लेखक परिचय

प्रवीण दुबे

प्रवीण दुबे

विगत 22 वर्षाे से पत्रकारिता में सर्किय हैं। आपके राष्ट्रीय-अंतराष्ट्रीय विषयों पर 500 से अधिक आलेखों का प्रकाशन हो चुका है। राष्ट्रवादी सोच और विचार से प्रेरित श्री प्रवीण दुबे की पत्रकारिता का शुभांरम दैनिक स्वदेश ग्वालियर से 1994 में हुआ। वर्तमान में आप स्वदेश ग्वालियर के कार्यकारी संपादक है, आपके द्वारा अमृत-अटल, श्रीकांत जोशी पर आधारित संग्रह - एक ध्येय निष्ठ जीवन, ग्वालियर की बलिदान गाथा, उत्तिष्ठ जाग्रत सहित एक दर्जन के लगभग पत्र- पत्रिकाओं का संपादन किया है।

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-प्रवीण दुबे-
Terrorism in pakistan

भारत में सत्ता परिवर्तन के बाद सर्वाधिक बेचैनी अगर कहीं देखने को मिल रही है तो वह है हमारे पड़ोसी देश पाकिस्तान में। यूं तो चुनाव से पूर्व ही पाकिस्तान ने भारत में मोदी के हाथ सत्ता आने पर निंदात्मक बयान देकर अपनी असलियत पहले ही जता दी थी। अब जब भारत में मोदी का प्रधानमंत्री बनना तय हो चुका है और 26 तारीख को वे इस पद की शपथ लेने जा रहे हैं, पाकिस्तान में मोदी को लेकर उथल-पुथल और ज्यादा बढ़ती दिख रही है।

मोदी को बहुमत मिलने के बाद से लेकर अभी तक पाकिस्तान ने जो चरित्र प्रस्तुत किया है, उसे देखकर कहीं से भी ऐसा नहीं लगता कि वह भारत को लेकर अपनी दोगली नीतियों से बाज आने वाला है। एक तरफ भारत में पाकिस्तान के उच्चायुक्त अब्दुल बासित ने सोमवार को भारतीय पत्रकारों को लंच पर आमंत्रित कर पाकिस्तान का रुख स्पष्ट करते हुए बिना शर्त वार्ता की बात कही। उन्होंने यह भी कहा कि हम क्षेत्र में अमन और शांति के पक्षधर हैं। उधर पाकिस्तानी प्रधानमंत्री नवाज शरीफ ने भी भावी प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी को फोन करके जीत पर बधाई दी। जिस दिन पाकिस्तान के प्रधानमंत्री और भारत में पाकिस्तान के उच्चायुक्त यह सब कुछ कर रहे थे उसी दिन पाकिस्तान के सीमा कार्रवाई बल अर्थात ‘बैट’ ने कश्मीर के अखनूर में भारतीय सेना के एक गश्ती दल को बारुदी सुरंग और गोलीबारी से निशाना बनाया जिसमें भारतीय सेना का एक जवान मारा गया और उसके दो साथी गंभीर रूप से घायल हो गए। साफ है कि पाकिस्तान की कथनी और करनी में बहुत अंतर है। आजादी के बाद से आज तक का इतिहास देखा जाए तो पाकिस्तान ने सदैव भारत की पीठ में छुरा घोंपने का कार्य किया है। अटल जी की सरकार के समय में भी पाकिस्तान ने शांति प्रयासों की आड़ में कारगिल पर कब्जा करके दोगलाई की थी। हाल ही की बात करें तो जैसा कि हमने कहा कि एक तरफ शांति की बात दो दूसरी तरफ भारतीय सीमा प्रहरियों पर सश हमला आखिर कैसे विश्वास किया जाए पाकिस्तान पर?

पाकिस्तान कभी सुधरने वाला नहीं है। अगर वास्तव में पाकिस्तान शांति चाहता तो वह कभी भी भारत के दुश्मन नंबर एक दाऊद इब्राहिम को अपने यहां शरण नहीं देता। जैसा कि पाकिस्तान से खुफिया जानकारी भारत को मिलती रही है कि पाकिस्तान की सेना बाकायदा दाऊद को संरक्षण दिए हुए है। सबसे बड़ा सवाल तो यह है कि भारत द्वारा कई बार मांगने के बावजूद पाकिस्तानी सरकार ने दाऊद को भारत के हवाले नहीं किया है।
मोदी के प्रधानमंत्री बनने के बाद जो जानकारी पाकिस्तान से आ रही है, उसमें कहा गया है कि दाऊद ने डर के मारे अपना ठिकाना बदल लिया है। रिपोर्टों के मुताबिक दाऊद इब्राहिम पाक-अफगानिस्तान सीमा पर तालिबान के नियंत्रण वाले इलाके में चला गया है। पहले उसका ठिकाना कराची में था।
भारत की दृष्टि से यह कोई मामूली घटनाक्रम नहीं कहा जा सकता है। इस घटनाक्रम से यह साफ हो जाता है कि पाकिस्तान भारत के सबसे वांछित अपराधी को भारत को सौंपने के बजाय उसे लगातार संरक्षण की नीति पर कायम है। यदि वास्तव में पाकिस्तान भारत से अच्छे संबंध चाहता तो वह दाऊद को भारत के हवाले कर देता। हालांकि अभी यह साफ नहीं है कि दाऊद के ठिकाना बदलने की योजना किसके दिमाग की उपज है। ऐसा इसलिए क्योंकि पाकिस्तान में सत्ता का कोई एक केन्द्र नहीं है। वहां की सेना खुलेआम भारत विरोधी षड्यंत्रों में लगी रहती है तो वहां की खुफिया एजेंसी आईएसआई कभी नहीं चाहती की भारत में शांति कायम रहे। इन दोनों के दबाव में पाकिस्तान की सरकार हमेशा झुकती रही है। विदेशी मामलों के विशेषज्ञों की मानी जाए तो इस बात से कतई इन्कार नहीं किया जा सकता कि भारत में मजबूत मनोबल वाली सरकार की आहत से भारत के दुश्मन आतंकियों को सुरक्षित स्थान पहुंचाने की योजना पाकिस्तान की सेना और आईएसआई ने तैयार की हो और इसे बारे में पाक सरकार को पर्याप्त जानकारी नहीं दी गई हो।

जो भी हो लेकिन सबसे महत्वपूर्ण सवाल तो यह है कि पाकिस्तान में एक चुनी गई सरकार कितनी ताकतवर है? क्या वहां की सरकार से संबंध सुधारने से वास्तव में हालात बदलेंगे या इसका कोई असर नहीं होने वाला, क्योंकि पाकिस्तान मे सेना और आईएसआई दोनों भारत में आतंकी गतिविधियां फैलाते रहे हैं, भारत विरोधियों और कश्मीर में अलगाववादियों को भड़काते रहे हैं। अब जबकि पाकिस्तान यह देख रहा है कि भारत में एक सशक्त स्वाभिमानी नेतृत्व सत्तासीन होने जा रहा है तो वह एक बार फिर अपनी दोगली चालों का मोहपाश भारत पर फेंकने की कोशिश कर रहा है। वहां कि सरकार, सेना और आईएसआई का गठजोड़ जो त्रियाचरित्र प्रस्तुत कर रहा है उससे सावधान रहने की जरूरत है। पूरे देश को ऐसा पक्का विश्वास है कि मोदी एक मजबूत इच्छाशक्ति वाले नेता हैं और वह पाकिस्तान के भारत विरोधी षड्यंत्रों को भली प्रकार समझते भी हैं ऐसी स्थिति में अब वह दिन दूर नहीं जब भारत-पाकिस्तान के षड्यंत्रों का न केवल मुंहतोड़ जवाब देगा बल्कि दाऊद जैसे भारत विरोधी दुश्मनों को भी पकड़कर लाया जाएगा।

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