लेखक परिचय

मृत्युंजय दीक्षित

मृत्युंजय दीक्षित

स्वतंत्र लेखक व् टिप्पणीकार लखनऊ,उप्र

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dengue-death-759मृत्युंजय दीक्षित
उत्तर प्रदेश की समाजवादी सरकार प्रदेश में बेहतर स्वास्थ्य सेवाएं देने का वादा भले ही कर रही हो लेकिन प्रदेश में जिस प्रकार से डेंगू, मलेरिया, चिकनगुनिया ,तेज बुखार का प्रकोप फैला और अस्पतालों में अराजकता का वातावरण पैदा हुआ है उससे सभी सरकारी दावों की पोल खुल गयी है। समाजवादी सरकार संतुलित एवं समावेशी विकास का दावा कर रही है लेकिन हालात बद से बदतर होते जा रहे हैं। प्रदेश के अस्पतालों में मरीजों की लम्बी – लम्बी कतारें लग गयी हैं। लेकिन प्रदेश सरकार के मंत्री और अफसर मस्ती में हैं। एक प्रकार से अस्पतालों मे अराजकता का वातावरण पैदा हो गया है। आये दिन हंगामें हो रहे हैं। जिस समय मरीज को आराम और सुविधा देने का समय आया उस समय लैब तकनीक कर्मचारी संघ अपनी विभिन्न मांगों को लेकर हड़ताल पर चले जाते हैं और काम ठप कर देते हैं जिसके कारण हालात और खराब हो रहे हैं। प्रदेश में चुनावों का मौसम आने वाला है सभी दल चुनावें की तैयारी में मस्त हैं तो विरोधी दल उसी हिसाब से अपनी बयानबाजी कर रहे हैं जबकि सरकार अपने गणित को ठीक करने में लगी हुयी है। इसी बीच डेंगू जनित बीमारियों और उनक फैलते प्रकोप का का मामला भी अदालात की चैखट पर जा पहुंचा है और इस पूरे मामले को गंभीर मानते हुए इलाहाबाद हाईकोर्ट की लखनऊ खंडपीठ ने सबंधित विभागों के सभी अधिकारियों को पूरी कार्रवाई रिपोर्ट के साथ अदालत के समक्ष तलब कर लिया है। वहीं मीडिया में फजीहत होने के बाद प्रदेश के नवनियुक्त स्वास्थ्य मंत्री भी अस्पतालों के औचक निरीक्षण पर निकल पड़े हैं। वहीं दूसरी ओर महापौर डा दिनेश शर्मा भी शहर की साफ- सफाई आदि पर कड़े तेवर दिखाने के लिए सड़क पर उतरे हैं।
इन हालातों में फिलहाल मरीजों की सुध लेने वाला कोई नहीं हैं। वहीं इसी गहमागहमी में अस्पतालों में हर प्रकार के दलाल भी सक्रिय हो गये हैं। यह दलाल अस्पतालों में मरीजों की भर्ती कराने से लेकर उनको रक्तदान कराने व दवाईयां आदि तक दिलाने के लिए सक्रिय हैं जसके कारण व्यवस्थायें और चरमरा गयी हैं। इन दलालों की नीचे से ऊपर तक पहुंच हैं। इन दलालों को छूने वाला कोई नहीं हैं। बीमारियों के चलते आजकल हर प्रकार की जांचांे के लिए भी कोई निश्चित दाम नहीं हैं।
वर्तमान समय में सरकारी आंकड़ों में डेंगू व अन्य बीमारियों से प्रभावित पीड़ितों की संख्या साढ़े चार हजार पर कर चुकी है किंतु अधिकारी किसी भी प्रकार की मौत मानने से इंकार कर रहे हैं। स्वास्थ्य महानिदेशलय के आंकड़ों के अनुसार प्रदेश के सरकारी अस्पतालों व प्रयोगशालाओं में डेंगू के 4525 मामले सामने आ चुके हैं। इसके विपरीत सरकारी आंकड़ों में दावा है कि केवल 5 मौतें ही हुयी हैं। जबक मीडिया रिपोर्ट कुछ और ही कहानी बयां कर रही हैं। प्रदेश के स्वास्थ्य प्रमुख सचिव अरूण सिन्हा का कहना है कि डेंगू के मामलों की पुष्टि के लिए राष्ट्रीय प्रोटोकाल का पालन किया जा रहा है। निजी अस्पतालों व पैथोलाजी लैब से पूरी जानकारी लेना सुनिश्चित करने के निर्देश दिये गये हैं। यहां तक कि डंेगू से प्रभावित प्रदेशके शहरी इलाकों की डिजिटल मैंपिेंग कराने का फैसला हुआ है। अखबारों व मीडिया रिर्पाेटस के अनुसार डेंगू से मरने वालो की संख्या में लगातार वृद्धि हो रही है अधिकारीगण सरकार को आंकड़ों के खेल में गुमराह कर रहे हैं। आज अस्पतालों की हालत यह हो रही है कि लाइन में खड़े. होने व पर्चे बनवाने से लेकर दवाइयों की लाइन में लगने तक मारपीट व हंगामा तक हो रहा है। लोहिया अस्पताल में तो महिलाओं से चेन लूटने तक की वारदातें हो चुकी हैे। अस्पतालों में मरीजों व तीमारदारांे की सुरक्षा भी ताक पर है। अस्पतालों में भारी भीड़ के चलते कहीं – कहीं पर महिलाओं के साथ छेड़छाड़ व अभद्रता की वारदातों को भी अंजाम दिया जा रहा है जिसके कारण भी कई जगह परिजनों की ओर से हंगामा किया गया है। अस्पतालों में चिकित्सकों की ओर से लापरवाही भी कम नहीं की जा रही है। अभी लखनऊ के एक अस्पताल में एक लड़की का नाक का आपरेशन किया गया लेकिन चिकित्सक की लापरवाही के कारण बालिका की असमय मौत हो गयी। उक्त बालिका का केवल सीरियस साइनस का ही आपरेशन किया गया था। यह तो लापरवाही का एक परम उदाहरण भर है।
अस्पतालों का आलम यह हो रहा है कि कोई मरीज फर्श पर ही तड़प रहा है, किसी बच्चे को गोद में लेकर ही ग्लूकोज चढ़ाया जा रहा है। मरीजांे के दबाव की वजह से अस्पतालों की इमरजेंसी में भर्ती तक ठप हो रही है। लोहिया और बलरामपुर अस्पताल में ओपीडी व बरामदे में पैर रखने तक की जगह नहीं बची है। वहीं सिविल अस्पताल आदि में कर्मचारियों का कार्यबहिष्कार के चलते हालात दयनीय होते जा रहे हैं। कर्मचारियों के कारण जो मरीज इलाज के लिये आ रह थे उनकी कहीं सुनवाई तक नही हो पा रही थी।
आज डेंगू ,मलेरिया ,चिकनगुनिया के साथ तेज बुखार के कारण राजधानी लखनऊ ही नहीं अपितु प्रदेश के कई शहरों की जनता आक्रोशित भी हो रही है जिसके कारण कानून व्यवस्था की समस्या भी पैदा होने लग गयी है। प्रदेश में सफाई व्यवस्था व फागिंग आदि का भी बुरा हाल हो रहा है। मशीनों की खराबी के कारण कई जगह फागिंग तक नहीं हो पा रही है। वहीं फागिंग को लेकर भी लेकर भी राजनीति हो रही है। माना जा रहा है कि प्रदेश में फैल रही गंदगी के कारण ही खतरनाक मच्छरों के लार्वा पनप रहे हैं। फिर भी सफाई अभियान की प्रदेश में ऐसी की तैसी की जा रही है। कई जगह सफाई कर्मचारियों के साथ हिंसक घटनायें भी हो चुकी हैं। एक प्रकार से वर्तमान समय में प्रदेश की स्वास्थ्य सेवायें बदहाल हैं।
वहीं प्रदेश सरकार बेहतर स्वास्थ्य सुविधाएं देने का दावा कर ही है। समाचार पत्र -पत्रिकाआंे में विज्ञापन के माध्यम से बड़े- बड़े दावे किये जा रहे हैं।
मुख्यमंत्री अखिलेश यादव का कहना है कि 108 समाजवादी स्वास्थ्य सेवा काफी प्रभावी और लोकप्रिय एम्बुलेंस सेवा है। इस सुविधा से लाखों लोग लाभन्वित हुए हैं। बेहतर अस्पतालों और दवाइयों के इंतजाम के लिये राज्य सरकार ने काफी काम किया है। प्रदेश में स्वास्थ्य सेवाएं पहले से बेहतर हुयी हैं। राज्य सरकार इन्हें और बेहतर बनाने के लिए लगातार प्रयास कर रही है। मुख्यमंत्री का कहना है कि स्वास्थ्य सेवाओं को और बेहतर बनाने के लिये अभी काफी काम करना है। नये अस्पताल और मेडिकल कालेज बनाने के लिए सरकार लगातार काम कर रही है। जिला अस्पतालों को और अच्छा बनाने , सफाई की बेहतर व्यवस्था और दवाई के इंतजहाम पर विशेयाध्यान देना है। जनता को सस्ती दवायंे उपलब्ध कराने के लिये जेनेरिक मेडिसिन उपलब्ध कराने के सम्बंध में भी सरकार जल्द ही फैसला लेगी। सरकार सुविधायें दे भी रही है तथा नित नयी योजनायें लाभी रही है लेकिन आपज प्रदेश के स्वास्थ्य विभाग का स्वास्थ्य स्वयं बिगड़ गया है। यह सब कुछ अफसरों की लापरवाही और विभागीय मंत्रियों की सुस्ती का भी परिणाम है कि डेंगू जैसी महामारियों ने प्रदेश में विकाराल रूप धारण कर लिया और जनमानस मच्छरों के आतंक के साये में जीने के लिये मजबूर है। आज आवश्कता इस बात की है कि जब तक साज स्वयं मजबूती के साथ नहीं खड़ा होगा तथा हर छोटी से छोटी समस्या के लिए सरकार व सरकारी कर्मचारियों की ओर उम्मीदों भरी निगाहों से देखता रहेगा तब तक समाज को इस प्रकार की अराजकता का सामना करना ही पड़ेगा। यदि जनमानस स्वयं जागरूक होकर स्वच्छता अभियान पर ध्यान दे दे तो आधे मच्छरों का ऐसे ही सफाया हो जायेगा।आज आवश्यकता इस बात की है कि प्रदेश में व्यापक पैमाने पर स्वच्छता अभियान चलाया जाये । यह किसी राजनैतिक दल के लिए नहीं अपितु जनस्वास्थ्य के लिए बेहतर होगा। स्वच्छता अभियान से कई बीमारियों को दूर भगाया जा सकता है। आज जो बीमारियां पैदा हो रही हैं उन बीमारियों की असली जड़ गंदगी में ही पनपती है।

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