लेखक परिचय

एल. आर गान्धी

एल. आर गान्धी

अर्से से पत्रकारिता से स्वतंत्र पत्रकार के रूप में जुड़ा रहा हूँ … हिंदी व् पत्रकारिता में स्नातकोत्तर किया है । सरकारी सेवा से अवकाश के बाद अनेक वेबसाईट्स के लिए विभिन्न विषयों पर ब्लॉग लेखन … मुख्यत व्यंग ,राजनीतिक ,समाजिक , धार्मिक व् पौराणिक . बेबाक ! … जो है सो है … सत्य -तथ्य से इतर कुछ भी नहीं .... अंतर्मन की आवाज़ को निर्भीक अभिव्यक्ति सत्य पर निजी विचारों और पारम्परिक सामाजिक कुंठाओं के लिए कोई स्थान नहीं .... उस सुदूर आकाश में उड़ रहे … बाज़ … की मानिंद जो एक निश्चित ऊंचाई पर बिना पंख हिलाए … उस बुलंदी पर है …स्थितप्रज्ञ … उतिष्ठकौन्तेय

Posted On by &filed under विविधा.


-एल.आर. गान्धी-
Digvijay-Rahul

राज कुमार ४२ सावन चूक गए मगर अभी तक ‘कुंवारे’ हैं… मगर गुरु देव को मुश्किल से विधुर हुए अभी एक बरस गुज़रा कि दूसरी ‘मस्तुरात’ ढूंढ़ भी ली। और वह भी अपने से २५ बरस छोटी… ४२ वर्षीय टीवी एंकर अमृता राय दिग्गी मियां के साथ एक अर्से से उ ला ला हैं, मगर चुपके चुपके। जब एक पत्रकार ने दिग्गी मियां से उनके ‘दिलदार’ के बारे में पूछा तो मियां बिफर पड़े और इज़्ज़त हतक के दावे की चुनौती दे डाली… मगर दूसरे ही दिन पलट गए और छाती ठोककर अपने और अमृता के सम्बद्ध कबूल लिए… दिग्गी मियां के दोगले पन पर ‘भौजाई’ ने ट्वीट कर आश्चर्य व्यक्त किया … भाई लक्ष्मण सिंह से उसकी शादी का दिग्गी मियां ने महज़ इस लिए घोर विरोध किया कि वह भाई से १३ साल छोटी थी और राजपूत बिरादरी से नहीं थी… दिग्गी मियां के एक पुत्र और ४ पुत्रियां हैं… नई ‘मां’ मियां की बड़ी बेटी से भी छोटी है और दादू की दूसरी वेडिंग में पौत्र और पौत्रिया भी शरीक होंगीं ?

एक यक्ष प्रशन दिग्गी के दल के दिग्गज़ों और ‘वाक गुदम’ दिग्गी मियां के हर वाक पर तालियां पीटने वाले कांग्रेसियों को खूब सता रहा है… वह प्रश्न है कि दिग्गी मियां अब अमृता जी के साथ ‘सात फेरे लेंगे कि चर्च वेडिंग करेंगे, या फिर ‘निकाह’ करेंगे… प्रश्न जायज़ भी है और दुरुस्त भी, क्योंकि मियां पैदा तो राजपूत हिन्दू परिवार में हुए और राज भक्ति के चलते ‘ईसाई’ हो गए और अपने दल व राज परिवार की मानसिकता के चलते इस्लाम प्रस्त ‘ओसामा जी’ हो गए।

गुरु देव ने लगता है अपने इकलौते चेले को ‘वाक गुदम’ के सिवा कोई गुर नहीं सिखाया… जिस प्रकार दिग्गी मियां जब भी मुंह खोलते हैं तो उल्टे
टंगे जीव की भांति वाक गुदम ही करते हैं और उसी की भांति न पक्षियों की श्रेणी में आते हैं और न ही पशुओं की… गुरु की दूजी शादी में कुंवारा
चेला नाचेगा।

Leave a Reply

3 Comments on "गुरु दोबारा… चेला कुंवारा"

Notify of
avatar
Sort by:   newest | oldest | most voted
mahendra gupta
Guest

वाह , गुरु सारे गुर चेले को कभी नहीं देता अब चेला समझदार होगा जरूर क़दमों पर चलेगा , पर लगता नहीं फिसड्डी चेले में कुछ ऐसा करने का दम है

शिवेंद्र मोहन सिंह
Guest
शिवेंद्र मोहन सिंह
हा हा हा , आपने मुझे फिर से गूगल सर्च पर जाने पर मजबूर कर दिया है इन दोनों शब्दों का अर्थ खोजने के लिए। “मस्तुरात” , “वाक गुदम” . दिग्गी राजा के “लव कांड” से मेरे जेहन में २ बातें आई – १- दामाद जी पर धड़ाधड़ आरोप प्रत्यारोप का दौर चालू था। दामाद जी इनमें घिरते जा रहे थे, कि अचानक दिग्गी राजा का किस्सा ए प्यार को उछाल दिया गया। दामाद जी किनारे हो गए और दिग्गी राजा सारी सुर्खियां बटोर ले गए। कहीं ये दामाद जी तो बचाने के लिए तो दिग्गी राजा जी बलि तो… Read more »
bhojraj madne
Guest

bilkul thik likha hai shivendra mohan singh ji ne

wpDiscuz