लेखक परिचय

प्रवीण दुबे

प्रवीण दुबे

विगत 22 वर्षाे से पत्रकारिता में सर्किय हैं। आपके राष्ट्रीय-अंतराष्ट्रीय विषयों पर 500 से अधिक आलेखों का प्रकाशन हो चुका है। राष्ट्रवादी सोच और विचार से प्रेरित श्री प्रवीण दुबे की पत्रकारिता का शुभांरम दैनिक स्वदेश ग्वालियर से 1994 में हुआ। वर्तमान में आप स्वदेश ग्वालियर के कार्यकारी संपादक है, आपके द्वारा अमृत-अटल, श्रीकांत जोशी पर आधारित संग्रह - एक ध्येय निष्ठ जीवन, ग्वालियर की बलिदान गाथा, उत्तिष्ठ जाग्रत सहित एक दर्जन के लगभग पत्र- पत्रिकाओं का संपादन किया है।

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congress1प्रवीण दुवे

कोई भी विश्व रिकार्ड यूं ही नहीं बन जाता, यदि विश्व रिकार्ड बना है तो यह न केवल भारतीय जनता पार्टी बल्कि संपूर्ण मध्यप्रदेश के लिए गौरव की बात है। हम चर्चा कर रहे हैं प्रदेश की राजधानी भोपाल के जम्बूरी मैदान में बुधवार को आयोजित भारतीय जनता पार्टी के कार्यकर्ता महाकुंभ की। सच में यह महाकुंभ की परिकल्पना को साकार कर देने वाला दृश्य था। जब विधानसभा चुनाव में मात्र पौने दो माह और लोकसभा चुनाव में लगभग आठ माह का समय शेष है, किसी राजनीतिक दल का इतना सफल आयोजन निश्चित ही उसके शीर्ष नेतृत्व में अतिरिक्त ऊर्जा, स्फूर्ति का संचार करने वाला कहा जा सकता है, यह ऊर्जा और स्फूर्ति स्पष्ट रूप से देखने को भी मिली। मंच से लेकर नीचे मैदान तक नेता और कार्यकर्ता सभी के चेहरे उत्साहित थे उनमें ऐसी बेताबी थी कि यदि आज मौका मिल जाए तो वह तुरंत ही इस देश को कांग्रेस मुक्त कर दें। लेकिन लोकतंत्र की एक मर्यादा होती है, भाजपा के कार्यकर्ता होने के नाते अनुशासन का पालन और अन्य राजनीतिक दलों से श्रेष्ठता का प्रदर्शन, भोपाल में भाजपा कार्यकर्ताओं ने इसका खूब पालन भी किया। लाखों की भीड़ के बावजूद कोई ऐसी घटना सामने नहीं आई जिससे  यह उलाहना सहना पड़े कि यह कैसे भाजपा के कार्यकर्ता हैं। इसके लिए भाजपा की जितनी सराहना की जाए कम है। भाजपा के इस विराट आयोजन ने नरेन्द्र मोदी और लालकृष्ण आडवाणी को लेकर मीडिया में जारी तमाम चर्चाओं को भी निर्मूल साबित कर दिया है। यह दोनों नेता एक साथ मंच पर तो दिखाई दिए ही मोदी ने लालकृष्ण आडवाणी के चरण स्पर्श भी किए। यह सम्पूर्ण घटनाक्रम यह साबित करता है कि मोदी और आडवाणी के बीच किसी भी प्रकार का कोई मनभेद नहीं है और इसको लेकर मीडिया में जो कुछ चल रहा है वह मात्र अनर्गल प्रचार के अलावा कुछ भी नहीं है। भाजपा के विराट कार्यकर्ता महाकुंभ की सफलता से यदि सबसे ज्यादा परेशानी और घबराहट किसी को होगी तो वह होगी कांग्रेस को। लगातार दो विधानसभा चुनाव में हार का मुंह देख चुकी कांग्रेस के लिए इस बार मध्यप्रदेश में करो या मरो जैसी स्थिति है। उसके लिए यह चिंता का विषय है कि विधानसभा चुनावों में केवल पौने दो माह का ही समय शेष है फिर भी पूरी ताकत झोंकने के बावजूद उसका जनसमर्थन बढ़ता दिखाई नहीं दे रहा है। इसका मुख्य कारण केन्द्र में लगातार नौ साल से सत्तासीन कांग्रेसनीत मनमोहन सरकार का कुशासन और मध्यप्रदेश में बड़े नेताओं के बीच गुटबाजी है। मनमोहन सरकार के गड़बड़ घोटालों, कमरतोड़ महंगाई, आंतरिक असुरक्षा तथा देश की गिरती साख से लोग परेशान हैं। देशवासी किसी भी स्थिति में अब कांग्रेस की बातों में आने को तैयार नहीं हैं। दूसरे शब्दों में कहा जाए तो देश में इस समय कांग्रेस विरोधी लहर चल रही है। ऐसे माहौल में जनता भाजपा शासित राज्यों में हुए विकास और सुशासन से बेहद प्रभावित है, यही वजह है कि मुख्यमंत्री शिवराज सिंह की जनआशीर्वाद यात्रा हो या प्रधानमंत्री पद के उम्मीदवार नरेन्द्र मोदी की सभाएं, उनमें जनसैलाब उमड़ रहा है। भोपाल को कार्यकर्ता महाकुंभ में उमड़ी लाखों की भीड़ भी इसी का परिणाम है। यह संकेत है कि अब देश मनमोहन सरकार के काले कारनामों से त्रस्त होकर भाजपा और मोदी के नेतृत्व की ओर आशाभरी नजरों से देख रहा है।

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