लेखक परिचय

जयराम 'विप्लव'

जयराम 'विप्लव'

स्वतंत्र उड़ने की चाह, परिवर्तन जीवन का सार, आत्मविश्वास से जीत.... पत्रकारिता पेशा नहीं धर्म है जिनका. यहाँ आने का मकसद केवल सच को कहना, सच चाहे कितना कड़वा क्यूँ न हो ? फिलवक्त, अध्ययन, लेखन और आन्दोलन का कार्य कर रहे हैं ......... http://www.janokti.com/

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मृतकों का पश्चात्ताप , दे रहा जिन्दों को दस्तक

दिल्ली हुई नेतृत्व विहीन , झुका राष्ट्र का मस्तक.

है पड़ोसी मुल्क से आ रही ड्रैगन की फुंफकार

कहाँ गये वो रक्षक अपने , क्यों गिरी उनकी तलवार ?

ड्रैगन की फुंफकार तो फ़िर भी कुछ हद तक जायज है

पर बांग्लादेश भी चिल्लाता , जो खुद औलाद नाजायज है !

सबका कारण एक ,नहीं है रीढ़ की हड्डी

वरना भारत नहीं किसी से कभी फिसड्डी .

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1 Comment on "नहीं है रीढ़ की हड्डी"

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बी एन गोयल
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सीधी चोट करती हुई स्पष्टोक्ति है. साधुवाद

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