लेखक परिचय

पंडित सुरेश नीरव

पंडित सुरेश नीरव

हिंदी काव्यमंचों के लोकप्रिय कवि। सोलह पुस्तकें प्रकाशित। सात टीवी धारावाहिकों का पटकथा लेखन। तीस वर्षों से कादम्बिनी के संपादन मंडल से संबद्ध। संप्रति स्‍वतंत्र लेखन।

Posted On by &filed under व्यंग्य.


ऱाष्ट्रकुल खेलों में भरपेट भ्रष्टाचार का खेल खेलने के बाद भ्रष्टाचार मिटाओ का खेल आजकर देश में काफी लोकप्रिय हो रहा है। जिसे मौका मिलता है नही भ्रष्टाचार मिटाने पर आमादा हो जाता है। मीडिया भी क्रिकेट के बाद भ्रष्टाचार मिटाओ की लुभावनी झांकी को दिखाते हुए छलक-छलक जा रहा है। और लोगबाग भी बड़े श्रद्धा भाव से इस झांकी के देवताओं को निहारते हुए,राजनेताओं को गरियाने के अखंड कीर्तन में लगे हुए हैं। मीडिया जिस उत्साह से पहले संसार में प्रलय ला रहा था उसी आस्था के साथ अब वो भ्रष्टाचार मिटाने में जुट गया है। तिहाड़ जेल में पिकनिक मना रहे भ्रष्टाचार के सिद्ध खलीफा बड़े मुदित भाव से इस आयटम को लाफ्टर शो की जगह देख-देखकर अट्टहास कर रहे हैं। जैसे तलाक की धमकी के आगे कभी शरीफ बीवियां थर-थर कांपने लगती थीं ठीक वैसे ही भ्रष्टाचार मिटाने की धमकी के आगे अब सरकार कांपने लगी है। वैसे भी कुछ लोग बीवी को सरकार और कुछ सरकार को बीवी ही समझते है। अभी अन्ना के अनशन से चौकन्ना सरकार संभलने-संभलने को थी कि अब उसे सताने योगीजी आ पहुंचे। सतयुग में जब कोई योगी उग्र तपस्या करता था तो उसकी तपस्या से इंद्र का सिंहासन डोल जाता था। अब कलयुग में तो इंद्र के सिंहासन को हिलाना ही योगियों की तपस्या हो गयी है। योगी खुद दिल्ली पहुंच जाते हैं,अपने चेले-चेलियों के साथ। मामला भ्रष्टाचार का जो ठहरा। और ये जनम-जनम के भ्रष्टाचार उखाड़ू।

पुराने ज़माने की कहानियों में राक्षस के प्राण पिंजरे में कैद किसी तोतो में हुआ करते थे। राक्षस को मारना असंभव होता था। फिर कोई बुढ़िया राजकुमार या राजकुमारी को पिंजरे के तोते का भेद बताती थी। भटकता हुए राजकुमार या राजकुमारी पिंजरे तक पहुंचते थे और राक्षस की गर्दन मरोड़ देते थे। लगता है इन भ्रष्टाचारहटाओ नस्ल के उस्तादों को भी पता लग गया है कि सरकार के प्राण भ्रष्टाचार के तोते में ही बसते हैं। वे जान गए हैं कि भ्रष्टाचार के बिना सरकार तो बिना स्क्रीन का कंप्यूटर होती है। वे सरकार को धमकी देते हैं। मरोड़ूं तेरी गर्दन। हटाऊं भ्रष्टाचार। इधर धमकी दी करि उधर सरकार कदमों में गिरकर गिड़गिड़ाने लगती है-मेरी जान बख्श दो मेरे आका। बदले में जो चाहो ले लो। शास्त्रों में लिखा है कि ऐसे भावुक मौके पर अच्छी डील हो जाती है। सौ-सौ के नोट लेकर चुंगी से ट्रकों को छोड़ता नाकेदार, रिश्वत लेकर चोर को छोड़ता थानेदार,टेबिल के नीचे से नोट लेकर फाइल आगे बढ़ाता बाबू,दूध में पानी मिलाता दूधिया,सीमेंट में रेत मिलाता ठेकेदार अर्थात् भारत देश के नाना प्रकार के श्रेष्ठ आर्यजन कोरस में गा रहे हैं- स्वामीजी आएंगे…भ्रष्टाचार मिटाएंगे। ईमानदारी का हाथ…अन्ना के साथ। बाबा भ्रष्टाचारियों को फांसी देने की जिद पर अड़ गए हैं। सरकार की तो जान के लाले पड़ गए हैं। सरकार सोच रही है कि कहीं उसने सीरियसली भ्रष्टाचारियों को फांसी पर लटकाने का उत्सव शुरू कर दिया तो देश में शेष-विशेष कितने ग्राम लोग बच पांएगे। इघर बाबा भी सोच-सोचकर तनाव में है कि सरकार कहीं उनके मज़ाक को गंभीरता से न ले बैठे। और कहीं खेल-खेल में बाजी अन्ना लोकपाली के हाथ न आ जाए। बाबा की भूख-प्यास गायब है। वे अनचाहे ही अनशन की चपेट में हैं। भ्रष्टाचार हटाओं स्थल से लौटे कई लोगों की जेबें साफ हो गईं हैं। वे भुनभुनाते हुए गुनगुना रहे हैं- हो रामा…भ्रष्टाचार ने बड़ौ दुख दीनौ..।

Leave a Reply

Be the First to Comment!

Notify of
avatar
wpDiscuz