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घनश्याम चंदर्वंशी

रिटेल में एफ. डी. आई. के मुद्दे पर लगातार घमासान मचा हुआ है। मल्टी ब्रांड रिटेल में प्रत्यक्ष विदेशी निवेश की अनुमति का संसद सहित पूरे देश में विरोध हो रहा है। विपक्षीय दलों के साथ ही यू.पी.ए. के घटक दलों द्रमुक एवं तृणमूल कांग्रेस ने भी सरकार के खिलाफ मोर्चा खोल दिया है। देश भर के कई व्यापारिगण इस मुद्दे पर सड़क पर आ गये है और आना भी चाहिये क्योंकि विदेशी व्यापार की रिटेल में भारत में अनुमति देने के कारण भारत के ढाई करोड़ से अधिक छोटे किराना व्यापारियों पर संकट आन खड़ा हुआ है इस बात की जानकारी हमारे देश के प्रधानमंत्री को भी है कि यह निर्णय भारत देश के लिये आगे चलकर घातक सिद्ध होने वाला है।

इस फैसले के कारण सिर्फ व्यापारी ही नही छोटे हाथ ठेले वाले जो कि अपनी आजीविका चलाते है सब्जी हर घर तक पहुंचाते है उनके जीवन पर भी आन बनी है। पूरे देश भर में 52 वॉलमार्ट खोलने की अनुमति दी गई है। जिनमें से कुछ राज्यों में तो खुलने की तैयारी भी हो गई है और देश में पहले से भी 9 वॉलमार्ट होलसेल व्यापार में खुले हुये है। आखिर इतना विरोध होने के बावजूद भी यह फैसला केन्द्र सरकार वापिस क्यों नही लेती ? आखिर कारण क्या है ? कारण कई भारत में ओबामा की नवम्बर 2010 की यात्रा तो नहीं ? जिन्होंने भारत में आकर अपने देश को मंदी से बचाने के लिये गुहार लगाई थी और उस समय मान. मनमोहन सिंह जी ने सोनिया के कहने पर ओबामा से कह दिया ‘तथास्तु’ भारत से जो चाहोगे तुमको मिलेगा, भारत तुम्हारा है हमारे भारत के लोग भूखे पेट सो सकते है पर हम आपको भरपेट देंगे। हमारे भारत के लोग कर्ज में डूबकर जान दे सकते है पर आपको कर्ज का एहसास भी नहीं होने देंगे।

रिटेल में एफ. डी. आई. के मुद्दे पर सभी बड़े नेताओं के बयान आये पर यू. पी.ए. अध्यक्षा का कोई बयान जनता के सामने नहीं आया। लेकिन ऐसा नहीं है उनका भी बयान आया है प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह के माध्यम से कुछ दिन पहले कि अगर यह फैसला वापिस लिया तो ‘साख खराब हो जायेगी’। इस बयान से यह स्पष्ट नही हो पाया कि साख किसकी खराब होगी। ओबामा के सामने सोनिया गॉंधी की या जनता के सामने मनमोहन की।

साख तो भारत की आप खराब कर रहे है प्रधानमंत्री जी। आपने रिटेल में 100 प्रतिशत व्यवसाय करने की अनुमति देकर भारत देश को विदेशी ताकतों के आगे नतमस्तक होने के लिये मजबूर कर दिया है। आपने सोच समझकर यह निर्णय लिया है यह जानकार कि कितने लोग बेरोजगार होंगे। अगर इससे रोजगार मिलेगा तो भी वह कहां का अहसान हम पर कर रहे है और वह हमारे देश के युवाओं को रोजगार देंगे तो लेबर वर्क का। ईस्ट इण्डिया कंपनी ने भी इस प्रकार के व्यवसाय की शुरूआत की थी और भारत के लघु उद्योगों को समाप्त कर दिया था और सइी प्रकार की नौकरी दी थी और नतीजा यह हुआ कि भारत उनके कब्जे में हो गया। नही चाहिये ऐसा रोजगार हम हमारी दुकान छोड़कर विदेशी दुकानों में नौकर क्यों बनें। अगर यह निर्णय वापिस नही लिया गया तो ऐसे कई राष्ट्र विरोधी निर्णय विदेशी ताकतों के बल पर ले लिये जायेंगे जो हमारे लिये अत्यंत घातक होंगे। इसलिये आवष्यक है सभी को एक साथ आगे आने की और आव्यशक है इस विषय पर एक मजबूत आंदोलन खड़ा करने की.

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2 Comments on "साख खराब हो जायेगी"

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आर. सिंह
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वालमार्ट जैसी कंपनियों के न आने से मन मोहन सिंह या सोनिया गांधी की साख खराब हो या न हो,पर उसके आने से हमारे उन व्यापारियों का भठ्ठा अवश्य बैठ जाएगा जो सड़ी गली और मिलावटी वस्तुएं बेचकर भी अनाप सनाप मुनाफ़ा कमा रहे हैं.और किसी प्रकार की प्रतिस्प्रधा से घबडाते है.ईमानदार और लघु व्यापारियों को वालमार्ट जैसी कंपनियों के आने से कोई हानि की संभावना मुझे तो नहीं दिखती,क्योंकि एक तो उनका ओवर हेड वालमार्ट जैसी कंपनियों से कम रहेगा,दूसरे जहां वे पहुँच सकते हैं,वहां वालमार्ट जैसी कम्पनियां कभी पहुंच ही नहीं सकती. ऐसे मेरा वह प्रश्न तो अभी… Read more »
rp agrawal
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विदेशी रिटेल शॉप खोलने की यु पि ए की जिद पुरे देश वासियों की समझ के बाहर है !क्या पुरे देश में केवल सोनिया और मनमोहन ही समझदार है क्या देश के अर्थशास्त्री ,व्यापारी, उद्योगपति ,जनता और राजनेतिक पार्टियाँ सब मुर्ख है !कभी कभी आशंका होती है की कांग्रेस के ये वर्तमान कर्णधार ने इस देश को गुलाम बनाने की सुपारी ले राखी है क्या ! ये खोज का विषय है की क्यों सोनिया अमेरिका से परमाणु करार करने के लिए अड़ गयी थी !क्यों कपिल सिब्बल भारत में योन शिक्षा की जिद कर रहे है !क्यों अफजल को फासी… Read more »
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