लेखक परिचय

डा. राधेश्याम द्विवेदी

डा. राधेश्याम द्विवेदी

Library & Information Officer A.S.I. Agra

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combodian girlअविकसित मानव बच्चों की कहानियां (7)

 

डा. राधे श्याम द्विवेदी

यह रतन केरी प्रांत की तथाकथित कम्बोडियाई जंगली लड़की थीै जो 1979 में पैदा हुई थी । वह जब आठ साल की थी तो अपने छः साल के बहन के साथ भैंस चराने गयी थी। जहां जंगल मंे वह कहीं खो गई थी। वह 18 या 19 साल पहले लापता हो गई थी। उसे चावल की चोरी के मामले से जोड़ा गया था। 29 या 30 साल की होने पर 2007 ई़ में वह पुनः देखी गयी थी।

उसे अनेक तरह के पशुओं ने पाला था। 13 जनवरी 1979 को कम्बोडिया के एक गांव के एक परिवार ने अपनी 18 या 19 साल पहले खोई हुई लड़की राचोम पेंगिंग के रूप में पहचान की थी। इसके बाद यह उस समय के मीडिया में भी छायी रही। एक ग्रामीण का खाने का टिफिन खो गया था। जिसे खोजने का काम चल रहा था तो यह नग्न और डरी हुई लड़की का पता चला था। उस मामले में गवाही आदि का दौर भी चला था। तब अन्तर्राष्ट्रीय स्तर पर लोगों का ध्यान इस ओर गया था। इसके तथाकथित मां ने अपनी खोई हुई लड़की को पहचान लिया था। उसने अपने कुछ दोस्तो को इकट्ठा किया और अपनी खोई हुई लड़की को पकड़ लिया था। उसकी पीठ पर एक कट का निशान था। उसके पिता तथा लम्बे समय तक पुलिस की सेवा करने वाले एक पुलिस कर्मी ने उसे पहचाना था। इसके एक हफते बाद उसके पहचान की पुष्टि हुई थी। फिर उसे सभ्य जीवन में लाने की कोशिस की गई। स्थानीय पुलिस ने यह दर्ज किया कि वह केवल तीन शब्द ’पिता’ ,’मां’  और ’पेट’ ही बोल पाती थी।

एक स्पेनिश मनोवैज्ञानिक उसके पास आयी और उसका परीक्षण कर इस निष्कर्ष पर पहुंची कि उसे कुछ शब्द, उसको मुस्काना, खिलौना, जानवर तथा दर्पण आदि को दिखाकर उसे एक खेल मे लगाया गया तो जबाब में वह मात्र मुस्कुरा देती थी । वह कोई शब्द बोल नहीं पाती थी। जब उसे प्यास लगती या भूख लगती तो वह मुह में खाने या पानी पीने का इशारा मात्र कर पाती थी। वह घुमावदार न चलकर सीधा चलना पसन्द करती थी। उसके परिवार ने उसे घड़ी के हिसाब से देखा कि कहीं वह पुनः जंगल में ना चली जाय। उसकी मां ने बराबर प्रयास किया कि वह कपड़े धारण कर ले।

’’गार्जियन’’ अखबार के एक भ्रमणकारी संवाददाता ने लिखा है कि वास्तव में वह अपने परिवार का एक अलग पहचान रखती थी । रात मे वह उदासीन और वेचैन हो जाया करती थी। उसने जंगल में रहने के लिए कई बार अपने माता पिता से भागना चाहा अन्त में मई 2010 में वह जंगल में वापस लैट गई थी। उसे पुनः पटरी पर नहीं लाया जा सका था। उसके सुधारको को यह लगा कि वह अपने ज्यादातर ठिकानों से अनजान थी। वह अन्य जंगली लड़कियों की जगह आनुशनगिक प्रबत्तियों का प्रदर्शन कर पा रही थी। कुछ लोगों को उसकी वैधता पर संदेह था। वह लगभग एक दशक तक मनुष्यों के बीच रही थी।

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