लेखक परिचय

जावेद उस्मानी

जावेद उस्मानी

कवि, गज़लकार, स्वतंत्र लेखक, टिप्पणीकार संपर्क : 9406085959

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-जावेद उस्मानी-
poem

मर गए अनगिनत गरीब देखते सियासी तंत्र मंत्र
महंगाई की ज्वाला से घिरा व्याकुल सारा प्रजातंत्र
कहीं बलात्कार तो कहीं हत्या, जंगल बना जनतंत्र
पूंजीधीश के गले लगते भजते विकास का महामंत्र
हवा पानी तक हजम कर गए जिनके उन्नत सयंत्र
अच्छा है यदि जपें न्याय सम्मत जनहित का जंत्र
लोकहित के नारों के पीछे, न स्वार्थ हो न षड्यंत्र

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1 Comment on "पूछ परख के चक्कर में घनचक्कर हुआ लोकतंत्र"

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dr.ashokkumartiwari@gmail.com
गरीब बे मौत मर रहे हैं – हर कोई लूट ही रहा है – भारत के प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी जी चुनाव के समय भारत की आम जनता से सवाल पूछते थे कि कांग्रेस की राज में मंहगाई कम हुई, बेरोजगारी कम हुई, भ्रष्टाचार कम हुआ , इत्यादि इस तरह के अनेकों सवाल नरेंद्र मोदी आम जनता से पूछा करते थे | आज जब सत्ता उनके हाथ में है तो मंहगाई आसमान छू रही है और आर्थिक सुधार के नाम पर कड़े फ़ैसले लेने के संकेत नरेंद्र मोदी देश की आम जनता को दे रहे है | जहाँ तक सवाल है… Read more »
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