लेखक परिचय

सतीश सिंह

सतीश सिंह

श्री सतीश सिंह वर्तमान में स्टेट बैंक समूह में एक अधिकारी के रुप में दिल्ली में कार्यरत हैं और विगत दो वर्षों से स्वतंत्र लेखन कर रहे हैं। 1995 से जून 2000 तक मुख्यधारा की पत्रकारिता में भी इनकी सक्रिय भागीदारी रही है। श्री सिंह दैनिक हिन्दुस्तान, हिन्दुस्तान टाइम्स, दैनिक जागरण इत्यादि अख़बारों के लिए काम कर चुके हैं।

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कब और कैसे

धूल और धुएं

से ढक गया आसमान

सागर में मिलने से पहले ही

एक बेनाम नदी सूख़ गई

एक मासूम बच्चे पर

छोटी बच्ची के साथ

बलात्कार करने का

आरोप है

स्तब्ध

हूँ

खून के इल्ज़ाम में

गिरफ्तार

बच्चे की ख़बर सुनकर

इस धुंधली सी फ़िज़ा में

सितारों से आगे की

सोच रखनेवाला

एक होनहार छात्र

बम विस्फ़ोट में

मारा गया

घर के सामने वाला

अंतिम ज़मीन का टुकड़ा भी

तब्दील हो गया है

कंक्र्रीट में

डायनामाईट

से उड़ा दिया गया

हरे-भरे से

पहाड़ को

सहमे हुए हैं

जीव-जन्तु

अचानक!

एक मासूम बच्चा

चौंककर

बाहर निकल आता है

ख्वाबों की दुनिया से।

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2 Comments on "अवमूल्यन : कविता – सतीश सिंह"

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Sanjay
Guest

Bahut hi prasangki kavita hai wartman sandarbh me.

Vinita Kaur
Guest

You have shown mirror to society. Nice & Excellent Poem. Keep it up.

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