लेखक परिचय

प्रवक्‍ता ब्यूरो

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अमेरिका में पकड़े पाकिस्तानी मूल के अमेरिकी आतंकवादी दाऊद गिलानी उर्फ डेविड हेडली की गिरफ्तारी के बाद चौंकाने वाले व सनसनीखेज तथ्य प्रकाश में आ रहे हैं। एक ओर जहां डेविड हेडली के भारत भ्रमण व उसकी आतंकी गतिविधियों का व रिश्तों से रहस्योद्धाटन हो रहा है वहीं अब उसके बालीवुड (फिल्म उद्योग) के रिश्तों का भी सनसनीखेज रहस्योद्धाटन हो गया है। हालांकि अभी जांच प्रक्रिया चल रही है लेकिन यह बात स्पष्ट हो गयी है कि पाकिस्तानी मूल के अमेरिकी नागरिक आतंकी दाऊद गिलानी की आतंकी योजना बेहद खतरनाक थी। उसका इरादा भारत के शहरों में 9/11 जैसी आतंकवादी घटनाओं को अंजाम देना भी था। उसका इरादा यह भी था कि किसी प्रकार भारत के परमाणु ठिकानों पर भी हमले किये जायें। उसकी चाल व साजिश को देखकर ही भारत सरकार के गृह मंत्रालय ने सभी परमाणु ठिकानों की सुरक्षा कड़ी कर दी है।

पूछताछ के दौरान रहस्योद्धाटन हुआ है कि डेविड हेडली ने वर्ष 2006 से 2009 तक भारत के कई शहरों का भ्रमण किया था व अपने मिशन की पूर्ति हेतु कई लोगों से मिला भी था। अभी इस बात की जांच चल रही है कि वह भारत में किन-किन लोगों से मिला था लेकिन प्रारंभिक जांच में ही पता चला है कि डेविड हेडली का संपर्क फिल्म निर्माता निर्देशक महेश भट्ट के बेटे राहुल भट्ट से भी था। भारतीय जांच एजेंसियों ने राहुल भट्ट के मुंबई से बाहर जाने पर रोक लगा दी है और विपक्ष ने राहुल भट्ट की गिरफ्तारी की मांग भी की है।

खुलासा हुआ है कि आतंकवादी संगठन लश्कर-ए-तैयबा भारत में एक बार फिर बड़े हमले क रने की तैयारी में हैं। दिल्ली में प्रतिष्ठित नेशनल डिफेंस कॉलेज, एन. डी. सी. उत्तर में हिल स्टेशन पर स्थित दो बोर्डिंग स्कूल पर भी नजर है। उक्त बात की जानकारी एफ. बी. आई. ने शिकांगो की अदालत में दी है। डेविड हेडली के सहयोगी ए. राणा ने तो भारत के लक्ष्यों के साथ डेनमार्क के लक्ष्यों की भी चर्चा की है। खुलासा हुआ है कि डेविड हेडली और उसके साथ गिरफ्तार टी. हुसैन राणा ने भारत के कई शहरों की यात्राएं की है जिसमें मुंबई, दिल्ली, अहमदाबाद, लखनऊ, आगरा जैसे शहरों का नाम सामने आ रहा है। हेडली और राणा ने कम से कम तीन बार मुंबई की यात्रा की है और मुंबई में आतंकी हमलों के दौरान वह पाक में ही था। इन आतंकवादियों के पास से एक वीडियो टेप बरामद हुआ है जिसका प्रयोग अलकायदा जिहाद के नाम पर लोगों क ो भड़काने के लिए करता है। भारतीय जांच एजेंसियां भी इस बात का पता करने में जुटी हैं कि ये दोनाें अगर मुंबई आये तो कब आये थे और कहां-कहां गए थे। एफ. बी. आई. ने राणा के पास से दो वीडियो टेप भी प्राप्त किये हैं जिसमें ओसामा बिन लादेन व अन्य सहयोगियों के भड़काऊ भाषण तो हैं ही साथ ही अलकायदा के मीडिया विंग अस साहब की ओर से बनाया गया एक वीडियो ‘बांबिंग ऑफ डेनमार्क एंबेसी’ के नाम से है।

खुफिया एजेंसियों को इस बात की भी जानकारी प्राप्त हुई है कि 26 नवंबर को लश्कर के आतंकवादियों ने जिस होटल ताज व होटल ट्राइडेंट को निशाना बनाया था उसमें हेडली काफी पहले ही रूक चुका था। मुंबई के एक प्रॉपर्टी डीलर ने पुलिस को बताया कि हेडली ने उससे बांद्रा स्थित अत्यंत महंगें पसली हिल बांद्रा रिक्लेशन क्षेत्र में किराये का घर दिलाने का भी आग्रह किया था। उसमें 50 हजार रुपए मासिक किराया वाला एक घर भी पसंद किया था लेकिन उससे वीजा पासपोर्ट एवं उसकी पहचान संबंधी अन्य कागजात मांगे गये तो वह मुकर गया।

उधर अमेरिका में गिरफ्तार हेडली से पूछताछ में पता चला है कि उसने कुख्यात आतंकी संगठन सिमी और इंडियन मुजाहिद्दीन की पूरी सहायता की थीव सहयोग भी लिया था। उ.प्र. की खुफिया एजेंसियां भी इस बात का पता लगाने में जुटी है कि लखनऊ व आगरा में वह किन-किन लोगों से मिला। खुफिया एजेंसियों ने हेडली के आजमगढ़ लिंक की भी जांच प्रारंभ कर दी है। इंडियन मुजाहिद्दीन के कर्ताधर्ता रहे अबू बशर से भी डेविड हेडली के साथ रिश्तों की संभावनाओं को तलाशा जा रहा है। उधर पुलिस प्रमुख ने स्पष्ट कर दिया है कि हेडली अहमदाबाद में भी रुका था।

डेविड हेडली ने लश्कर आतंकवादियों को भेजे ई-मेल में जिस राहुल का जिक्र किया था उसका भी खुलासा हो गया है यह राहुल न तो राहुल गांधी हैं न ही राहुल द्रविड़ और न ही शाहरुख खान अपितु यह राहुल हैं फिल्म निर्माता-निर्देशक महेश भट्ट के बेटे राहुल भट्ट। उधर अब तक जो जांच हुई है उसमें प्रतिदिन कोई न कोई नयी बात ही सामने आ रही है। जांच एजेंसियों के सूत्रों की मानी जाये तो पता चला है कि 26 नवंबर को मुंबई पर हुए हमले की कमान भी हेडली के हाथ में थी और वह हमले के समय पाकिस्तान में बैठकर वह हमलावरों को निर्देश भी दे रहा था। एफ. बी. आई. के अधिकारियों ने बताया है कि पूछताछ में रहस्योद्धाटन हुआ है कि आतंकवादियों के निशाने पर गुजरात का सोमनाथ मंदिर, बॉलीवुड के सितारे और शिव सेना के नेता भी थे। इस प्रकार देखा जाये तो पूरे प्रकरण में अमेरिका की भी भूमिका संदेह के घेरे में आ रही है क्योंकि अमेरिका प्रशासन इस प्रकरण में जिस प्रकार का सहयोग भारतीय एजेंसियों के साथ करना चाहिए था वह नहीं कर रहा है।अपितु इस प्रकार की जांच में वह भारतीय एजेंसियों को पूछताछ करने से मना कर चुका है। इस प्रकरण में भारतीय खुफिया एजेंसियों से भी यह चूक हुई है क्योंकि वे इस बात की भनक तक नहीं प्राप्त कर सकी कि भारत के विरुद्ध एक गहरा षड़यंत्र रचा जा रहा है। उक्त प्रकरण में अमेरिकी रवैया पूरी तरह से असहयोगात्मक रहा है और उसकी आतंकवाद के लड़ाई की प्रतिबद्धता संदेह के घेरे में आ रही है। इस प्रकार से तो आतंकवाद के खिलाफ लड़ाई नहीं जीती जा सकती है। भारत की राजनैतिक नेतृत्व को चाहिए अब वह विदेशी शक्तियों की ओर मुंह बंद करें और अपनी कमजोरियों को दूर करते हुए आतंक के खिलाफ युद्ध स्वयं के बलबूते पर लड़ें क्योंकि विदेशी ताकतें कभी भी नहीं चाहेंगी की भारत एक मजबूत राष्ट्र बनकर उभरे।

-लेखक, स्वतंत्र टिप्पणीकार हैं।

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