लेखक परिचय

सूरज तिवारी 'मलय'

सूरज तिवारी 'मलय'

सम्‍पर्क : ब्राम्‍हण पारा, लोरमी, जिला-बिलासपुर, पिन- 495 115

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भारत में वैसे तो अनेक समस्याएं विद्यमान हैं जिसके कारण देश की प्रगति धीमी है। उनमें प्रमुख है बेरोजगारी, गरीबी, अशिक्षा, आदि लेकिन उन सबमें वर्तमान में सबसे ज्यादा यदि कोई देश के विकास को बाधित कर रहा है तो वह है भ्रष्टाचार की समस्या। आज इससे सारा देश संत्रस्त है। लोकतंत्र की जड़ो को खोखला करने का कार्य काफी समय से इसके द्वारा हो रहा है। और इस समस्या की हद यह है कि इसके लिए भारत के एक पूर्व प्रधानमंत्री तक को कहना पड़ गया था कि रूपये में मात्र बीस पैसे ही दिल्ली से आम जनता तक पंहुच पाता है।

वास्तव में यह स्थिति सिर्फ एक दिन में ही नहीं बनी है। भारत को जैसे ही अंग्रेजी दासता से मुक्ति मिलने वाली थी उसे खुली हवां में सांस लेने का मौका मिलने वाला था उसी समय सत्तालोलुप नेताओं ने देश का विभाजन कर दिया और उसी समय स्पष्ट हो गया था कि कुछ विशिष्ट वर्ग अपनी राजनैतिक भूख को शांत करने के लिए देश हित को ताक मे रखने के लिए तैयार हो गये हैं। खैर बीती ताहि बिसार दे। उस समय की बात को छोड वर्तमान स्थिति में दृष्टि डालें तो काफी भयावह मंजर सामने आता है। भ्रष्टाचार ने पूरे राष्ट्र को अपने आगोश में ले लिया है। वास्तव में भ्रष्टाचार के लिए आज सारा तंत्र जिम्मेदार है। एक आम आदमी भी किसी शासकीय कार्यालय में अपना कार्य शीध्र करवाने के लिए सामने वाले को बंद लिफाफा सहज में थमाने को तैयार है। 100 में से 80 आदमी आज इसी तरह कार्य करवाने के फिराक में है। और जब एक बार किसी को अवैध ढंग से ऐसी रकम मिलने लग जाये तो निश्चित ही उसकी तृष्णा और बढेगी और उसी का परिणाम आज सारा भारत देख रहा है।

भ्रष्टाचार में सिर्फ शासकीय कार्यालयों में लेने देनेवाले घूस को ही शामिल नहीं किया जा सकता बल्कि इसके अंदर वह सारा आचरण शामिल होता है जो एक सभ्य समाज के सिर को नीचा करने में मजबूर कर देता है। भ्रष्टाचार के इस तंत्र में आज सर्वाधिक प्रभाव राजनेताओं का ही दिखाई देता है इसका प्रत्यक्ष प्रमाण तो तब देखने को मिला जब नागरिकों द्वारा चुने हुए सांसदों के द्वारा संसद भवन में प्रश्न तक पूछने के लिए पैसे लेने का प्रमाण कुछ टीवी चैनलों द्वारा प्रदर्शित किया गया।

कभी कफन घोटाला, कभी चारा – भूसा घोटाला, कभी दवा घोटाला, कभी ताबूत घोटाला तो कभी खाद घोटाला आखिर ये सब क्या इंगित करता है। ये सारे भ्रष्टाचार के एक उदाहरण मात्र हैं।

बात करें भारत को भ्रष्टाचार से बचाने के लिए तो जिन लोगों को आगे आकर भ्रष्टाचार को समाप्त करने का प्रयास कर समाज को दिशा निर्देश देना चाहिए वे स्वयं ही भ्रष्ट आचरण में आकंठ डूबे दिखाई देते है।

वास्तव में देश से यदि भ्रष्टाचार मिटाना है तो ने सिर्फ साफ स्वच्छ छवि के नेताओं का चयन करना होगा बल्कि लोकतंत्र के नागरिको को भी सामने आना होगा। उन्हें प्राणपण से यह प्रयत्न करना होगा कि उन्हें भ्रष्ट लोगों को समाज से न सिर्फ बहिष्कृत करना होगा बल्कि उच्चस्तर पर भी भ्रष्टाचार में संलिप्त लोगों का बायकॉट करना होगा। अपनी आम जरूरतों को पूरा करने एवं शीर्ध्रता से निपटाने के लिए बंद लिफाफे की प्रवृत्ति से बचना होगा। कुल मिला जब तब लोकतंत्र में आम नागरिक एवं उनके नेतृत्व दोनों ही मिलकर यह नहीं चाहेंगे तब तक भ्रष्टाचार के जिन्न से बच पाना असंभव ही है।

-सूरज तिवारी ‘मलय’

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16 Comments on "भारत में भ्रष्टाचार की समस्या एवं निदान"

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ramhet kushwah
Guest
5 years 1 month ago

गुड डे

MANU TRIPATHI
Guest
5 years 2 months ago

मेरे हिसाब से भ्रस्ताचारियो से पहले आतंकियों जो जिहादी नक्सली है जिन्हें सर्कार बिरियानी खिला रही है समजौता वार्ता कर रही है पहले उन्हें नास्ता करो

MRIGSHIRA TRIPATHI
Guest
5 years 2 months ago

मै एक स्कूल स्टुडेंट हूँ , BHRASTACHAR जंगली घास के सामान हमारे देश को क्गोखला कर रहा है , इसे खतम करने के लिए हम सभी को एक साथ होकर LADANA होगा
सत्यमेव जयते

GHANSHYAM
Guest
5 years 14 days ago

I AM A STUDENT I KNOW THAT VERY

MADAN GOPAL BRIJPURIA
Guest
5 years 4 months ago
मे आपका सहयोग चाहता हू |अभी मेरी आदत लेख लिखने कि नहीं है ,इसलिए विस्तार से लिखना मुसकिल हो रहा है |मे चाहता हू कि फ़ोन पर विस्तार से अपनी बात कह सकू | मेरे पास एक आईडिया है जिससे देश कि बिगड़ी दशा को चुटकियो मे सुधारा जा सकता है |जिससे जो शुभ परिणाम मिलेगे वो इतने ज्यादा अच्छे होगे कि ऐसा लगेगा कि प्रथ्वी पर चमत्कार हो गया हो | मेरे प्लान के अनुसार देश कि करेंसी को बंद कर बैंक द्वारा १००% लेनदेन होना चाहिए | इस विषय पर मेने विस्तार से प्लान कर लिया है |… Read more »
akash rai. mp
Guest
akash rai. mp
5 years 5 months ago

corppuption ek esa adhikaar hai jisme ekadhikaar to prapt hai. lekin paardarsita bilkul nahi . vaastab mai bhirasta chaar ka ajgar aaj desh ko nigal raha hai , har vibaag mai uper se neche tak karmchari adhikari sar se lekar pair tak bhirastachaar ki gangotri mai gote laga rahe hai
.ghus lene bale se adhik doshi ghus dene bala hai .ghus
magne bale ko bhikhari kaha jaay to kam nahi . corppution per lagaam kasne ke liye har yuva ko aage ana hoga tabhi is per bijay pai ja sakti hai. or iski suruaat aaj hi se karni hogi,

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