लेखक परिचय

अनिल गुप्ता

अनिल गुप्ता

मैं मूल रूप से देहरादून का रहने वाला हूँ! और पिछले सैंतीस वर्षों से मेरठ मै रहता हूँ! उत्तर प्रदेश मै बिक्री कर अधिकारी के रूप मै १९७४ मै सेवा प्रारम्भ की थी और २०११ मै उत्तराखंड से अपर आयुक्त के पड से सेवा मुक्त हुआ हूँ! वर्तमान मे मेरठ मे रा.स्व.सं. के संपर्क विभाग का दायित्व हैऔर संघ की ही एक वेबसाइट www.samvaadbhartipost.com का सञ्चालन कर रहा हूँ!

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corruptionपिछले कुछ वर्षों में देश का मीडिया देश में हुए बड़े बड़े घोटालों के समाचारों से भरा रहा है.आजकल किन्ही विशेष कारणों से मीडिया भ्रष्टाचार से ध्यान हटाकर इशरत जहाँ नामक एक लश्करे तोयबा की सदस्या और उसके दो पाकिस्तानी और एक भारतीय साथियों की २००४ में गुजरात में पुलिस मुठभेड़ में मारे जाने के प्रसंग की जांच के समाचारों को छपने में व्यस्त हैं. संभवतः आने वाले चुनावों के कारण लोगों के ध्यान से भ्रष्टाचार का मुद्दा गायब करना ही इसका उद्देश्य है.ऐसे में लोगों के सामने से भ्रष्टाचार का मुद्दा ओझल न हो जाये इसलिए भ्रष्टाचार के मामलों की याद दिलाते रहना आवश्यक है.

भ्रष्टाचार के मामले वैसे तो अंग्रेजों के राज में ही शुरू हो गए थे और विश्व युद्ध के दौरान अंग्रेज हुकूमत की युद्ध की तैय्यारियों में सहयोग देने वालों को सरकारी ठेके और अन्य सुविधाएँ प्रदान करने की लम्बी सूची है. लेकिन आज़ादी के बाद के प्रमुख घोटालों पर ही ध्यानाकर्षित करना इस समय प्रासंगिक होगा.आज़ादी के बाद के कुछ प्रमुख घोटाले निम्नवत हैं.

१.१९४८ में कश्मीर में पाकिस्तान सेना द्वारा कबायलियों के वेश में हमला करने के बाद देश में रक्षा तय्यारियों के लिए जीप खरीदने का निर्णय लिया गया था.उस समय प्रधान मंत्री पंडित नेहरु के चहेते वी के कृष्णा मेनन लन्दन में भारतीय उच्चायुक्त के पद पर तैनात थे. मेनन ने पुराणी जीपों पर रंग करवाकर नयी जीपों के रूप में सप्लाई करवा दिया जिससे तीस करोड़ का नुकसान हुआ.मामला उछलने के बाद नेहरु जी ने मेनन को कोई सजा नहीं दी केवल लन्दन से वापिस दिल्ली बुला लिया और बाद में देश का रक्षा मंत्री बना दिया जिसके कार्यकाल में रक्षा तैय्यारियों में लापरवाही के कारण देश को १९६२ के युद्ध में चीन से मात खानी पड़ी और हजारों वर्ग मील भूमि चीन के कब्जे में चली गयी जो संसद के सर्वसम्मत प्रस्ताव के बावजूद आज पचास साल बाद भी वापिस नहीं ली जा सकी है.

२.१९५१ में एक वरिष्ठ आई ए एस अधिकारी एस ए वेंकटरमण को साईकिल आयत का लाईसेंस जरी करने के बदले घूस लेने के मामले में जेल जाना पड़ा था.

३.१९५६ हीरों की खान के मालिक सिराजुद्दीन से बरामद डायरी में तत्कालीन केन्द्रीय मंत्री केशव देव मालवीय पर साठ लाख रुपये की रिश्वत लेने का आरोप लगा.

४.१९५८ सरकारी उपक्रम जीवन बीमा निगम को एक उद्योगपति हरिदास मुंधरा को आर्थिक संकट से उबरने के लिए उसकी कंपनी के एक करोड़ बीस लाख रुपये के शेयर खरीदने के लिए दबाव डालने के आरोप में वित्त मंत्री टी टी कृष्णामचारी को हटना पड़ा था.

५.१९६० डॉ.जयंती धर्म तेजा ने अपनी कंपनी जयंती शिपिंग कंपनी स्थापित करने के लिए २२ करोड़ का ऋण लेकर उसे अपने निजी खाते में अंतरित कर लिया और बाद में विदेश भाग गया.

६.१९६३ पंजाब के तत्कालीन मुख्या मंत्री प्रताप सिंह कैरो ने अपने पद का दुरूपयोग करके अपने व अपने परिवार के नाम करोड़ों की संपत्ति बनायीं.

७.१९६५ ओड़िसा के तत्कालीन कांग्रेसी मुख्यमंत्री बीजू पटनायक द्वारा अपनी निजी विमान कंपनी कलिंग ट्यूब्स को सरकारी ठेके जारी किये.मामला सामने आने पर बीजू को हटना पड़ा.

८.१९७४-७५ प्रधान मंत्री इंदिरा गाँधी के बेटे संजय गाँधी को कार बनाने का लाईसेंस देने और हरयाणा सर्कार द्वारा गैर कानूनी ढंग से उसके लिए ३०० एकड़ जमीन देने में १०० करोड़ का नुकसान हुआ.

९.१९८० इन्डियन ऑयल की निविदाओं में हेराफेरी करके तत्कालीन पेट्रोलियम मंत्री प्रकाश चन्द्र सेठी ने ९ करोड़ का नुकसान पहुँचाया.

१०.१९८१ अन्तुले द्वारा विभिन्न ट्रस्ट बनाकर सीमेंट आबंटन के जरिये तीस करोड़ रुपये बनाये.इन्डियन एक्सप्रेस द्वारा भंद्फोद करने पर मामले का खुलास हुआ.

११.१९८६-८७ बोफोर्स तोप घोटाला करके राजीव गाँधी की सर्कार ने सोनिया गाँधी के मित्र क्वातोरोची और अन्य लोगों को ६८ करोड़ का लाभ पहुँचाया.

१२.जर्मन पनडुब्बी निर्माता एच.डी.डब्ल्यू. से बीस करोड़ की कमीशन ली गयी. मामला 2005 में बंद कार दिया गया.

१३.१९८८ धर्मार्थ चिकित्सालयों को चिकित्सा उपकरण आयात करने में छूट देकर तत्कालीन स्वास्थ्य मंत्री बी.शंकरानंद द्वारा ५००० करोड़ का चुन लगाया गया.

१४.१९८९ खाद निगम व टाटा समूह द्वारा कोयला घोटाला करके ५० करोड़ का नुकसान पहुँचाया गया.

१५.१९८९ बोईंग के स्थान पर एयरबस से जहाज ख़रीदे गए.अ-३२० दुर्घटनाग्रस्त होने के बाद पूरे बड़े को हटाना पड़ा. प्रति सप्ताह २.५ करोड़ का नुकसान हुआ.कुल २०० करोड़ का नुकसान हुआ.

१६.१९९१ .कांग्रेस के मुख्या मंत्री बंगारप्पा के शासन में कर्नाटक में कृषि घोटाला हुआ जिसमे ५०० करोड़ का नुकसान हुआ.

१७.१९९१ प.बंगाल में वक्फ भूमि का घोटाला हुआ मुख्य मंत्री ज्योति वसु और उनके बेटे चन्दन वसु द्वारा ११०० करोड़ का घोटाला किया गया.

१८.१९९२ शेयर घोटाला हर्षद मेहता और सरकारी बेंकों की मिलीभगत से ४०००० करोड़ का शेयर घोटाला किया गया.

१९.१९९३ लोकोमोटिव इंजिन खरीद में रेल मंत्री जाफर शरीफ द्वारा १९ करोड़ का घोटाला किया गया.

२०.१९९३ महाराष्ट्र शू स्कैंडल सुशिल कुमार शिंदे द्वारा जूता निर्माता सहकारी समिति से मिलकर १५०० करोड़ का घोटाला किया गया.

२१.१९९४ खाद्य मंत्री कल्पनाथ राय द्वारा बाजार मुल्य से अधिक मूल्य पर चिनिआयत करके ६५० करोड़ का घोटाला किया गया.

२२.१९९५ संचार घोटाला सुखराम आदि द्वरा एक लाख करोड़ का नुकसान पहुँचाया गया.

१९९५ मंत्री सतीश शर्मा द्वारा पेट्रोल पम्प व सरकारी आवास आबंटन में १०० करोड़ का घोटाला किया गया.

२३.१९९५ इन्डियन बेंक घोटाला 3000 करोड़

२४.१९९५ चारा घोटाला लालू यादव व अन्य ९५० करोड़.

२५.१९९६ यूरिया घोटाला १३३ करोड़.

२६.१९९६ बैलाडीला हीरा खदानों का घोटाला ५००० करोड़.

२७.१९९७ सी आर बी केपिटल घोटाला १२०० करोड़.

२८.२००५-२०१० कोमंवेल्थ गेम्स घोटाला ७०००० करोड़.

२९.२००८.२-जी घोटाला १,७६,००० करोड़ का घोटाला.

३०.२००५ से २०११ कोयेला घोटाला सी ए जी के अनुसार नुकसान लगभग १० लाख करोड़.चौथी दुनिया समाचार पात्र के अनुसार नुकसान २७ लाख करोड़.

३१.२००५ से २०१२ तक अवैध थोरियम खनन और निर्यात मामला. प्रधान मंत्री के पास परमाणु उर्जा विभाग से सम्बंधित.मौजूदा अंतर्राष्ट्रीय कीमत पर नुकसान १८० लाख करोड़.

 

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