विविधा.


catholic churchडॉ. मधुसूदन:

सारांश:
***६४२७ चर्च के अधिकारी यौन शोषण में (लिप्त)आरोपित।
***प्रति १० में से ४ यु. एस. ए. के (४०%) कॅथोलिक चर्च छोड गए हैं।
***$150,747,387–(एक वर्ष में) उनके अभियोगों पर खर्च हुए।
***पर भारत में कॅथोलिक इसाइयत फैलाओ।

(१)
सोचिए, जुलाई २०१३ से जून २०१४ तक के, एक वर्ष में १५० मिलियन डालर से अधिक मुद्रा, केवल पादरियों के अभियोगों में, व्यय हुयी। यह ज्योर्ज टाउन युनिवर्सिटी की सांख्यिकी का विवरण है। मूल अंग्रेज़ी निम्न है।
================================================================
$150,747,387—-That’s how much the Catholic Church in the U.S. spent between July 2013 and June 2014 on costs “related to child protection efforts and to allegations of clergy sexual abuse of minors…” according to an annual survey by Georgetown University’s Center for Applied Research in the Apostolate (CARA).
================================================================

(२)
६४२७ अधिकारी दुराचार में लिप्त है।
यह है, इसाई (कॅथोलिक) पंथ की आध्यात्मिकता का वृत्तान्त:
निरीक्षण में क्या पाया ?
अनेक कॅथोलिक चर्च से संबद्ध पादरी और अन्य कर्मचारी यौन शोषण में संलिप्त पाए गए।
ये (अपवादात्मक) अल्प मात्रा में नहीं हुआ। बाल बालिकाओं के यौन शोषण के आरोपो में ६४२७ विभिन्न कॅथोलिक चर्च के (अन्यान्य पदों पर के ) अधिकारियों पर आरोप लगे हैं; अभियोग भी चल रहे हैं।

(३)
क्या, किसी जालस्थल पर इसकी सांख्यिकी (Statistics) उपलब्ध है?
जी, केवल, सांख्यिकी ही नहीं, पर कुछ विवरण भी आप को जालस्थल पर की सारणी में मिल जाएगा। निम्न जाल स्थल पर देख कर आप स्वयं निर्णय करें।
http://www.bishop-accountability.org/

(४)
इस जाल स्थल पर पादरियों के नाम-नगर और आरोप के वृत्तान्त सहित सारणी छपी हुयी है। A, B, C……..Z तक क्रमानुसार नाम नगर और आरोपों का संक्षिप्त विवरण दिया है।

(५)
एक, सितम्बर २७, २०१५ का सारा कॉफमन (Sarah Kaufman) का वृत्तान्त भी कॅथोलिक पंथ के पादरियों की सच्चाई उजागर करता है। इस वृत्तान्त के अंश का हिन्दी (अनुवाद)-और उसके नीचे मूल अंग्रेज़ी उद्धरण दिया जाता है।

पोप फ्रान्सिस की यौन–शोषण-पीडितों से भेंट
पहले, पोप बनने के १५ महीनों बाद, पोप फ्रान्सिस ने वेटिकन में यौन–शोषण -पीडितों से भेंट की थी; पर उस समय पोप (किसी कारणवश) यौन शोषण का विषय टाल गए थे। जिस के चलते, उस समय जीवित बचे हुए, यौन शोषण से पीडित, जो उनसे मिलने आए हुए थे; काफी दुःखी, निराश एवं भयभीत थे।
मूल अंग्रेज़ी:
He had previously met with victims 15 months into his papacy at the Vatican, but has largely avoided the issue, to the consternation and unhappiness of survivors.

(६) पर सितम्बर २७, २०१५ का *कॅथोलिक चर्च के यौन शोषण के आँकडे* नाम का वृत्तान्त, उनकी भेंट का समाचार देता है।
===>इस बार, यु. एस. ए. प्रवास के अंतिम दिन पोप फ्रान्सीस यौन-शोषण -पीडितों से मिले। सैंकडों, बिशपों और सेमिनरियनों से भेंट के बाद, जीवित बचे हुए पीडितों से भी मिले। इस मिलन के बाद पोप फान्सीस, फिलाडेल्फिया में बोले।*
*यौन पीडित और शोषित बच्चों के लिए, भगवान भी रोते हैं।*
मूल अंग्रेज़ी:
*God weeps for the sexual abuse of children,” Francis said in Philadelphia, after meeting with hundreds of bishops and seminarians as well as privately with victims of clergy sexual abuse.*

हिन्दी: (अनुवाद)
पोप फ्रान्सीस बोले===> *मैं अत्यधिक लज्जा (व्याकुलता) अनुभव कर रहा हूँ। जिन लोगों के रक्षण तले अबोध बालक थे उन्हीं ने उनपर (दुराचार )बलात्कार कर भारी क्षति पहुंचाई है।*
मूल अंग्रेज़ी में:
*I am overwhelmed by the shame that people who were in charge of caring for those young ones raped them and caused them great damages.*

हिन्दी: (अनुवाद)
===>उन प्रत्येक शोषित के प्रति, मैं, कृतज्ञता व्यक्त करता हूँ; जो, उन्हें भयंकर (यौन) शोषण की पीडा सहनी पडी।
मूल अंग्रेज़ी:
*Humbly, we owe each of them our gratitude for their value as they have had to suffer terrible abuse,*—– Francis said.

Sarah :
4 In 10 U.S. Catholics Left The Church. Can The Pope Bring Them Back?

सारा कौफमन पूछती है: १० में ४ यु. एस. ए. के कॅथोलिक चर्च छोड कर गए हैं. क्या पोप उन्हें वापस ला सकते हैं?

लेखक:
टेरेसा को सन्त घोषित करने के पीछे लेखक को, कूटनैतिक चाल प्रतीत होती है। यु एस ए के ४०% कॅथोलिक चर्च छोड गए हैं उनकी भरपाई भारत में कॅथोलिक इसाइयत को फैलाने का उद्देश्य है।
संदर्भ :
(१)Sarah Kaufman के रिपोर्ट:Sept 27, 2015
(२) http://www.bishop-accountability.org/
(३) ज्योर्ज टाउन युनिवर्सिटी की सांख्यिकी

Leave a Reply

5 Comments on "कॅथोलिक दिये तले है,अंधेरा!"

Notify of
avatar
Sort by:   newest | oldest | most voted
बलराम सिंह
Guest
बलराम सिंह

पोप को यह समस्या केवल भगवान के रोने पर नहीं छोड़नी चाहिए। बल्कि ऐसी घटनाओं को रोकने की दिशा में क़दम उठाना चाहिए। लेख भारतीय समाज के लिए सूचनात्मक उपयोगिताकारी है।

डॉ. मधुसूदन
Guest
डॉ. मधुसूदन

डॉ. बलराम सिंह जी नमस्कार।
सही कहा आपने।
बडी चालाकी से पोप नें ऐसा वक्तव्य दिया, जिससे धरती पर, कुछ किए बिना ही, विरोध भी व्यक्त हो गया। उदार और भोले भारतीयों को उल्लू बनाकर भारत में कॅथोलिक इसाइयत फैलाने के लिए, टेरेसा को संत की उपाधि भी दे दी।
वाह! वाह!!
हाला लुया। Hallelujah (“Praise be to the Lord!”)
==> उदारवादी हिन्दू, हिन्दु को छोडकर अन्य सभी के लिए उदार है।

Arish Sahani
Guest

Christianity is falling apart as once you get educate you need proof and Logic.
Lookslike Islam( arabs ) is smart they keep their follower poor and uneducated and under feel nee question or you are dead.
Looks like we have no end of fools under islam hard to change them and difficult to kill so many now .Many be their God will bring a way to stop them ,or destroy them .

Anil Gupta
Guest

लगभग ४० प्रतिशत लोग अपने को असम्बद्ध मानते हैं! अर्थात वो किसी पंथ से नहीं बंधे हैं! और लगभग २०% लोग स्वयं को नास्तिक कहते हैं! ऐसा संभवतः अब्राहमवादी पंथों द्वारा लोगों की बढ़ती वैज्ञानिक जिज्ञासु वृत्ति की संतुष्टि न कर पाने के कारण है! लेकिन ब्रह्मवादी अर्थात सनातन धर्म में सभी जज्ञासाओं का विज्ञानसम्मत समाधान किया जा सकता है! अतः सनातन धर्म के पुनः विस्तार की अभूतपूर्व संभावनाएं बन रही हैं!

डॉ. मधुसूदन
Guest
डॉ. मधुसूदन

(१) धन्यवाद। आ. गुप्ता जी से १००% सहमति।
(२) इस परिस्थिति में/से विज्ञानशुद्ध वैदिक विचारधारा ही लाभ ले सकती है।
(३) शुद्ध वैज्ञानिक धरातल पर, अद्वैत-वेदान्त (वेदान्त सोसायटी), ध्यान योग, योगासन, आयुर्वेद, संस्कृत…..इत्यादि क्षेत्रों में हमारा प्रभाव रहेगा।
(४) यह शतक भारत का होने जा रहा है। भारत के सांस्कृतिक (ज्ञानी) दूत भारी संख्या में चाहिए।
(५) अरविन्द-विवेकानन्द इत्यादि की भविष्यवाणी सही प्रमाणित हो रही है।
विनम्र नमस्कार।

wpDiscuz