लेखक परिचय

बीनू भटनागर

बीनू भटनागर

मनोविज्ञान में एमए की डिग्री हासिल करनेवाली व हिन्दी में रुचि रखने वाली बीनू जी ने रचनात्मक लेखन जीवन में बहुत देर से आरंभ किया, 52 वर्ष की उम्र के बाद कुछ पत्रिकाओं मे जैसे सरिता, गृहलक्ष्मी, जान्हवी और माधुरी सहित कुछ ग़ैर व्यवसायी पत्रिकाओं मे कई कवितायें और लेख प्रकाशित हो चुके हैं। लेखों के विषय सामाजिक, सांसकृतिक, मनोवैज्ञानिक, सामयिक, साहित्यिक धार्मिक, अंधविश्वास और आध्यात्मिकता से जुडे हैं।

Posted On by &filed under कविता, साहित्‍य.


बीनू भटनागर

roshniधूप बेचारी,

तरस रही है,

हम तक आने को।

धूल, जीवाणु, विषाक्त गैेसें,

उसका रस्ता रोके खड़ी हैं।

वायु प्रदूषण के कारण,

अब आँखें जले लगी हैं।

ये धुंध है, ना कोहरा है,

ना ही बादल का घेरा है,

दूर दूर तक वायु प्रदूषण का,

जाल बना गहरा है।

साल के अंतिम छोर पर भी,

ठँड का नामोनिशान नहीं है।

सूरज को भी अब तो,

धूप पर अभिमान नहीं है।

 

Leave a Reply

Be the First to Comment!

Notify of
avatar
wpDiscuz