लेखक परिचय

राजकुमार सोनी

राजकुमार सोनी

स्वतंत्र वेब लेखक व ब्लॉगर

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– राजकुमार सोनी

दो विपरीत विचार हकीकत में नहीं बदलते

विचार नियम के बारे में अधूरा ज्ञान न रखें। आधे-अधूरे ज्ञान से विचार नियम का उपयोग करेंगे तो आपके जीवन में कुछ चीजें तो आ जाएंगी, कुछ विचार तो हकीकत में बदल जाएंगे, लेकिन फिर भी आप दु:खी रहेंगे। इसके लिए आप विचारनियम को पूरी तरह समझें। आपको यह पता होना चाहिए कि कौन से विचार हकीकत में बदलते हैं। सारे विचार साकार नहीं होते, क्योंकि दिनभर में कई विचारयूं ही चलते रहते हैं। ये शेखचिल्ली जैसे विचार हकीकत में नहीं बदलते। जिनविचारों में होश और जोश होता है, वे ही हकीकत में बदलते हैं।

 

विचारों की भीड़

इंसान शेख चिल्ली की तरह विचारों की भीड़ मेंभटकता रहता है कि मुझे यह चाहिए… मुझे वह मिल गया तो इससे मैं यह कहूंगा… फिर ऐसा होगा…। इस तरह विचारों के शोरगुल में कई बार वह अपनेही विचारों के विरुद्ध सोचने लगता है। नतीजा यह होता है कि उसे कोई परिणाम नहीं मिलता। जिस इंसान को जीवन में कोई फल, कोई परिणाम नहीं मिल रहा हो, उसे इस बात पर मनन करना चाहिए कि मेरे विचार एक-दूसरे को कहां पर काट रहे हैं?

उदाहरण- एक आदमी सोचता है, मेरे घर में शांति हो जाए तो कितना अच्छा होगा। उसका यह विचार काम करने लगता है और उसके फल को देने की सृजन प्रक्रिया शुरूहो जाती है। मगर दूसरे ही दिन वह सोचने लगता है, इस घर में शांति संभव ही नहीं है। न तो मेरी पत्नी सुधरने वाली है, न ही मेरा भाई। ये लोग कभी नहीं सुधर सकते। उसके ऐसे विचार उसके पहले विचार को काट देते हैं। अगर सामने वाला नहीं सुधरेगा तो घर में शांति कैसे आएगी। उस इंसान को पता ही नहीं चलता कि उसने अपने इस नकारात्मक विचार से अपना कितना नुकसान कर दिया। उसने अपने पुराने सकारात्मक विचार को काट डाला और अच्छा फल देने वाली सृजनप्रक्रिया को बीच में ही रोक दिया।

 

ऐसे रखें ख्याल

आपको इस बात का ख्याल रखना है कि आपके विचार अच्छे होंगे, लेकिन यदि आपको फल नहीं मिलता हो तो खुद से पूछें कि कहीं ऐसा तो नहीं कि मैं अपने विचार काट रहा हूं? फिर स्वयं देखें कि मैं अपने अच्छे विचारों को कहां-कहां काट रहा हूं? अगर आप दो विपरीत दिशाओं में जाना चाहेंगे तो यह संभव नहीं होगा। कुदरत का नियम समझ लें। विचार नियम आपके होश और जोश वाली इच्छाएं पूरी करता है। अगर आप कहते हैं कि घर में शांति चाहिए, तो कुदरत उसकी सृजन प्रक्रिया शुरू कर देती है। दूसरी ओर, अगर आप कहते हैं कि मेरी पत्नी नहीं सुधरने वाली, तो भी कुदरत अपनी सृजन प्रक्रिया शुरू कर देती है। आप जो भी विचार करो, कुदरत तो बस तथास्तु कहती है, यानी आपको अपने कहे मुताबिक परिणाम मिलेंगे, आपकी हकीकत आपकी प्रबल इच्छा के अनुरूप होगी।

 

विचारों को काटें नहीं

जब इंसान की दो विपरीत विचारधाराएं एक दूसरे-दूसरे को काट देती हैं, तब वह देखता है कि उसके घर में कभी खुशी, कभी गम का माहौल चलता रहता है। उसे विचार नियम का पूर्ण ज्ञान नहीं होता, इसलिए वह नहीं जानता कि उसके घर में स्थायी खुशी आ सकती थी, ज्यादा खुशी आसकती थी, लेकिन नकारात्मक विचार रखकर उसने अपने ही पैरों पर कुल्हाड़ी मारली। उसने अपने विचारों में गलत बीज डालकर अपने नुकसान का फल खुद तैयार करलिया। इसलिए इस बात का ध्यान रखें और यह मानकर चलें कि आप जो भी चाहते हैं, वह सब आपको मिल सकता है।

 

सही ढंग से पालन करें

अगर आप विचार नियम का सही पालन करें तोआपके जीवन में बहुत कुछ संभव हो सकता है। जब विचार नियम की पूर्ण समझ आजाती है, तो फिर आपके विचार अलग ढंग के हो जाते हैं। फिर आपके जीवन में केवल खुशी और सुख ही आता है। फिर शेखचिल्ली जैसे विचार बंद हो जाते हैं।

 

भावना को बल दें

किसी महापुरुष से एक बार पूछा गया था कि हमजो सपने देखते हैं, क्या वे साकार होते हैं? उसने कहा कि जो सपने हम सोतेहुए देखते हैं, वे साकार नहीं होते। साकार तो वे सपने होते हैं, जो हमेंसोने नहीं देते। उनके कहने का अर्थ यह था कि मनचाहे जीवन के जिन विचारोंमें प्रबल भावनाओं की शक्ति जुड़ जाती है, वे हमें कभी-कभी सोने नहीं देते। आपके कुछ विचार ऐसे होते हैं जो हकीकत में बदल चुके होते हैं, साकार होचुके होते हैं, लेकिन उन्हें आप तक पहुंचने में देर लगती है। वे रास्ते में ही रुक गए होते हैं। ऐसा होता है क्योंकि आप उन विचारों को भावना का बलदे ना छोड़ देते हैं। आपको कुछ दिखाई नहीं देता कि क्या हो रहा है, क्योंकि आपके लिए सब अदृश्य में होता है। अदृश्य में होने की वजह से लोग अपने विचारों को बल देना बंद कर देते हैं। वे कहते हैं कि हमने कुछ शुभ विचार रखे, मगर उसका अच्छा परिणाम नहीं मिल रहा है, कुछ तो गलत हो रहा है। जब चीजें दृश्य में नहीं दिखतीं तो उनका विश्वास चला जाता है और वे उन्हें भावना को बल देना बंद कर देते हैं, अपनी प्रार्थनाएं बंद कर देते हैं, मनन के द्वारा भावनाओं को जागृत करना बंद कर देते हैं। नतीजा यह होता है कि जो चीज उनके पास आ रही थी, बीच में ही रुक जाती है। जब आप बुरी भावना महसूस करते हैं, तब आप पीतल बनते हैं, जो लाल बल्ब का प्रतीक है। लाल बल्ब कहता है, रुको, कुछ करो, फिर चलो। जब आप खुशी की भावना महसूस करते हैं, तब आप चुंबक बन जाते हैं, जो हरे बल्ब का प्रतीक है। हरा बल्ब कहता है, आगे चलो, सफलता तुम्हारे कदम चूमेगी। इस सूत्र को ध्यान में रखते हुए सदा खुश रहकर, चुंबक बनकर हर सकारात्मक चीज को आकर्षित करें, जो आप अपने जीवन में चाहतेहैं।

 

विचारों से सब कुछ पाएं

विचारों के द्वारा सब कुछ पाया जा सकता है तो लोगों ने क्यों नहीं पाया। कुछ लोगों के मन में सवाल आता है कि यदि विचारों से ही सब निर्माण होता है तो जिन लोगों को विचार नियम पता है, उनके पास कार क्यों नहीं है। दुनिया के ऐशो आराम क्यों नहीं हैं? इसे उदाहरण से समझें- आपके सामने केक आया है, केक के ऊपर क्रीम लगी है। क्रीम के ऊपर चेरी रखी गई है। अब आप बताएं कि पहले आप चेरी खाएंगे या उसके ऊपर लगी हुई आइसक्रीम खाएंगे। हर इंसान इस सवाल का जवाब अलग देगा। कोई कहेगा, मैं पहले केक का छोटा टुकड़ा खाऊंगा और चेरी सबसे अंत में ही खाऊंगा, ताकि अच्छा स्वाद लंबे समय तक बना रहे। कोई कहेगा, मैं पहले चेरी खाऊंगा, ताकि अच्छा स्वाद जल्दी से जल्दी मुंह में भर जाए। खाना खाते वक्त भी कई लोग ऐसा करते हैं। कुछ लोग स्वादिष्ट चीज को अंत के लिए बचाकर रखते हैं। कुछ लोग स्वादिष्ट चीज को सबसे पहले खाते हैं, तो कुछ लोग बीच-बीच में। यह लोगों का अपना चयन है, उनका चुनाव है। लोगों के मन में सवाल होते हैं, क्योंकिउन्हें लगता है कि जो भी इंसान विचारों का रहस्य जान गया, उसके जीवन में सारे ऐशोआराम होने चाहिए। अगर नहीं है तो इसका अर्थ है कि सामने वाला विचारों का नियम नहीं जानता। परंतु ऐसा बिलकुल जरूरी नहीं है। वास्तव में हर एक के जीवन में प्राथमिकता अलग होती है। हर इंसान अपनी प्राथमिकता ओं के अनुसार नियम का उपयोग करता है। लोकप्रिय हो जाने के बाद कुछ लोगों के जीवनमें कई सारे बदलाव हो जाते हैं, जिनके कारण बाद में उन्हें सृजन का समय ही नहीं मिलता। ऐसे भी लोग देखे गए हैं, जो फ्री नहीं होते और न ही रिस्कफ्री होते हैं। लोकप्रिय होने के कारण उनसे नया निर्माण होना बंद हो जाता है। इसलिए आपको पहले ही यह सोच लेना चाहिए कि आप अपने विचारों द्वारा किन चीजों को पहले आकर्षित करना चाहते हैं। कहीं गलत चीज आकर्षित कर ली तो उनसेनिबटने में ही पूरा जीवन चला जाएगा। कार की चाहत किसी के लिए बेकार हो सकती है तो वह उन चीजों के लिए प्रार्थना नहीं करेगा।

 

समस्या से पहले समाधान

समस्या से पहले समस्या का समाधान दिया जाता है। यह कुदरत का नियम है। इंसान को शक्ति पहले दी जाती है, समस्या बाद में दी जाती है। इसका अर्थ है कि विचार नियम आपके साथ सदैव कार्य कर ही रहा है। आप जो भी समस्या सुलझाना चाहते हैं, निर्णय लेना चाहते हैं, उसके लिए समाधान मौजूद हैं, इसलिए कहा गया कि थोड़ा सोचें, सही दिशा में सोचें। किसी की चाहत होती है कि मैं पहले फलां फलां चीजें प्राप्त कर लूं, इसके बाद जीवन को खुलकर जीऊंगा। पहले मुझे ये सब वस्तुएं मिल जाएं… पहले अच्छा पेन मिले… अच्छी नोटबुक्स मिले…. अच्छे रंग की स्याही मिले… फिर मैंलिखना शुरू करूंगा। दूसरी ओर, कुछ लेखक ऐसे भी हुए हैं, जिन्होंने रद्दी कागजों पर ही कहानी लिख डाली। उन्होंने यह विचार नहीं किया कि पहले मुझे अच्छी नोटबुक मिल जाए…. अच्छे पेन मिल जाएं… फिर मैं एक अच्छी कहानी लिखूंगा। उन्हें जो मिला, उससे उन्होंने लिखना शुरू किया। कुछ लेखकों ने तोलिफाफे के पीछे, बस की टिकट के पीछे, जहां भी जगह मिली, वहीं लिखना शुरूकर दिया। वे सब कागज जमा करते गए। जब भी उनके कपड़ों की जेब में देखेंगे तोकई कागज निकल आएंगे। उन्होंने यह नहीं सोचा कि उन्हें सारी सुख-सुविधाएं चाहिए, तभी वे लिखेंगे। उनके मन में तो यह विचार था कि ऐसा सृजन करें, कोई ऐसी कहानी लिखें, जो विश्व में प्रसिद्ध हो, जो लोगों को पाठक बनाए। समय के साथ लोगों में पढऩे की आदत कम होती जा रही है। टीवी और कंप्यूटर आने केबाद लोग पुस्तकें पढऩा कम कर रहे हैं, इसलिए ऐसे लेखक, लोगों में पढऩे कीकम होती आदत को दोबारा स्थापित करना चाहता है। यह लेखक का मूल विचार होताहै। वह कार, धन-दौलत के बारे में सोचता तकनहीं, क्योंकि ये सब चीजें तो बोनस में अपने आप मिल जाती हैं। जरूरी नहीं है कि विचार रखने पर ही कार या धन-दौलत मिलेगी। वह तो अपने आप मिलेगी। मुख्य सवाल यह है कि आपका मूल विचार किस चीज को आकर्षित कर रहा है- समृद्धि को…दिव्य योजना को… ईश्वर के गुणों की अभिव्यक्ति को…. या प्रेम को आकर्षित कर रहा है? आपका मूल विचार अच्छी चीजों को आकर्षितकरे या बुरी चीजों को, यह निर्णय आपको लेना है। उदाहरण से आपने समझा कि हरएक की पसंद अलग होती है। चुनाव अलग होता है और चाहत भी अलग होती है। कोई चाहता है कि सबसे स्वादिष्ट चीज पहले खाऊं यानी सबसे पहले सुख सुविधाएं मिलजाएं, बाकी चीजें बाद में देखेंगे। लेकिन इसमें बहुत बड़ा खतरा है। अगर मनसुख सुविधाओं में अटक गया तो सृजन का काम अधूरा रह जाएगा।

 

 

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