लेखक परिचय

मिलन सिन्हा

मिलन सिन्हा

स्वतंत्र लेखन अब तक धर्मयुग, दिनमान, कादम्बिनी, नवनीत, कहानीकार, समग्रता, जीवन साहित्य, अवकाश, हिंदी एक्सप्रेस, राष्ट्रधर्म, सरिता, मुक्त, स्वतंत्र भारत सुमन, अक्षर पर्व, योजना, नवभारत टाइम्स, हिन्दुस्तान, प्रभात खबर, जागरण, आज, प्रदीप, राष्ट्रदूत, नंदन सहित विभिन्न पत्र-पत्रिकाओं में अनेक रचनाएँ प्रकाशित ।

Posted On by &filed under कविता, चुनाव, राजनीति.


-मिलन सिन्हा- Communal Politics1

 

लो, आ गया फिर चुनाव !

न जाने इस बार

किस -किस की डूबेगी नाव

इसी सोच में पड़े नेतागण

घूमेंगे अब गांव-गांव

पहले जहां यदा-कदा ही

पड़ते थे उनके पांव

लो, आ गया फिर चुनाव !

 

आज जब कि बाजार में

कई चीजों का बना है अभाव

और जो मिल भी रही है

उनका चढ़ा हुआ है भाव

तब हमारे गांवों-गलियों में

नेताओं का नहीं रहेगा अभाव

लो, आ गया फिर चुनाव !

 

खेलेंगे हर खेल, चलेंगे हर दांव

बदलते रहेंगे अपना हावभाव

पर चुनाव समाप्त होते ही

बदल जायेगा उनका स्वभाव

और फिर ख़त्म हो जाएगा

जनता से उनका कथित लगाव

लो, आ गया फिर चुनाव !

Leave a Reply

Be the First to Comment!

Notify of
avatar
wpDiscuz