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मृत्युंजय दीक्षित

केंद्रीय दूर संचार मंत्री कपिल सिब्बल द्वारा इण्टरनेट में फेसबुक, टिवटर, ब्लॉग आदि पर आपत्तिजनक सामग्रियों को नियंत्रित करने का कंपनियों को जो सुझाव दिया गया वह विचारणीय तो है ही, लेकिन इसके बाद इस विषय पर एक नई बहस को भी जन्म दे दिया गया है। यह बात सही है कि आज सोशल मीडिया जनमानस को एक से बढ़कर एक अनूठी जानकारियां देने का सशक्त माध्यम बन गया है तथा आम जन इसके माध्यम से अपने विचारों की स्वतंत्र रूप से अभिव्यक्ति व्यक्त करने का साधन भी बन गया है। इतना ही नहीं यह सामाजिक व राष्ट्रीय क्रान्तियों में भी महत्वपूर्ण भूमिका निभा रहा है। मिस्र व कुछ अरब देशोेंं में हुई क्रान्ति में इण्टरनेट ने सशक्त भूमिका निभाई हैं।

अब आर्थिक उदारीकरण व विकास के नये युग में इण्टरनेट व सोशल मीडिया के सभी पहलू इतने आवश्यक हो गये हैं कि इनके बिना जैसे लोगों का जीवन ही अधूरा-अधूरा सा हो गया है। आज सारी सूचनाएं, आंकड़ें, तथ्य व यहां तक कि छात्रों के शोधपत्र तैयार करवाने तक सोशल मीडिया एक महत्वपूर्ण भूमिका अदा कर रहा है। लेकिन साइबर मीडिया का सदुपयोग होने के साथ ही खुलकर दुरूपयोग भी हो रहा है। चर्चा में बने रहने की दृष्टि से बहुत से लोग आपत्तिजनक लेख,टिप्पणी व चित्र आदि डाल देते हैं जो किसी के लिए अपमानजनक व ठेस पहुंचाने वाले हो सकते हैं। इण्टरनेट पर इतने अधिक अश्लील साहित्य व चित्रों की भरमार है कि वह हमारे वर्तमान व भविष्य के युवा वर्ग कीे पीढ़ी को ही बर्बाद कर रहा है। आजकल दावा किया जा रहा है कि इंटरनेट के माध्यम से लोगों को नौकरियां प्राप्त हों रही हैं तथा शादियां तय हो रही हैं। जबकि वास्तविकता कुछ और ही है। अभी कुछ समय पूर्व स्पीक एशिया व श्री रामसर्वें जैसी कंपनियों ने इण्टरनेट पर सर्वे के नाम पर बेरोजगार युवाओं से लाखों करोड़ो रूपये ठग लिये। जब तक जनमानस को सच्चाई पता चली व पुलिस व अन्य विभाग हरकत में आये तब तक असली अपराधी लचर कानून की आड़ में फरार हो गये। यह इण्टरनेट पर ठगी का बहुत बड़ा मामला था। क्या इस पर नियंत्रण नहीं होना चाहिए? केंद्रीय मंत्री के प्रयासों पर भारतीय मीडिया का कहना है कि सरकार के विरूध्द उठ रहे विभिन्न जन ज्वारों को दबाने के लिए ही इण्टरनेट में उपलब्ध सुविधाओं को नियंत्रित करने की बात कही जा रही जबकि वास्तव में ऐसा नही है। जिसे भारत के रक्षामंत्री ए. के. एंटनी के बयानों ने स्पष्ट भी कर दिया है कि सोशल मीडिया को नियंत्रित नहीं किया जा सकता क्योंकि वर्तमान युग में समाचारों को अधिक दिनों तक दबाया नहीं जा सकता। अब यह युवा वर्ग पर निर्भर करता है कि वह इस सुविधा का कैसे उपयोग कर सकता है। ज्ञातव्य है कि अमेरिकी प्रशासन तथा कुछ कंपनियों के प्रमुख लोग भारत सरकार के साथ इस विषय पर विचार-विमर्श करना चाह रहे थे जिसका अर्थ यह लगाया जा रहा है कि अमेरिका भारत पर नियंत्रण के खिलाफ दबाव बना रहा है । स्वतंत्रता की अभिव्यक्ति के पक्षधर लोगों का मत है कि गत दिनों जब लोकपाल विधेयक की मांग को लेकर अन्ना हजारे के अनशन को जो समर्थन प्राप्त हुआ उसके पीछे फेसबुक, ब्लॉग, टिवट्र का ही कमाल था। एक अनुमान है कि अन्ना हजारे के समर्थन में 3.80 करोड़ लोगों ने फेसबुक का उपयोग किया था जिसके कारण सरकार को अन्ना हजारे के आगे झुकना पड़ा था। बाबा रामदेव को भी इसी साधन से सफलता मिली। एक प्रकार से यह माना जा रहा है कि जनता में सरकार के विरूध्द भ्रष्टाचार व महंगाई को लेकर जनाक्रोष उत्पन्न करने में साइबर मीडिया का काफी महत्वपूर्ण रोल रहा है। विभिन्न आंदोलनों को सफल बनाने के लिए समर्थक बढ़ी तादाद में इस मीडिया का उपयोग कर रहे हैं जिसके कारण सरकार की नींव हिल गई है । आंदोलनों के समय समर्थकों ने साइबर मीडिया का जमकर प्रयोग किया जिसके कारण कुछ बेहद आपत्तिजनक सामग्रियां भी डाल दी गईं । जिसके कारण सरकार के कान खड़े हो गये । केंद्रीय मंत्री के नियंत्रण उपायों को रोकने में अमेरिका भी हस्तक्षेप कर रहा है। अमेरिकी प्रशासन भी नहीं चाहता कि भारत में साइबर मीडिया को किसी भी प्रकार से नियंत्रित किया जायें, आखिर क्यों ? क्या वह इसके माध्यम से भारत में अपनी संस्कृति को फैलाना चाहता है। आजकल इण्टरनेट से मोबाइल फोन पर अश्लील चित्रों को डाउनलोड करना एक बहुत बड़ा धंधा बन गया है। आज का युवा वर्ग मोबाइल पर इन चित्रों को डाउनलोड कर गुमराह हो रहा है।वह सारा दिन यही देखा करता है क्या इस गंदगी को नियंत्रित व प्रतिबंधित नहीं होना चाहिए। सरकार व कंपनियों को इस विषय पर गंभीरता से सोच-विचार करना चाहिए कि आखिर वह इस गंदगी को किस प्रकार से नियंत्रित कर सकते हैं। एक समय था जब यही युवा वर्ग अध्ययन आदि में रूचि रखता था और अपनी ज्ञान वृध्दि के लिए पुस्तकालय जाता था व मनोरंजन के अन्य तमाम साधन थे। लेकिन आज इण्टरनेट संस्कृति ने सारा वातावरण ही दूषित कर दिया है। इण्टरनेट के माध्यम से किसी भी व्यक्ति तथा हस्ती को बड़ी आसानी से बदनाम किया जा सकता है । इसके कई उदाहरण भरे पड़े हैं। कहने के लिए एक साइबर कानून हैं तो लेकिन वह प्रभावशाली सिध्द नहीं हो पा रहा है। अब तो हालत यह हो गई हैं कि इंटरनेट यूजर्स अपनी लोकप्रियता का ग्राफ बढ़ानें के लिए हिंदू देवी-देताओं के अश्लील चित्र तो डालते ही हैं साथ ही उन्होंने मुस्लिम धर्मगुरू और देश के राजनेताओं को भी नहीं छोड़ रहे हैं। फेसबुक, टिवटर व ब्लॉग आदि पर जब राष्ट्रहित और समाजहित प्रभावित होने लगता है तो उसमें नियंत्रण व सुधार की आवश्यकता आ ही जाती है। इण्टरनेट का सर्वाधिक सकारात्मक पक्ष भी है। इसके माध्यम से अब पूरे देश में ई- गवर्नेंस की बात हो रही है तथा इस पर काफी काम भी हो रहा है। सभी सरकारी विभाग शिक्षण संस्थाएं व नवीन तकनीक खोजें आविष्कार व ज्ञानवृध्दि की बातें इण्टरनेट पर देखी जा सकती हैं। आज सभी समाचार -पत्र, पत्रिकाओं, रोजगार संबधी सूचनाओं व नई फिल्मों को इन्टरनेट पर देखा जा सकता है। सभी सरकारी सूचनाएं इण्टरनेट पर उपलब्ध हैं। अच्छी बात है इण्टरनेट ज्ञान का खजाना है । किसी भी चीज के दो पहलू होते ही हैं। समय -समय पर सुधारों की आवश्यकता आ ही पड़ती है। अब यह युवा वर्ग व समाज के बुध्दिजीवियों को सोचना होगा कि वह देश के युवावर्ग को किधर मोड़ सकते हैं। यह समाज की भी जिम्मेदारी बनती है कि वह यह देखे कि कहीं सुविधाओं का दुरूपयोग तो नहीं हो रहा। इण्टरनेट पर नया साहित्य भी है, नयी प्रतिभाओं का उभार भी हुआ है। आजकल हर चीज इण्टरनेट पर ही उपलब्ध हो रही है व खोजी जा रही है। इण्टरनेट का नियंत्रण तो हो लेकिन स्वतंत्रता की अभिव्यक्ति का हनन न हो अपितु अश्लीलता व देशहित व समाजहित विरोधी गतिविधियों पर नियंत्रण हो तो अधिक अच्छा रहेगा व सरकार को सहयोग व समर्थन भी मिलेगा। लेकिन यदि आंदोलनों को दबाने के नाम पर नियंत्रण की बात होगी तो सरकार को मुंह की खानी पड़ेगी और उसे कहीं समर्थन नहीं प्राप्त होगा।

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