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प्रवक्ता.कॉम ब्यूरो

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गिरीश पंकज, साहित्‍यकार

shyamji in Tuglak thanaलोकतंत्र शर्मिन्दा है

राजा अब तक ज़िंदा है

हमने अपनी बात कही

वे समझे यह निंदा है

लोकतंत्र शर्मिन्दा है

इसे क्या समझा जाये? यह लोकतंत्र नहीं हो सकता. एक व्यक्ति 2 2 5 दिन से राष्ट्र भाषा के सम्मान के लिए धरने पर बैठा हो (श्री श्याम रूद्र पाठक) और पुलिस उसे गिरफ्तार कर ले? इसके पहले भी इन्हें गिरफ्तार किया जाता रहा है.परेशान किया जाता रहा है. ऐसी अनेक घटनाएं जब हम देखते हैं तो लगता है, इस देश में लोकतंत्र स्थगित हो गया है। श्री पाठक सोनिया गाँधी के निवास के सामने धरने पर बैठे हैं, यही उनका गुनाह है? ये एक नयी उभरती तानाशाह है अपने देश की। अगर सोनिया गांधी लोकतान्त्रिक होती तो वो श्री पाठक के धरने का स्वागत ही करती। .और इस देश की पुलिस? वो तो भयंकर तुगलकी है. उसके बारे में कुछ कहना ‘अँधेरे को कालिख दिखाने की तरह’ है. (अचानक यह नया मुहावरा गढ़ा गया) http://www.facebook.com/girishpankaj2

 

पंकज कुमार झा, राजनीतिक कार्यकर्ता

आप शायद श्याम रूद्र पाठक जी को जानते हों. आइआइटी का स्नातक, भारतीय भाषाओं का पुजारी यह योद्धा पिछले करीब दो सौ दिन से सोनिया गांधी के आवास के बाहर धरनारत हैं. रोज़ सुबह पहुचते हैं नारे का तख्ती लिए, दिन भर बैठते हैं वहाँ और शाम को कभी पुलिस द्वारा खदेड दिए जाते हैं तो कभी थाने में बंद कर दिए जाते हैं. उनकी बस एक ही मांग है कि सर्वोच्च न्यायालय और उच्च न्यायलयों में भारतीय भाषाओं में सुनवाई की अनुमति दी जाय.

आज श्याम जी को कुछ देर पहले दिल्ली पुलिस ने गिरफ्तार किया है. अभी वे शायद तुगलक रोड थाने में बंद किये गए हैं. श्याम जी के साथ कुछ भी अनहोनी हो सकती है. ……अपनी भाषाओं के प्रति प्रेम से लबरेज़ हों तो सोनिया गांधी के इस निर्णय का, श्याम जी को मिल रही यातना का विरोध करने पहुचिये तुगलक रोड थाना. ………भारत से निकाल फेकिये भाई इस इटालियन महिला को भाई. ये तबाह कर के रख देगी इस देश को. http://www.facebook.com/jhapankaj77

उमेश चतुर्वेदी, टीवी पत्रकार :

देश के हाईकोर्ट और सुप्रीम कोर्ट में हिंदी और भारतीय भाषाओं में कार्यवाही की मांग को लेकर 225 दिन से कांग्रेस मुख्यालय पर धरने पर बैठे श्यामरूद्र पाठक को पुलिस ने गिरफ्तार कर लिया है। इसके साथ ही उनका मोबाइल फोन और दूसरे सामान भी जब्त कर लिये गये हैं। गिरफ्तारी के विरोध में पाठक तुगलक रोड थाने में अनशन पर बैठ गए हैं और खाना छोड़ दिया है। 225 दिनों से धरने पर बैठे श्यामरूद्र पाठक को पुलिस रोजाना शाम साढ़े छह बजे उठाया करती थी और उसके बाद थाने लाती थी। फिर सुबह उन्हें छोड़ दिया जाता था। छूटते ही पाठक फिर कांग्रेस मुख्यालय के सामने आकर धरने पर बैठ जाते थे। लेकिन आज पहली बार उन्हें जबर्दस्ती पांच बजे शाम को ही गिरफ्तार कर लिया गया। श्याम रूद्र पाठक पहली ऐसी शख्सियत हैं, जिन्होंने आईआईटी दिल्ली में रहते हुए अपनी प्रोजेक्ट रिपोर्ट हिंदी में लिखी और पेश की थी। इसके लिए उन्हें लंबी कानूनी लड़ाई भी लड़नी पड़ी थी। हिंदी और भारतीय भाषाओं में न्यायालय की कार्यवाही की उनकी मांग के समर्थन में आए दिन हिंदी सेवी और बुद्धिजीवी भी धरने पर बैठते रहे हैं। http://www.facebook.com/umesh.chaube

शिवानंद द्विवेदी सहर, स्‍वतंत्र टिप्‍पणीकार 

उच्च न्यायिक प्रक्रिया में भारतीय भाषाओं के हक की लड़ाई लड़ रहे आईआईटीयन श्याम रूद्र पाठक को गिरफ्तार कर लिया गया है ! यह उनके अनशन का 225वां दिन था ! क्या अब इस मुल्क में प्रोटेस्ट और हक की लड़ाई लड़ने का भी अधिकार नहीं है लोगों के पास ! धन्य हो यह ब्रितानी सरकार तेरे मुह पर थू थू … http://www.facebook.com/shiva.sahar

राजीव गुप्‍ता, सामाजिक कार्यकर्ता

विनाशकाले विपरीत बुद्धि……! संसद का सत्र 5 अगस्त से शुरू हो रहा है. मुख्य मुद्दे से ध्यान हटाने के लिये कांग्रेस-सरकार ने दिल्ली पुलिस का उपयोग अपने स्वार्थ हेतु किया. पर चिंता की कोई बात नही. इस बार अब आर-पार हो जाने दो….!

मित्रों ! कल शाम में 6 बजे श्री श्‍याम रुद्र पाठक को दिल्‍ली पुलिस ने 107/105 धारा लगाकर जबरन गिरफ्तार कर लिया. श्री पाठक 225 दिन से लगातार कांग्रेस मुख्यालय (ए.आई.सी.सी) के आगे सत्‍याग्रह कर रहे थे. उनकी मांग है भारतीय संविधान के अनुच्छेद 348 के अनुसार, उच्चतम न्यायालय एवं उच्च न्यायालय की कार्रवाई सिर्फ अंग्रेजी भाषा में होती है. इसमें संशोधन कर भारतीय भाषाओं में अदालती कार्रवाई के लिए पिछले वर्ष चार दिसंबर से धरना दिया जा रहा है. श्री श्‍याम रुद्र पाठक अभी तुगलक थाना में गिरफ्तार हैं. आज श्री पाठक को बुधवार को मजिस्ट्रेट के सामने पेश किया जाएगा

मित्रों, हमें एक बार फिर भारतीय भाषाओं के आत्मसम्मान हेतु हुँकार भरना ही होगा. आज यदि कोई स्‍वभाषा और स्‍वदेश के लिए अपना जीवन दांव पर लगाकर संघर्षरत है तो हमें कम से कम उनके साथ खड़े तो होना चाहिए, उनकी आवाज को बुलंद तो करना चाहिए…..भारत माता की जय. http://www.facebook.com/profile.php?id=100002692034205

संजय बेंगाणी, वेब मीडिया विशेषज्ञ 

स्वतंत्र भारत में अग्रेजों का राज नहीं है, मगर उससे कम भी नहीं है. न्‍यायालयों में अंग्रेजी की अनिवार्यता खत्‍म करने और भारतीय भाषा में भी बहस हो इसके लिए सत्‍याग्रह कर रहे श्री श्‍याम रुद्र पाठक को गिरफ्तार किया गया हैं। अब कहो की आजाद है हम….http://www.facebook.com/sanjaybengani

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4 Comments on "फेसबुक पर सत्‍याग्रही श्याम रुद्र पाठक की गिरफ्तारी की कड़ी निंदा"

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Dr. Dhanakar Thakur
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दुर्भाग्यपूर्ण

डॉ. मधुसूदन
Guest

अभी, केवल अंग्रेज़ी का ही विरोध करें। हिंदी आप ही आप पनप जाएगी। दक्षिण से भी अंग्रेज़ी के विरोध में सहमति मिल ही सकेगी।
====>आज से प्रण ले लें कि संसद में केवल अंग्रेज़ी बोलने वाले को मैं न मत दूंगा, न आर्थिक सहायता।
अंग्रेज़ी के ही विरोध में एक हस्ताक्षर आंदोलन चलना चाहिए।
साथ में जिन दुकानों के द्वार पर केवल अंग्रेज़ी का ही फलक लगा होगा उन दुकानों से मैं सामग्री नहीं खरिदूंगा।
यह आरंभ तो कर ही दीजिए।
“हस्ताक्षर आंदोलन” बडे प्रमाण में होना चाहिए।
आपको धडल्ले से हस्ताक्षर मिलेंगे।

डॉ. मधुसूदन
Guest

आज से प्रण ले लें कि संसद में केवल अंग्रेज़ी बोलने वाले को मैं न मत दूंगा, न आर्थिक सहायता।
अंग्रेज़ी के ही विरोध में एक हस्ताक्षर आंदोलन चलना चाहिए।
साथ में जिन दुकानों के द्वार पर केवल अंग्रेज़ी का ही फलक लगा होगा उन दुकानों से मैं सामग्री नहीं खरिदूंगा।
यह आरंभ तो कर ही दीजिए।
“हस्ताक्षर आंदोलन” बडे प्रमाण में होना चाहिए।
आपको धडल्ले से हस्ताक्षर मिलेंगे।

Ashish
Guest

भारत में हिंदी को लेकर जो विरोध के स्वर सुनाए दे रहे है, ये उसीका एक गन्दा नमूना है. आखिर ८० परसेंट से बी अधिक और पूरी दुनिया में सबसे अधिक चाइना के बाद बोली जाने वाली इस भासा को लेकर कांग्रेस का नजरिया साफ हो जाता है…. सायद कांग्रेस इस गीत को भूल चुकी है…. हिंदी है हम वतन है …. हिन्दुस्तान हमारा..

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