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फखरे आलम

फखरे आलम

स्वतंत्र वेब लेखक व ब्लॉगर

Posted On by &filed under हिंद स्‍वराज.


conversionहंगामा है क्यों बरपा थोड़ी सी जो पी है डाका तो नहीं डाला चोरी तो नहीं की है। धर्मान्तरण ही तो किया है! क्या धर्मान्तरण करना इतना जघन्य अपराध् है। जबरन तो धर्म परिवर्तन नहीं किया है? अथवा करवाया गया है। अगर करवाया भी गया है तो इसके लिए वर्तमान की केन्द्र सरकार जिम्मेवार केसे है? धर्मान्तरण किऐ लोगों का शुद्धीकरण और फिर उनके घरों पर भगवा झण्डा लहराना कोई अपराध् कैसे हो सकता है। झण्डा तो झण्डा ही है। गेरवा लहराए या फिर कोई और। जैसे कि महाराष्ट्र चुनाव के पश्चात् महाराष्ट्र में हुआ था। केन्द्र में भाजपा के आने पर ऐसी घटना नहीं घटी है और अन्य धार्मिक और संस्कृति संगठन इस प्रकार की गतिवीधियों में पहली बार संलग्न भी नहीं रहे हैं। मात्रा 250 मुसलमानों ने ही तो धर्म परिवर्तन किया है। उससे न मुसलमानों को फर्क पड़ता है और न ही हिन्दुओं को। धर्म में आने जाने का सिलसिला तो जारी है। मुसलमान हिन्दु हो गए तो बड़ी घटना लगने लगी। मगर चिन्ता तो दोनों ओर है कि देश में हिन्दु की संख्या घटती जा रही है बड़ी संख्या में मिशनरी भारतीय हिन्दुओं और पिछड़ों को अपने प्रभाव क्षेत्र में लेता जा रहा है।

भारत में ही नहीं बल्कि विश्व भर में हिन्दु धर्म सबसे प्राचीनतम धर्म और सभ्यता एवं संस्कृति के स्वामी है। भारत में धर्मान्तरण किऐ हुऐ लगभग 99 प्रतिशत लोग मूलतः पिछड़े, आदिवासी और जनजातियों मूल के मूलतः भारतीय हैं। इतिहासकारों में अंग्रेज, सेकुलर, मार्कसवाद लेखकों ने अपने अपने सहजताओं और सिद्धान्तों के अनुरूप इतिहास की रचना की है। और अब विचारधाराओं के आधार पर इतिहास का रूपानतरण जारी है।

मुसलमान एक लुटेरा और आक्रमणकारी क्रूर और जबरन धर्म परिवर्तन कराने वाले शासकों के रोल में। अंग्रेज और उनकी मिशनरी मानवता की सेवा और समाज सेवक, स्कूल और अस्पताल चलाने वाले संस्थान के रूप में जाने जाते हैं। तो मूल भारतीय हिन्दू बड़े दिल वाला विशाल एवं धनी संस्कृति का स्वामी है।

वर्तमान परिवेश में किया, मध्यकालीन भारत में जबरन कोई किसी का धर्मान्तरण नहीं करवाता। बल्कि आर्थिक और सामाजिक रूप से पिछड़ों का दुर्भाग्य होता है कि राजनीति, आर्थिक और सामाजिक रूप से फुटबाल बनते हैं। गरीबी, निधर््नता, असमानता के कारण ऐसा होता है और जहाँ पर सम्मान, रोजी, रोटी का अवसर पिछड़ों, आर्थिक रूप से कमजोरों को प्राप्त होता है। लोग वहां की राह लेते हैं। अगर आज 250 मुसलमानों ने अपना धर्म त्याग कर। टोपी पहन कर हवन में भाग लिया और पंडितों के हाथों शुद्धीकरण करवाया तो इसके लिऐ न तो केन्द्र की भाजपा की सरकार, जिम्मेवार है और न ही बजरंग दल के कार्यकर्ता। इसके लिए वह धर्म और समाज जिम्मेवार है। जिनके कन्धों पर उनके पिछड़ों की जिम्मेवारी है। जिनके नाम पर वह राजनीति करते हैं।

विश्व भर में जनसंख्या और धर्म पर आधारित संवर्धन करने वाली अमेरिकन संस्थान के अनुसार- मुसलमानों की जनसंख्या विश्व भर की जनसंख्या का 23.5 प्रतिशत अर्थात् 1 अरब 60 करोड़ है। और उसी संस्थान का दावा है कि 2030 तक मुसलमानों की जनसंख्या में बढ़ोत्तरी होकर 26 प्रतिशत होने की संभावना है जो करीब करीब 2 अरब 20 करोड़ का आंकड़ा पार कर जाऐगा।

अपने रिपोर्ट में दर्शाता है कि अन्य धर्मो की अपेक्षा इस्लाम धर्म के मानने वालों में व्यस्क की संख्या अधिक है। संस्थान के आँकड़े बताते हैं कि विश्व भर में ईसाई धर्म के अनुयायियों की संख्या नम्बर एक की।

इस्लाम धर्म दूसरे, किसी भी धर्म में आस्था न रखने वाले तीसरे, हिन्दुधर्म चौथे, और विश्व का सबसे छोटा धर्म यहूदी है। जिसकी संख्या विश्व भर के देशों में कुल 1 करोड़ 40 लाख है जो आज विश्व की सबसे प्रगतिवादी लोगों पर है। जिसका राज राजनीति और आर्थिक क्षेत्रों पर कायम है। विश्वभर के देशों में मुसलमान सबसे अधिक मुसलमान इन्डोनेशिया में और भारत में मुसलमानों की जनसंख्या तीसरे नम्बर पर है।

1822 में वर्डवर्थ ने कहा था कि इस्लाम विश्व के बेहतरीन धर्मो में से एक है। मगर इसके अनुयायी सबसे खराब हैं। ईसाई धर्म ने पिछड़ों और दलित बहुल्य क्षेत्रों में संस्थानों के माध्यम से बहुत कम किऐ हैं। एक संघ के बड़े अधिकारी ने मुझसे कहा था कि हमने सरकार से अधिक रोजगार लोगों को धर्म से जोड़कर दे रखी है। सत्ता में रहकर अगर एक पक्ष मतबूत हो रहा है तो अन्य पक्षों को भी मजबूती का अवसर प्राप्त होने लगा है। हवाओं को रोको के सवाल सारे चमन का है।

यह कैसा राष्ट्रवाद है? यह कैसी देशभक्ति है? कि इस गुलशन जैसे देश में, जहाँ पर अनेकों धर्मो और संस्कृति के फुल खिलते हैं! अनेकों अनेक खुशबू बिखेरते धर्म, जहाँ पर घंटे भी बजते, गुरुपार भी चलते हैं और अजान की आवाजें भी आती है। सीमा पार से आते श्रीलंकाई, तिब्बत के शरणार्थी, रोजगार के लिऐ नेपाल से आते लोग शरणार्थी के रूप में अफगानी सभी यहाँ पर शरण पाते हैं। मगर देशभक्ति के अंगारों पर कभी पाकिस्तानी तो कभी बंगलादेशी ही क्यों आग लगाते हैं। पूर्वोत्तर की सीमा क्षेत्रों में राष्ट्रवाद और देशभक्ति के नाम पर बंगलादेशी पर राजनीति आखिर क्यों और वही बंगलादेशी जब धर्मान्तरण करता है तो भारतीय नागरिक क्यों शान्ति से बन जाता है। अवैध् रूप से देश की सीमाओं में प्रवेश पर कैसी राजनीति यह तो देश की सुरक्षा और शांति से समझौता है। वर्तमान सरकार का यह कदम बड़ा ही सराहनीय और सकून देने वाला है। जिसके अध्ीन आतंकवाद और सुरक्षा के नाम पर धडल्ले से धड-पकड़ नहीं हो रहा और जिसे गिरफ्तार किया जा रहा। तुरन्त जांच के बाद सरकार स्थिति स्पष्ट कर रही है। पिछली सरकारों की भांति संदेह के आधार पर बगैर आरोप तय किऐ युवकों की जिन्दगी से खिलवाड़ नहीं किया जा रहा है। सरकार और गृहमंत्राी का धन्यवाद!

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