लेखक परिचय

तिलक राज रेलन

तिलक राज रेलन

फिल्‍म उद्योग में मनोज कुमार, कविता में दिनकर, वातस्‍विक जीवन में भगत सिंह एवं आध्‍यात्मिक जीवन में कृष्‍ण से प्रेरणा ग्रहण करनेवाले तिलकजी ‘युगदर्पण’ के संपादक हैं। समसामयिक विषयों पर उनकी लेखनी निरंतर चलती रहती है।

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-तिलक

कम्प्यूटर आज के समय का सर्वाधिक विश्वसनीय व महत्वपूर्ण उपकरण है जिस पर हम पूर्णतया निर्भर करते हैं! सर्च इंजन से कुछ भी खोज सकते हैं मात्र एक संकेत पर! मदारी ने कुछ चमत्कार दिखलाय, (पहले के मदारी तो खेल करतब से मनोरंजन कर दो समय की रोटी की भीख मानता था) हमारे देश के नेताओं ने देश का भविष्य ही मदारी के हाथों सौंप दिया! कभी वायरस, कभी हेकिंग, कभी गुप्त जानकारी से बेंक से खाता खाली! कुछ दिन पूर्व नोएडा पुलिस का नेटवर्क जो विदेशी संचित था, बंद हो गया था! संभवत: यह पुराभ्यास था इस देश को ठप्प करने का, अथवा इस धमकी से कुछ मनवाने का प्रयास! अब हम आगे बढते हैं -हमने खोजना चाह भारत योग संस्थान, हमें उसके स्थान पर 3 प्रकार के परिणाम विदेशों के योग क्लब, कई प्रकार के संस्थान भारत पेट्रोलियम से लेकर भारत के वेश्यालयों तक की जानकारी मिलेगी! अब आप भारत योग संस्थान पंजीकृत कर पुन: खोजना चाहें निश्चित नहीं है खोज पाना! कई बार हम अपनी ही साईट खोलने हेतु पासवर्ड डालते है- आपका पासवर्ड स्वीकार नहीं होता आपको कहा जाता है आप पासवर्ड भूल गए हैं आपके दूसरे पते पर नया अवसर आपको दिया जाता है यदि अन्य पता नहीं है तो?.. आपको दास बनाने वाले मुक्ति के सभी मार्ग बंद कर देते हैं!

एक है कम्प्यूटर का ज्ञान कोष विकिपीडिया एक बार उसका अनुभव लिया मेटाविकी कई विषयों पर कई भाषाओँ पर अपनी भाषा देखने की उत्सुकता जगी तो पाया विश्व के कई ऐसे देश जिनका नाम भी नहीं जाना जाता उनकी भाषा, नेपाली तक में मेटाविकी है किन्तु हिंदी में नहीं! विश्व की महाशक्ति बनने के प्रयास में हर छोटे बड़े देश की धमकी सुनते सुनते हम मेटाविकी हिंदी में नहीं कर पाए! चलिए राष्ट्र निर्माण का प्रयास करते हैं! अपनी बात सर्व सहमति की होनी चाहिए, इस विषय पर अन्य विद्वानों के विचार जानने के लिए विषय अंकित कर बटन दबाया कई लेखकों की सूची मिली, विषय विवरण पड़कर धीरज बंधा की हमारे विचार से मेल खाता है! ज्ञान बंटोरने लगे तो सभी अमेरिका के राष्ट्र निर्माण की बात करते मिले!

अँग्रेज़ कहते थे भारत कभी एक राष्ट्र नहीं था अब अमेरिका व मैकाले की अनुचित संतानों को पुष्टि मिल गई! पराश्रित विकास क्रम में कभी भी नीचे से सीडी खिंच सकती है किन्तु स्वावलंबी धीरे चले तो भी विजय निश्चित, निर्बाध है! यह राष्ट्र जो कभी विश्वगुरु था, आज भी इसमें वह गुण, योग्यता व क्षमता विद्यमान है! आओ मिलकर इसे बनायें।

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1 Comment on "कम्प्यूटर और स्वावलंबन"

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kumar vivek
Guest

aap kya kehna chahte hai kuch clear nahin ho paya.

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