लेखक परिचय

राजकुमार सोनी

राजकुमार सोनी

स्वतंत्र वेब लेखक व ब्लॉगर

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राजकुमार सोनी

आज बाजार में बहुत चहल-पहल है, गाना बजाना रास्ते भर औरतें सज-संवरकर खड़ी थीं और क्यों न हों, आज पूरा बाजार ग्राहकों से भरा पड़ा था। कजरी बाई का कोठा सबसे ज्यादा गुलजार था, क्योंकि उस बाजार की दो हुस्न परियां उसके कोठे की शान थीं- शानो और मलिका। इस बाजार में बड़े-बड़े नेता, उच्च-मध्यम वर्गीय सब आज कजरी बाई के यहां मुजरा सुनने के लिए आने वाले हैं। कजरी बाई के लिए तो आज एक ओर खुशी की बात थी। आज मलिका की नथ उतरने वाली थी। नथ उतरना मतलब कजरी बाई का कोठा। मालामाल होने वाला है। कजरी शाम से ही सज संवरकर ग्राहकों का इंतजार करने लगी, ग्राहकों से कोठा भर गया, पर सारे ग्राहकों में एक चेहरा ऐसा था जो पहली बार कोठे पर आया है। उस चेहरे में कोई भाव नहीं थे, लगता है जैसे कोई मशीनी आदमी बैठा हो, खैर… मलिका ने एक नजर उस पर डाली और उपेक्षा से मुंह फेर लिया। उसे क्या करना? कौन है? कौन सा इसका सगा है जो वो इतना उसके बारे में सोचे। उसे तो मुजरे के बाद मिलने वाले रुपयों से मतलब है, ताकि उसे और कजरी बाई को कुछ हफ्तों तक काम न करना पड़े। कजरी बाई थी तो कोठे वाली पर उन सबका ध्यान मां जैसा ही रखती थी। मुजरा खत्म होने को है पर ऐसा कोई ग्राहक नहीं आया जो उसकी नथ उतराई की कीमत लगा सके, पर वो बुत अभी तक बैठा है। एक-एक करके सब चले गए। उसने नोटों की 4-5 गड्डियां निकालीं और उठकर चला गया। ऐसा लगातार पांच दिनों तक होता रहा, कजरी के तो मजे थे। रुपयों की बारिश हो रही थी। मगर पांचवे दिन मलिका ने उसे रोक लिया। बाबूजी माना हम कोठे वालियां हैं पर मुफ्त का हम भी नहीं लेते। आप क्यों रोज यहां आकर चुपचाप बैठते हो और नोटों की गड्डियां थमाकर चलते बनते हो। क्या घर में कोई नहीं है। कल को हम पर अगुलियां उठ जाएंगी कि हमने आपको कंगाल कर दिया। आज तो आपको बताना ही पड़ेगा।

न तो आप मुजरा देखते हो और न हमारी तरफ आंख उठाकर देखते हो।

आखिर क्या बात है, उसने पास में रखा पानी पिया और पहली बार मेरी तरफ नजर उठाकर देखा। उसकी आंखों की लालिमा देखकर मैं भी चौंक उठी। लगा कि वो कई महीनों से सोया नहीं है। उसने बताया कि उसका नाम प्रताप है। पिता किसी गांव में जमींदार हैं। खूब पैसा है। मुझे लगा इसलिए बड़े बाप की औलाद यहां आकर पैसा उड़ा रही है।

प्रताप ने फिर कहना चालू किया- कुछ सालों पहले उसका विवाह हो चुका है, अपनी बीबी से वो बहुत प्यार करता है। बीबी रमा संस्कारी लड़की, पर मध्यमवर्ग की थी, लेकिन उसके विवाह की एक कमी थी। इनकी कोई संतान नहीं है। वंश को चलाने वाला कोई नहीं। हर जगह इलाज करवा लिया। कोई उम्मीद नहीं।

अब घर के लोग पीछे पड़े हैं। दूसरी शादी के लिए। लेकिन प्रताप अपनी रमा के अलावा किसी के बारे में सोच भी नहीं सकता। अभी घर वालों ने जबरदस्ती रमा को मायके भेज दिया है। घर वाले रोज एक रिश्ता लेकर आते हैं। उन्हीं से बचने के लिए मैं रोज यहां आ जाता हूं। ताकि लोग मेरी बदनामी कर दें और फिर कोई मुझसे शादी न करें।

इतना बताकर वो चला गया।

मेरा भी मन कुछ अजीब हो चला था। अगले कुछ दिनों तक प्रताप नहीं आया।

मैं भी बीमार हो गई।

शानो की नथ उतराई हो चुकी थी। मतलब उसका घर बस गया था। मेरे बीमार होने की वजह से कजरी बाई का कोठा वीरान हो चला था, पर अभी मैं सिर्फ प्रताप के बारे में सोच रही थी।

आज मेरी तबीयत थोड़ी ठीक थी तो मैंने सोचा क्यों न जमींदार की हवेली की तरफ जाऊं?

प्रताप कैसा है?

क्या उसकी बात घर वाले मान गए?

कहीं उन्होंने उसकी दूसरी शादी तो नहीं कर दी?

और रमा…. वो कहां होगी?

अपने मायके में या उसे कुछ हो तो नहीं गया। बस, इन सब सवालों के जवाब के लिए मुझे वहां जाना ही था।

हवेली के बाहर बहुत से लोग आ जा रहे हैं, अपने चेहरे पर घूंघट डालकर मैं भी लोगों की भीड़ में शामिल होकर अंदर चली गई, लेकिन वहां का माहौल देखकर मैं सिहर गई एक तरफ प्रताप की शादी हो रही थी और दूसरी तरफ रमा की लाश पड़ी हुई थी।

उफ, ये क्या हो गया।

…और ये प्रताप कुछ बोल क्यों नहीं रहा।

रमा कैसे मर गई?

मैं मलिका जो अपने जीवन के बड़े-बड़े दर्द भी बर्दाश्त कर गई। अपनों ने मुझे जहां लाकर पटका वो भी सह लिया।

मगर मेरे साथ गरीबी और लाचारी थी। दुनिया की गंदी निगाहों से बचने के लिए मुझे ऐसा लगा कि कजरी बाई का कोठा सुरक्षित जगह थी जहां अपना हुनर बेचकर अपना पेट पाला जाता है।

मगर ये प्रताप बड़े लोग, पैसों की कमी नहीं, ये क्या हो गया। शायद पांच दिनों की मुलाकात में मेरा प्रताप से एक लगाव हो गया था। मैं ये सोच रही थी कि मेरे सामने एक आदमी आकर खड़ा हुआ, बोला- क्या आप मलिका हो। प्रताप ने कहा था – आप उन्हें ढूढऩे जरूर आओगी।

मैं प्रताप का दोस्त हूं, पर आपने आने में देर कर दी। आज प्रताप की शादी है। वो अभी बेहोशी की हालत में है। रोज उसे बेहोशी के इंजेक्शन दिये गए और आज भी वो बेहोश ही है।

ये बड़े लोग हैं, इन्होंने डॉक्टर को खरीद लिया और रमा को जहर का इंजेक्शन देकर मार दिया, अब ये लोग रमा को इसी हवेली में दफना देंगे और कह देंगे कि रमा किसी के साथ भाग गई।

इन लोगों ने वंश की खातिर एक नहीं दो-दो जिंदगियों को खत्म कर दिया। प्रताप ने कहा था कि वो आपको सब बताना चाहता है। रमा के साथ यहां से कहीं भाग जाना चाहता है, पर उसके पहले ही ये सब हो गया।

इतना कहकर वो चला गया और मैं जड़ हो गई। ये सब सुनकर ये कैसा सच था। मैं क्यों प्रताप की मदद नहीं कर पाई और एक भयानक सच जो शायद सिर्फ मुझे ही पता था कि बच्चा पैदा न कर पाने की कमी रमा में नहीं बल्कि प्रताप में थी और ये बात प्रताप ने मुझे तो बता दी पर जान गंवाकर चुकानी पड़ी।

मेरे सामने एक तमाशा चल रहा था, प्रताप की शादी और रमा का कफन दोनों तैयार थे।

सारा सच जानते हुए भी मैं चुप थी। कैसे बताती कि मैं कोठे वाली हूं। मेरे कोठे पर आकर प्रताप ने मुझे ये सच बताया था। मैं सोच रही थी कि प्रताप के घर वाले अपने वंश के लिए और मिलने वाली इतनी सारी दौलत के लिए तो वो लड़की वाले और खुद लड़की बड़े घर से जुडऩे के लिए इतना गिर सकते हैं। ये संभ्रांत कहलाने वाले लोग खुद ही अपने बच्चों को बाजार में लेकर बैठे हैं। हमारी मंडी और इनकी मंडी में ज्यादा फर्क नहीं है। हम पेट के लिए मजबूरी में यहां धकेले जाते हैं, तो ये लोग खुद ही बिकने के लिए बैठ जाते हैं। सच है समाज को सुधारने का बीड़ा, बड़े लोगों ने ही उठा रखा है। इन्हीं लोगों ने अलग-अलग बाजार बना दिया।

एक खुद को बेचने के लिए और एक हमको बेचकर यहां बैठाकर खुद का मन बहलाने के लिए। पर ये हीरामंडी सब जगह है। ये मैं जान चुकी थी और मेरे भी मुजरे का वक्त हो चला था। आखिर मैं अपने खुद के घर में सुरक्षित तो थी।

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