लेखक परिचय

अशोक बजाज

अशोक बजाज

श्री अशोक बजाज उम्र 54 वर्ष , रविशंकर विश्वविद्यालय रायपुर से एम.ए. (अर्थशास्त्र) की डिग्री। 1 अप्रेल 2005 से मार्च 2010 तक जिला पंचायत रायपुर के अध्यक्ष पद का निर्वहन। सहकारी संस्थाओं एंव संगठनात्मक कार्यो का लम्बा अनुभव। फोटोग्राफी, पत्रकारिता एंव लेखन के कार्यो में रूचि। पहला लेख सन् 1981 में “धान का समर्थन मूल्य और उत्पादन लागत” शीर्षक से दैनिक युगधर्म रायपुर से प्रकाशित । वर्तमान पता-सिविल लाईन रायपुर ( छ. ग.)। ई-मेल - ashokbajaj5969@yahoo.com, ashokbajaj99.blogspot.com

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(पूर्व प्रधानमंत्री श्री अटलबिहारी बाजपेयी के जन्मदिन 25 दिसंबर पर विशेष)

                                         पूर्व प्रधानमंत्री श्री अटलबिहारी बाजपेयी देश के सर्वाधिक लोकप्रिय एवं सर्वमान्य नेता के रूप में जाने जाते है. वे सदैव सुचिता, सुशासन और सुराज के हिमायती रहें है. उन्होंने अपने लंबे राजनितिक जीवन में ना कभी मूल्यों से समझौता किया और ना ही अपनी कथनी व करनी में भेद किया. अटलजी ने जो कहा वही किया तथा जो किया वही कहा. अपनी प्रभावी वाक-शैली के बल पर लाखों की भीड़ को घंटों बांध कर रखने की उनमें अद्भूत क्षमता है. वे सत्ता व विपक्ष दोनों की भूमिका में श्रेष्ठ साबित हुए है. श्री बाजपेयी के पास 40 वर्षो से अधिक का एक लम्बा संसदीय अनुभव है. वे 1957 से सांसद रहे हैं. वे पांचवी, छठी और सातवी लोकसभा तथा फिर दसवीं, ग्यारहवीं, बारहवीं, तेरहवीं और चैदहवीं लोकसभा के लिए चुने गए और सन् 1962 तथा 1986 में राज्यसभा के सदस्य रहे, वे लखनऊ (उत्तरप्रदेश) से लगातार पांच बार लोकसभा सांसद चुने गए. वे ऐसे अकेले सांसद हैं जो अलग-अलग समय पर चार विभिन्न राज्यों उत्तरप्रदेश, गुजरात, मध्यप्रदेश तथा दिल्ली से निर्वाचित हुए हैं.
अटल जी अस्वस्थता की वजह से पिछले कुछ वर्षो से भले ही सक्रिय राजनीति से दूर है लेकिन उनका वकृत्व व कतृत्व आज भी आम जनता के मानस पटल पर आच्छादित है. छत्तीसगढ़ की जनता तो उनकी विशेष रूप से आभारी है क्योंकि उन्होंने एक झटके में छत्तीसगढ़ राज्य का निर्माण कर अपनी कथनी और करनी की समानता को सिद्ध किया था. उन्होंने सन 1998 में सप्रेशाला रायपुर के मैदान में एक अटल-प्रतिज्ञा की थी कि यदि आप लोकसभा की 11 में से 11 सीटों में भाजपा को जितायेंगे तो में तुम्हें छत्तीसगढ़ राज्य दूंगा. हालाॅकि चुनाव में भाजपा को 11 में से मात्र 8 सीटे ही मिली थी लेकिन केंद्र में अटलजी की सरकार फिर से बन गई. उन्होंनेे अपनी प्रतिज्ञा के अनुरूप राज्य निर्माण के लिए पहले ही दिन से प्रक्रिया प्रारंभ कर दी. मध्यप्रदेश राज्य पुर्निमाण विधेयक 2000 को 25 जुलाई 2000 को लोकसभा में पेश किया गया, इसी दिन दो अन्य प्रस्तावित राज्यों उत्तराखंड और झारखंड का विधेयक भी पेश हुआ. लोकसभा 31 जुलाई 2000 को और राज्य सभा में 9 अगस्त को छत्तीसगढ़ राज्य निर्माण के प्रस्ताव पर विधिवत मुहर लग गई. 25 अगस्त को महामहिम राष्ट्रपति ने इसे मंजूरी दे दी. 4 सितंबर 2000 को भारत सरकार के राजपत्र में प्रकाशन के बाद 1 नवंबर 2000 को छत्तीसगढ़ देश के 26 वें राज्य के रूप में अस्तित्व में आया. इसके साथ ही छत्तीसगढ़ की जनता की बहुप्रतीक्षित मांग पूरी हुई और साथ ही साथ अटलजी की एक अटल-प्रतिज्ञा भी पूरी हुई.
अटल जी ने ना केवल छत्तीसगढ़ राज्य का निर्माण किया बल्कि इसके विकास के लिए पर्याप्त संसाधन भी उपलब्ध कराये. फलस्वरूप पिछले 14 वर्षो में छत्तीसगढ़ ने ग्रामीण व शहरी विकास के मामले में लंबी छलांग लगाई है.राज्य गठन के समय गरीबी, बेकारी, भूखमरी, अराजकता एवं पिछड़ापन हमें विरासत में मिला था. लेकिन चैदह वर्षो में गरीबी, बेकारी, भूखमरी, अराजकता एवं पिछड़ापन के खिलाफ संघर्ष करके छत्तीसगढ़ आज ऐसे मुकाम पर खड़ा है. जहां देखकर अन्य विकासशील राज्यों को हमसे ईष्र्या हो सकती है. सरकार की जनकल्याणकारी योजनाओं के माध्यम से नगर, गांव व कस्बों की तकदीर व तस्वीर तेजी से बदल रही है. नई सरकार के लिए गांवों का विकास एक बहुत बड़ी चुनौती थी लेकिन इस काल-खण्ड में विकास कार्यो के सम्पन्न हो जाने से गांव की नई तस्वीर उभरी है. गांव के किसानों को सिंचाई, बिजली, सड़क, पेयजल, शिक्षा व स्वास्थ जैसी मूलभूत सेवांए प्राथमिकता के आधार पर मुहैया कराई गई है. हमें याद है कि पहले गांवों में ग्राम पंचायतें थी लेकिन पंचायत भवन नहीं थे, शालाएं थी लेकिन शाला भवन नहीं थे, सड़के तो नहीं के बराबर थी, पेयजल की सुविधा भी नाजुक थी लेकिन अब गंावों में सेवाओं व सुविधाओं का विस्तार हुआ है. विकास कार्यो के नाम पर पंचायत भवन, शाला भवन, आंगनबाड़ी भवन, मंगल भवन, सामुदायिक भवन, उप स्वास्थ केन्द्र, निर्मला घाट, मुक्तिधाम जैसे अधोसंरचना के कार्य गांव-गांव में दृष्टिगोचर हो रहे है. अपवाद स्वरूप ही ऐसे गांव बचें होंगे जहां बारहमासी सड़कों की सुविधा ना हो, गांवों को सड़कों से जोड़ने से गांव व शहर का फासला कम हुआ है. अनेक गंभीर चुनौतियों के बावजूद ग्रामीण विकास के मामले में छत्तीसगढ़ ने उल्लेखनीय प्रगति की है. छत्तीसगढ़ का भूखमरी से मुक्त कराने के लिए डा. रमन सिंह की सरकार ने बी. पी. एल. परिवारों को 1 रूपये/2 रूपये किलों में प्रतिमाह 35 किलों चावल देने का एतिहासिक निर्णय लिया जो देश भर में अनुकरणीय बन गया है. किसानों को शून्य प्रतिशत ब्याज दर पर फसल ऋण प्राप्त हो रहा है. स्कूली बच्चों को मुफ्त में पाठ्य पुस्तकें उपलब्ध कराई जा रहीं है. वनोपज संग्रहणकर्ता मजदूरों को चरण – पादुकाएं दी जा रहीं है. अगर यह संभव हो पाया तो केवल इसलिए कि माननीय अटलबिहारी बाजपेयी ने एक झटके में छत्तीसगढ़ का निर्माण किया, छत्तीसगढ़ की जनता अटल जी की सदैव  ऋणी रहेगीं.

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