लेखक परिचय

मिलन सिन्हा

मिलन सिन्हा

स्वतंत्र लेखन अब तक धर्मयुग, दिनमान, कादम्बिनी, नवनीत, कहानीकार, समग्रता, जीवन साहित्य, अवकाश, हिंदी एक्सप्रेस, राष्ट्रधर्म, सरिता, मुक्त, स्वतंत्र भारत सुमन, अक्षर पर्व, योजना, नवभारत टाइम्स, हिन्दुस्तान, प्रभात खबर, जागरण, आज, प्रदीप, राष्ट्रदूत, नंदन सहित विभिन्न पत्र-पत्रिकाओं में अनेक रचनाएँ प्रकाशित ।

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-मिलन सिन्हा- socialism

 

बैसाखियों पर चलनेवाले

दे रहे हैं लेक्चर

कैसे खुद अपने पैरों पर

खड़ा हुआ जाता है !

दूसरों का टांग खींच कर

आगे बढ़नेवाले

बता रहे हैं

आपका आचरण कैसा हो !

दूसरों के कंधों को

सीढ़ी बनाकर ऊपर उठने वाले

उपदेश दे रहे हैं !

कैसे आकाश की बुलंदियों को छुआ जाय !

बात – बात पर

थूककर चाटनेवाले

वचन निभाने का

वादा कर रहे हैं !

दूसरों का पद पूजन करके

पद प्राप्त करनेवाले

अब पद की मर्यादा का

महत्व समझा रहे हैं !

ज़माना बदलता है

ज़माना बदलेगा

ये  तो जानते थे हम

लेकिन इतना और ऐसा बदलेगा

ऐसा कहां सोचा था

ऐसा कब किसी ने कहा था !

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