लेखक परिचय

लोकेन्द्र सिंह राजपूत

लोकेन्द्र सिंह राजपूत

युवा साहित्यकार लोकेन्द्र सिंह माखनलाल चतुर्वेदी राष्ट्रीय पत्रकारिता एवं संचार विश्वविद्यालय, भोपाल में पदस्थ हैं। वे स्वदेश ग्वालियर, दैनिक भास्कर, पत्रिका और नईदुनिया जैसे प्रतिष्ठित संस्थान में अपनी सेवाएं दे चुके हैं। देशभर के समाचार पत्र-पत्रिकाओं में समसाययिक विषयों पर आलेख, कहानी, कविता और यात्रा वृतांत प्रकाशित। उनके राजनीतिक आलेखों का संग्रह 'देश कठपुतलियों के हाथ में' प्रकाशित हो चुका है।

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लोकेन्‍द्र सिंह राजपूत

पिछले दस सालों से आतंक का सबसे बड़ा चेहरा ओसामा बिन लादेन मारा गया। यह खबर मिलते ही करोड़ों लोगों का प्रसन्नता हुई होगी। वे दिल से अपने-अपने भगवान और अमेरिका को धन्यवाद ज्ञापित कर रहे होंगे। लेकिन, कांग्रेस के सिपहेसलार दिग्विजय सिंह को बहुत ही गहरा सदमा पहुंचा है। उनका विलाप देखकर मालूम होता है कि लादेन दिग्विजय सिंह का करीबी रिश्तेदार रहा होगा। दिग्विजय को दु:ख है कि उसे समुद्र में क्यों बहा दिया गया। जिस बात पर कुछेक कट्टरपंथी मुस्लिमों को छोड़कर किसी को आपत्ति नहीं उस पर इन महाशय को गहरा क्षोभ है। दरअसल दिग्विजय की मंशा थी कि उसके नाम से मजार या फिर आलीशान मस्जिद बनती। जिसकी देखरेख कांग्रेस कमेटी करती और दिग्विजय उसमें मौलाना की भूमिका निभाते। जैसे भारत में क्रूर आक्रांता बाबर की तथाकथित मस्जिद बनी हुई थी। भारत के जनमानस और न्यायपालिका ने जिसे अवैध ठहरा दिया है। ओसामा बिन लादेन अमेरिका का घोर शत्रु था। जिसे अमेरिका पिछले दस सालों से तलाश रहा था। उसे पाकिस्तान में मारने के बाद अमेरिका के राष्ट्रपति सोच रहे थे कि इसका अंतिम क्रियाकर्म कैसे की जाए। तब उन्होंने सोचा अगर इसे जमीन में दफन किया तो निश्चित तौर पर यह पूजा जाएगा। तथाकथित सेक्युलर जमात के द्वारा, कट्टरपंथी मुस्लिम वर्ग के द्वारा भविष्य में उसकी याद में उस स्थान पर आलीशान मकबरा, मजार या मस्जिद बनाई जा सकती थी। इन्हीं बातों को ध्यान में रख अमेरिका ने उसे समुद्र में डुबा दिया। इस बात से कांग्रेस पार्टी के वरिष्ठ नेता दिग्विजय अथाह दुख पहुंचा है। वे उस बात को भूल बैठे हैं कि आतंक का कोई धर्म या मजहब नहीं होता। फिर ओसामा बिन लादेन का क्योंकर मुस्लिम विधि से अंतिम संस्कार किया जाए। दुनिया के सबसे बड़े आतंकी को मुस्लिम धर्म से जोड़कर आखिर दिग्विजय सिंह क्या जताना चाहते हैं? इसके अलावा कुछ मुस्लिम विद्वान भी हैं जो उसके लिए सिर पीट रहे हैं।

वैसे दिग्विजय देर-सबेरे यह बयान भी जारी कर सकते हैं कि अब तो लादेन सुधर गया था, वह धर्म-पुण्य कार्य में जुटा था। उसे अमेरिका ने धोखे से मारा है। उसे प्राश्चित का मौका भी नहीं दिया।

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10 Comments on "सदमें में दिग्विजय सिंह"

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हरपाल सिंह
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हिमवंत बहुत सुन्दर कहा आपने

डॉ. मनोज जैन
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लोकेन्द्र, मुझे चिंता इस बात की है कि राजा साहब के राजा बाबू कहते थे कि संघ और सिमी में कोई फर्क नहीं है . पर क्या अब बो यह कहने कि हिमाकत करेंगे कि कांग्रेस और अलकायदा में कोई फर्क नहीं है.. राहुल जी. दिग्विजय जी. सोनिया जी. ओसामा जी. यार नीचपन कि हद कर दी.

दिवस दिनेश गौड़
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यह दिग्गी बडबोला हो चूका है इसका मानसिक संतुलन पूरी तरह से खो चूका है| अब तो इसने लादेन को “ओसामा जी” का संबोधन तक दे डाला है| क्या करे यह सेक्युलरिज्म भी पता नहीं क्या क्या करवाता है…सोनिया जी का फरमान आया होगा इसलिए ओसामा जी का संबोधन लादेन ने पाया होगा…

Himant
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अनवर भाई का निरुपण विचारणीय है. चर्च-हित चाहने वाली कांग्रेस की रुचि सिर्फ हिन्दु और मुसल्मानो को लडाने मे है.

अखिल कुमार (शोधार्थी)
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ओसामा के साथ ऐसे आतंकियों के शुभेच्छुओं का भी अमेरिका को संहार करना चाहिए.

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