लेखक परिचय

संजीव कुमार सिन्‍हा

संजीव कुमार सिन्‍हा

2 जनवरी, 1978 को पुपरी, बिहार में जन्म। दिल्ली विश्वविद्यालय से स्नातक कला और गुरू जंभेश्वर विश्वविद्यालय से जनसंचार में स्नातकोत्तर की डिग्रियां हासिल कीं। दर्जन भर पुस्तकों का संपादन। राजनीतिक और सामाजिक मुद्दों पर नियमित लेखन। पेंटिंग का शौक। छात्र आंदोलन में एक दशक तक सक्रिय। जनांदोलनों में बराबर भागीदारी। मोबाइल न. 9868964804 संप्रति: संपादक, प्रवक्‍ता डॉट कॉम

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जबसे केंद्र में कांग्रेस-नीत संप्रग सरकार सत्तासीन हुई है महंगाई लगातार बेलगाम होती जा रही है। कीमत थमने का नाम ही नहीं ले रही है। जीवनावश्‍यक वस्‍तुओं की कीमतों ने सभी रिकार्ड तोड़ते हुए गरीबों की कमर भी तोड दी है। आम आदमी का जीना दूभर हो गया है। उसके सामने दो वक्त की रोटी जुटाने तक का संकट खड़ा हो गया है। दाल-रोटी को तो गरीब से गरीब आदमी का भोजन समझा जाता था परन्तु अब तो दाल-रोटी के लिए भी आम आदमी तरस रहा है। संप्रग सरकार गरीबों के मुंह से निवाला तक छिनने पर आमादा है।

गौरतलब है कि खाने पीने की चीजों की महंगाई दर बढ़कर सत्रह परसेंट के करीब पहुंच गई है। 12 जून को खत्म हफ्ते में खाने-पीने की महंगाई दर करीब पौने एक परसेंट बढ़ गई है। महंगाई दर में ये बढ़ोतरी दालों, सब्जियों और दूध के दाम बढ़ने की वजह से आई है। सब्जियां करीब आठ परसेंट महंगी हुई है। जबकि दालों के दाम दो परसेंट तक बढ़े हैं। खाने पीने की चीजें महंगी होने की वजह से ही मई में महंगाई दर सवा दस परसेंट को पार कर गई है।

अजीब विडंबना है कि जहां एक ओर लोगों के पास खाने की कमी है और दूसरी ओर लाखों टन खाद्यान्न गोदामों में सड़ रहा है। क्‍या कांग्रेस वास्‍तव में आम आदमी की सरकार है; नहीं, यह सरकार सिर्फ कुछ खास लोगों के लिए काम कर रही है। जहां आम आदमी का जीना मुहाल हो गया है वहीं कांग्रेस अध्‍यक्ष श्रीमती सोनिया गांधी और ‘युवराज’ श्री राहुल गांधी इस विषय पर अटूट चुप्पी साधे बैठे हैं। वित्त मंत्री प्रणव मुखर्जी बार-बार दावा कर रहे हैं कि महंगाई जल्द ही दूर होगी। कृषि मंत्री कहते हैं कि महंगाई पर काबू करना उनके हाथ में नहीं है। वह कहते हैं कि फसल का मामला राज्य सरकारों के हाथ में है। ऐसा क्‍यों होता है कि कांग्रेस जब-जब सत्ता में आती है महंगाई बेलगाम हो जाती है। जबकि मोरारजी भाई के नेतृत्‍वाली जनता पार्टी और अटलजी के नेतृत्‍व वाली एनडीए के शासन में सभी आवश्यक वस्तुएं की कीमतें नियंत्रण में रहीं।

महंगाई बढने का सिर्फ एक कारण है कि संप्रग शासन में मुनाफाखोरी और जमाखोरी अपने चरम पर है। आपका क्‍या कहना  है ?

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33 Comments on "परिचर्चा : आम आदमी आज दाल-रोटी तक के लिए मोहताज"

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जितेन्द्र कुमार यादव
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जितेन्द्र कुमार यादव

जब तक वदेशी महिला के हाथ में देश रही तब तक देश के यही हाल रही।

Dilip sikarwar
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मह्गाइ मारे जा रहो है. मै तो कहत हु कि सरकर के नुमैन्दे जन्रल बोगि मे सफर करेन. गेस के लिये लैएन मे खदे र्हे रहे तो उनकि अकल थीक हो जयेगी

sa
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pagal

swamisamvitchaitanya
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आम आदमी जो अपने जीवन के प्रति अनभिज्ञ है वह हमेशा ही मोहताज रहेगा उसके लिए राजनीती नहीं रोटी की जरुरत होती जहा से जितनी भी उपलभध हो जाये उसी से चले परिवतन धीरे धीरे होता है

Dr. Danda Lakhnavi
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दोहों के आगे दोहे
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मारा गया किसान फिर, पीटा गया मंजूर।
जल-डीजल दोनों हुए, आम-जनों से दूर॥

शासन-सत्ता का यही, जनता को वरदान।
मंहगाई कोल्हू बनी, आम आदमी घान॥

स्वप्न दिखाए स्वर्ग के, दिया नर्क में ठेल।
मंहगाई की मार के, क्या सरकारी खेल?

अमरीका – ईराक का, हुआ कभी था युद्ध।
उसके काले असर से, जग विकास अवरुद्ध॥

प्रेम
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महंगाई का प्रश्न क्योंकि भारत की अभाव ग्रस्त अर्थ व्यवस्था में सदैव अविरत है, पिछले वर्ष जून २५ को प्राकाशित इस लेख के विषय में मुझे कूदने में कोई संकोच नहीं| संक्षेप में इसका दोष थोडा थोडा कर हम सभी भारतीयों पर है| कहा जाता है कि पंजाब में जालंधर में स्थित मेरा छोटा सा गाँव जहां बचपन में घर की छत पर खड़े मैं चारों ओर दूर क्षितिज तक खेत खलिहान के अतिरिक्त कुछ और नहीं देख पाता था किसी पठान के नाम पर आधारित है| पठान वहां कैसे पहुंचा? इतिहास बताता है कि उत्तर की ओर से आये… Read more »
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