लेखक परिचय

बीनू भटनागर

बीनू भटनागर

मनोविज्ञान में एमए की डिग्री हासिल करनेवाली व हिन्दी में रुचि रखने वाली बीनू जी ने रचनात्मक लेखन जीवन में बहुत देर से आरंभ किया, 52 वर्ष की उम्र के बाद कुछ पत्रिकाओं मे जैसे सरिता, गृहलक्ष्मी, जान्हवी और माधुरी सहित कुछ ग़ैर व्यवसायी पत्रिकाओं मे कई कवितायें और लेख प्रकाशित हो चुके हैं। लेखों के विषय सामाजिक, सांसकृतिक, मनोवैज्ञानिक, सामयिक, साहित्यिक धार्मिक, अंधविश्वास और आध्यात्मिकता से जुडे हैं।

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-बीनू भटनागर- poem   1 रक्षा बंधन, भाई बहन स्नेह, प्यारा त्योहार। सखी सहेली, सावन की बारिश, अंग भिगोये। 3- हर सिंगार खिलते ही, झड़ते ख़ुशबू फैले। 4- नौका विहार, झील के उस पार, कुमुद खिले। 5 नीढ़ छोड़के पंछी निकले, दूर सांझ लौटेंगे। 6. प्रत्यूष काल, सुनहरा सा जाल, धूप की ज्योति। मंद समीर के प्रवाह के संग सुगंध फैली। विपदा आवे, कष्ट घने, जो लावे शीघ्र न जावें। ख़ुशी जो आवे, मन बहला कर, शीघ्र ही जावे। याद आओ तो चले भी आओ, अब राह निहारूं।

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1 Comment on "रक्षा बंधनः भाई बहन स्नेह"

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ये हाइकू हैं किसी भूलचूक की वजह से सही तरीक़े से नहीं प्रकाशित हुए क्षमा करें।

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