लेखक परिचय

प्रवक्‍ता ब्यूरो

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डॉ. विनायक सेन पूरी दुनिया में चर्चा का विषय बन गए हैं। गौरतलब है कि पीपुल्स यूनियन फॉर सिविल लिबर्टीज (पीयूसीएल) नेता और मानवाधिकार कार्यकर्ता डॉ. सेन को रायपुर जिला एवं सेशन न्‍यायालय के न्‍यायाधीश बीपी वर्मा ने 24 दिसंबर को देशद्रोह और साजिश रचने का दोषी करार दिया। न्‍यायालय ने डा. सेन के साथ ही प्रतिबंधित संगठन भाकपा (माओवादी) पोलित ब्‍यूरो के सदस्‍य नारायण सान्याल व पीजूष गुहा को उम्रकैद की सजा सुनाई। तीनों पर यह आरोप सिद्ध हुआ कि उन्होंने राज्य के खिलाफ षड्यंत्र किया था। आईपीसी की धारा 124 ए के तहत राज्य के खिलाफ षड्यंत्र करने का आरोप लगा। छत्तीसगढ़ जन सुरक्षा अधिनियम की धारा 1, 2, 3 व 5 के तहत डा. सेन को दोषी करार दिया गया। राज्य के खिलाफ गतिविधियों के तहत धारा 39-2 के तहत भी उन्हें दोषी करार दिया गया।

डॉ. विनायक सेन के विरोध में

• न्‍यायाधीश बीपी वर्मा ने डॉ. सेन को देश के खिलाफ युद्ध छे़डने, लोगों को भ़डकाने और प्रतिबंधित माओवादी संगठन के लिए काम करने को दोषी करार दिया। उन्‍होंने अपने फैसले में लिखा कि आरोपी नक्सलियों के शहरी नेटवर्क को बढ़ावा देकर शहरों में हिंसक वारदात करवाना चाहते थे।

• फैसले में इस बात का उल्लेख किया गया है कि नारायण सान्याल नक्सली माओवादियों की सबसे बड़ी संस्था पोलित ब्यूरो का सदस्य है, वह बिनायक सेन व पीजूष गुहा के माध्यम से जेल में रहकर ही शहरी क्षेत्रों में हिंसक वारदातों को अंजाम देने की कोशिश में था। पुलिस को जब यह पता चला तो सबसे पहले शहर में बाहर से आने वाले संदिग्ध व्यक्तियों के बारे में होटल, लाज, धर्मशाला व ढाबों पर दबिश दी गई। दबिश के कारण ही पीजूष गुहा पुलिस के हत्थे चढ़ा।

• यह भी पाया गया है कि बिनायक सेन नारायण सान्याल के पत्र पीजूष गुहा को गोपनीय कोड के माध्यम से प्रेषित किया करता था। तीनों अभियुक्तों की मंशा नक्सलियों के खिलाफ चल रहे आंदोलन सलवा जुड़ूम को समाप्त करने की भी थी।

• डा. बिनायक सेन के मकान की तलाशी में नारायण सान्याल का लिखा पत्र, सेंट्रल जेल बिलासपुर में बंद नक्सली कमांडर मदन बरकड़े का डा. सेन को कामरेड के नाम से संबोधित किया पत्र व 8 सीडी जिसमें सलवा जुडूम की क्लीपिंग व नारायणपुर के गांवों में डा. सेन के द्वारा गांव वासियों व महिलाओं के मध्य बातचीत के अंश मिले हैं।

• डॉ. सेन ने 17 महीनों के दौरान माओवादी नेता सान्याल से 33 मुलाकातें कीं।

पक्ष में

• डॉक्टर विनायक सेन ने आदिवासी बहुल इलाके छत्तीसगढ़ के लोगों के बीच काम करने की शुरुआत स्वर्गीय शंकर गुहा नियोगी के साथ की थी। पेशे से बाल चिकित्सक सेन ने वहां मजदूरों के लिए बनाए शहीद अस्पताल में लोगों का इलाज करना शुरू कर दिया। साथ ही छत्तीसगढ़ के विभिन्न इलाकों में सस्ते इलाज के लिए योजनाएं बनाने की भी उन्होंने शुरुआत की।

• पीयूसीएल के उपाध्यक्ष के तौर पर उन्होंने छत्तीसगढ़ में भूख से मौतों और कुपोषण का सवाल उठाया। उनका सबसे बड़ा अपराध सरकार की निगाहों में यह माना गया कि उन्होंने सलवा जुडुम को आदिवासियों के खिलाफ बताया था। राज्य की भाजपा सरकार द्वारा चलाए गए इस आंदोलन पर सुप्रीम कोर्ट ने भी सवाल खड़े किए थे। भाजपा ने जब 2005 में छत्तीसगढ़ विशेष जन सुरक्षा अधिनियम लागू किया तो विनायक सेन ने इसका कड़ा विरोध किया था। और इसी कानून के तहत सेन को छत्तीसगढ़ सरकार ने 2007 में गिरफ्तार किया।

• एक डाक्टर एवं एक मानवाधिकार कार्यकर्ता के रूप में समाज के दबे-कुचले लोगों के अधिकारों की रक्षा के लिए काम किया।

• सेन कभी हिंसा में शामिल नहीं रहे या किसी को हिंसा के लिए नहीं उकसाया।

• देशद्रोह का अपराध तभी साबित होता है, जब राज्य के खिलाफ बगावत फैलाने का असर सीधे तौर पर हिंसा और कानून-व्यवस्था के गंभीर उल्लंघन के रूप में सामने आए।

• इससे कम कुछ भी किया गया या कहा गया, देशद्रोह नहीं माना जा सकता। सेशन कोर्ट के फैसले में डॉ. सेन को लेकर यह तय नहीं हो पाया कि उन्होंने आखिर ऐसा क्या किया, जिससे राज्य में हिंसा और कानून-व्यवस्था का खतरा पैदा हो गया।

• डॉ. विनायक सेन के समर्थन में पूरी दुनिया में आवाजें उठ रही है। मानव अधिकार संगठन एमनेस्टी इंटरनेशनल ने डॉ. सेन को अपना समर्थन दिया। अमेरिका में उन्‍हें भारी समर्थन मिल रहा है। वहां के भारतीय मूल के मानवाधिकार कार्यकर्ताओं ने प्रदर्शन किया। भारत में भी वाम झुकाव वाले बुद्धिजीवी उनके पक्ष में सड़कों पर उतर रहे हैं। हालांकि देश की दो प्रमुख राष्‍ट्रीय पार्टियां कांग्रेस और भाजपा इस मुद्दे पर चुप्‍पी साधी हुई है।

रायपुर जिला एवं सेशन न्‍यायालय द्वारा डॉ. विनायक सेन को प्रतिबंधित माओवादी संगठन के लिए काम करने के आधार पर उन्‍हें देशद्रोह व साजिश रचने के आरोप में उम्रकैद की सजा सुनाए जाने पर आप क्‍या कहेंगे ? इस बार ‘प्रवक्‍ता डॉट कॉम’ के परिचर्चा का विषय यही है कि ‘क्या विनायक सेन देशद्रोही हैं?’

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44 Comments on "परिचर्चा : क्या डॉ. विनायक सेन देशद्रोही हैं?"

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आर. सिंह
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निचली अदालत ने सजा दी है.अतः यह अंतिम नहीं है.हमलोग अपना फैसला सुनाने के पहले उच्च न्यायालय और उच्चतम न्यायालय का भी फैसला सुन ले.फिर टिपण्णी करना ज्यादा अच्छा रहेगा.ऐसे विनायक सेन का गरीबों की सेवा करना कोई अपराध नहीं है,पर अगर इसकी आड़ में वे कुछ और कर रहे थे तो वह अपराध हो सकता है.पर इंतज़ार तो कर लिया जाये. देखे उच्च न्यायालयऔर उच्चतम न्यायालय क्या फैसला देते हैं?

डॉ. राजेश कपूर
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सुरेश जी ने विषय को सही दृष्टी से देखा है.ये दोहरे मापदंड बतला रहे हैं की इस मुद्दे को उछालने के पीछे भी कोई शरारती सोच छुपी है. ये समझने की आदत तो डालनी पड़ेगी.

Nand Kashyap
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देश के मेहनतकश लोगो के हिस्से को अपने निजी हित साधने वाले भ्रष्ट लोगों को आज तक किस अदालत ने सजा दिया है .इन्ही भ्रष्ट लोगों के कारन देश में भीषण गरीबी है उनके लिए छोटी सी भी आवाज़ उठाने वाला देशद्रोही नहीं है हाँ वह परजीवी सत्ताधारी वर्ग का दुश्मन नंबर एक होगा और उसे कोई भी सजा हो सकती है ,इसलिए विनायक सेन को हुयी सजा से आश्चर्य नहीं हुआ परन्तु विनायक सेन देशद्रोही नहीं हैं

A.K.SHARMA
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इस तथ्य में कोई संदेह नहीं है कि माओवादी देश द्रोही तत्व हैं जो हिंसा के मार्ग पर चलते हुए न केवल निर्दोष लोगों की हत्या करते हैं अपितु बड़े कठिन परिश्रम से बनी राष्ट्रिय सम्पति को नष्ट भी करते हैं.इस लिहाज़ से जो,कोई भी प्रत्यक्ष अथवा परोक्ष रूप से उन का समर्थन करे गा तो वोह भी देशद्रोही ही माना जाएगा इस लिए बिनायक सेन भी देशद्रोही ही हैं..इसी लिहाज़ से जो तथाकथित ‘बुद्धिजीवी’ अथवा स्वयंभू मानवाधिकारों के ‘रक्षक’ बिनायक सेन के समर्थन में चिल्ला चिल्ली कर रहे हैं वो भी देशद्रोही ही माने जाने चाहिए. और दुनिया भर… Read more »
sadhak ummedsingh baid
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sadhak ummedsingh baid

क्या सरकार ही desh है? बाहर बस विद्रोही?
इन परिभाषाओं ने किया, हमको भी विद्रोही.
हम भी हैं विद्रोही, जेल में हमें बिठा दो.
मुफ्त मिलेगा भोजन, महंगाई से बचा लो.
कह साधक किस-किस को कहोगे अब विद्रोही?
desh भक्त केवल वे, चला रहे सरकार ही.

कैसे हम कह दें भला डाक्टर सेन की बात?
कैसी उनकी सोच है, क्या हैं उनके kaam?

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