लेखक परिचय

सिद्धार्थ शंकर गौतम

सिद्धार्थ शंकर गौतम

ललितपुर(उत्तरप्रदेश) में जन्‍मे सिद्धार्थजी ने स्कूली शिक्षा जामनगर (गुजरात) से प्राप्त की, ज़िन्दगी क्या है इसे पुणे (महाराष्ट्र) में जाना और जीना इंदौर/उज्जैन (मध्यप्रदेश) में सीखा। पढ़ाई-लिखाई से उन्‍हें छुटकारा मिला तो घुमक्कड़ी जीवन व्यतीत कर भारत को करीब से देखा। वर्तमान में उनका केन्‍द्र भोपाल (मध्यप्रदेश) है। पेशे से पत्रकार हैं, सो अपने आसपास जो भी घटित महसूसते हैं उसे कागज़ की कतरनों पर लेखन के माध्यम से उड़ेल देते हैं। राजनीति पसंदीदा विषय है किन्तु जब समाज के प्रति अपनी जिम्मेदारियों का भान होता है तो सामाजिक विषयों पर भी जमकर लिखते हैं। वर्तमान में दैनिक जागरण, दैनिक भास्कर, हरिभूमि, पत्रिका, नवभारत, राज एक्सप्रेस, प्रदेश टुडे, राष्ट्रीय सहारा, जनसंदेश टाइम्स, डेली न्यूज़ एक्टिविस्ट, सन्मार्ग, दैनिक दबंग दुनिया, स्वदेश, आचरण (सभी समाचार पत्र), हमसमवेत, एक्सप्रेस न्यूज़ (हिंदी भाषी न्यूज़ एजेंसी) सहित कई वेबसाइटों के लिए लेखन कार्य कर रहे हैं और आज भी उन्‍हें अपनी लेखनी में धार का इंतज़ार है।

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नई दिल्ली के राम लीला मैदान पर रविवार ४ नवम्बर को हुई कांग्रेस की महारैली को लेकर कार्यकर्ताओं के उत्साह और मीडिया की सुर्खियां बनने के बाद बुधवार ७ नवम्बर को कांग्रेस अध्यक्ष सोनिया गांधी ने अपने निर्वाचन क्षेत्र रायबरेली में निर्माणाधीन रेल कोच फैक्ट्री का विधिवत उदघाटन किया। गौरतलब है कि सन २००६ के रेल बजट में देश के तीसरे कोच कारखाने को रायबरेली में लगाने की घोषणा हुई थी। इसके साथ ही कांग्रेस की ओर से यह संकेत देने की कोशिश की गई है कि अब आने वाले डेढ़ साल वह अपने साढ़े आठ साल के कार्यकाल में खुद पर लगे दागों को धोने का प्रयास करेगी। खासकर पार्टी के अजेय गढ़ माने जाने वाले क्षेत्र उसकी प्राथमिकता में हैं। यही वजह है कि सोनिया गांधी के रायबरेली दौरे में उनके साथ कांग्रेस महासचिव राहुल गांधी, प्रियंका गांधी समेत तीन केंद्रीय मंत्री शामिल थे। जहां तक बात राहुल गांधी के निर्वाचन क्षेत्र की है तो अमेठी में कांग्रेसी किला दरकने की आहट तो तभी सुनाई दे गई थी जब इस वर्ष हुए उत्तरप्रदेश विधानसभा चुनाव में अमेठी की १० में से ८ विधानसभा सीटों पर कांग्रेस प्रत्याशियों की हार हुई थी। रायबरेली-अमेठी से लगा सुल्तानपुर भी कांग्रेस के लिहाज से काफी अहम है और गांधी-नेहरु परिवार की राजनीतिक विरासत को सहेजने बाबत उसके विश्वासपात्र कई लोगों यहां मौजूद हैं। हाल ही में ऐसे कयास लगाए जा रहे थे कि २०१४ के लोकसभा चुनाव में प्रियंका गांधी सुल्तानपुर से चुनाव लड़ सकती हैं किन्तु सोनिया द्वारा रायबरेली की जनता की परेशानियों और उनके उन्मूलन हेतु प्रियंका का दरबार लगाए जाने की शुरुआत कर एक नई बहस को जन्म दे दिया है। अब राजनीतिक हलकों में यह सवाल प्रमुखता से उठ रहा है कि क्या प्रियंका अपनी मां सोनिया की राजनीतिक विरासत को संभालने के लिए तैयार हो रही है? ऐसा इसलिए भी है क्योंकि प्रियंका ने हमेशा से ही सक्रिय राजनीति में शामिल होने से इंकार किया है। खैर रायबरेली और उसके आसपास के संसदीय क्षेत्र हमेशा से ही कांग्रेस के लिए अहम रहे हैं और यदि वहां पार्टी का किला दरकता है तो यह सोनिया गांधी की निजी हार होगी। शायद इसीलिए चेहरा बदलने की कवायद के तहत सोनिया ने अपने क्षेत्र विशेष को चुना है।

 

फिर इसी माह कांग्रेस में होने वाले संभावित सांगठनिक फेरबदल द्वारा भी पार्टी सरकार पर मुश्कें कसना चाहती है ताकि उसकी छवि को आगामी आम चुनाव तक संवारा जा सके। इसी संभावित सांगठनिक फेरबदल के जरिए राहुल गांधी की भूमिका का भी निर्धारण होना है। हालांकि रविवार को हुई महारैली में राहुल के बदले अंदाज और तेवरों ने काफी हद तक उनकी भूमिका को उजागर किया था किन्तु इस पर अधिकृत मुहर लगना अभी बाकी है। राहुल के व्यवस्था परिवर्तन में युवाओं की भूमिका राग के चलते हो सकता है पार्टी अब नए चेहरों को संगठन में पद दे ताकि उनकी ऊर्जा और नई सोच का फायदा मिल सके। देखा जाए तो राहुल की युवाओं को आगे लाने की जिद वैसे तो नई नहीं है किन्तु आज तक पार्टी को इससे कोई ख़ास लाभ हुआ हो ऐसा दिखाई नहीं देता। चूंकि बतौर युवा चेहरे कुछ हाईप्रोफाईल नेता पुत्र या धनाढ्य वर्ग से संबंधित युवा ही पार्टी की अग्रिम पंक्ति में दिखाई देते हैं लिहाजा आम युवा में आज भी यह धारणा पुख्ता है कि जब नेता पुत्रों व धनाढ्य वर्ग का अर्थ तंत्र ही राजनीति में ऊंचाइयां प्रदान कराता है, तब फिजूल की मेहनत क्यों? स्व. माधवराव सिंधिया के पुत्र ज्योतिरादित्य सिंधिया, स्व. राजेश पायलेट के पुत्र सचिन पायलेट, स्व. जितेंद्र प्रसाद के पुत्र जितिन प्रसाद, कांग्रेस महासचिव दिग्विजय सिंह के पुत्र जयवर्धन हों या राजस्थान के राजघराने से संबंधित और अलवर से सांसद जितेंद्र सिंह, सभी के राजनीतिक कौशल को देखे लें। कमोबेश सभी को उनके पिता की राजनीतिक विरासत से लेकर राजघराने से संबंधों का फायदा मिला है। आज कांग्रेस में एक भी ऐसा युवा नेता नहीं दीखता जिसने स्वयं के दम पर राजनीति में जमीनी पकड़ को साबित किया हो? तब राहुल का युवाओं से सक्रिय राजनीति में भागीदारी का आव्हान बेमानी ही है। हालांकि देश की ६० प्रतिशत आबादी की बात करना और उसे आगे बढ़कर देश का नेतृत्व संभालने की सोच देना अच्छा है किन्तु उसी अनुरूप यदि क्रियान्वयन न हो तो सच भी झूठ लगता है। राहुल यदि राजनीति में युवाओं की भागीदारी चाहते हैं और उनका इरादा व्यवस्था परिवर्तन का है तो उन्हें सबसे पहले अपने इर्द-गिर्द मौजूद हवा-हवाई नेता पुत्रों की फ़ौज को दूर रखना होगा। तभी एक साधारण युवा उनके साथ कदमताल करने की हिम्मत दिखाएगा वरना तो देश में पैराशूट से उतरे नेताओं की कोई कमी नहीं है और इस फेहरिस्त में लगातार इजाफा ही हो रहा है।

 

अपने घटते जनाधार और गिरती साख के चलते कांग्रेस की हालत अत्यंत दयनीय है। फिर भी यदि कांग्रेस सत्ता में है और २०१४ के लोकसभा चुनाव द्वारा वापसी का दंभ भर रही है तो यह बिखरे विपक्ष का ही परिणाम है। कई लोगों के मुंह से सुना है कि वास्तव में कांग्रेस को राज करना आता है। आज पार्टी के सहयोगी दलों से संबंधों और कूटनीति को देखते हुए यह मानना ही पड़ेगा कि वास्तव में कांग्रेस को राज करना आता है। मायावती हों या मुलायम, शरद पवार हों या करूणानिधि; शीर्ष नेतृत्व ने सभी क्षेत्रीय क्षत्रपों पर नकेल कस दी है और तमाम अंतरविरोधों के बावजूद सरकार चल रही है। पर क्या यह स्थिति हमेशा रहेगी? शायद नहीं। तब पार्टी और सरकार के जनसरोकार तथा जनकल्याणकारी योजनाओं का उचित क्रियान्वयन ही उसकी सत्ता में वापसी करवाएगा? सोनिया गांधी ने इसी सोच को यथार्थ के धरातल पर उतारते हुए सुधार का कदम आगे बढाया है। अब देखना है कि यह कदम कहां तक और किस किस के दर पर पहुंचते हैं?

 

सिद्धार्थ शंकर गौतम

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2 Comments on "कांग्रेस के काया-कल्प का श्रीगणेश"

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डॉ. मधुसूदन
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भोले भगतराम भारतीय भद्रजनों को भरमाने के कुछ रास्ते निम्न है. घोषणाएँ ही करनी है, ढपोल शंख की भाँती; काम बाम करने के लिए, संघ की भाँती, कर्मठ कार्यकर्ता थोड़े ही है? (१) कांग्रेस का काया कल्प किया जाएगा.{ कांग्रेस को केरलीय पञ्च कर्म करवाने अवश्य जाना चाहिए.} (२) कांग्रेस में युवाओं को नेतृत्व (राहुल ) सौंपा जाएगा. (३) अल्पसंख्यकों को सुविधाएं देने की (केवल) घोषणाएँ (ही) की जाएगी. पर वास्तव में उनके अधिक वाचाल, बुखारी- मुल्ला- मौलवी- लीडरों की प्रशंसा पाकर वोट पाने के लिए उनकी अप्रत्यक्ष रूपसे सहायता की जाएगी. (४) और अगला पिछड़ा का भेद उकसाया जाएगा.… Read more »
SATYARTHI
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कांग्रेस की नीतियों ,कार्य कलापों तथा उद्देश्यों के बारे निष्ठावान कांग्रेस भक्तों को छोड़कर किसी भी शिक्षित भारतीय को कोई संदेह नहीं है लगातार एक से बढ़कर एक घोटाले कांग्रेस का चरित्र उजागर करते रहे हैं।कांगेस शासन करना बहुत अच्छी प्रकार जानती है इसीलिए देश में ऐसी व्यवस्था विक्सित कर दी है की कांग्रेस पर लगे आरोप सिध्हा ही न हो सकें और जो विरोध करें उनको झूठे सच्चे केस चला कर डराया जा सके . कांग्रेस के काया कल्प का नवीनतम उदहारण नेशनल हेराल्ड वाली कम्पनी असोसिअतेद जर्नल्स की हजारों करोड़ मूल्यवान अचल संपत्ति को एक प्राइवेट कंपनी जिसमें… Read more »
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