लेखक परिचय

विमलेश बंसल 'आर्या'

विमलेश बंसल 'आर्या'

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-विमलेश बंसल ‘आर्या’

यदि चाहो कल्याण विश्व का,

योग करो सब योग करो|

यदि चाहो नित खुशियाँ पाना||

योग करो भई योग करो||

योग ही सत है , योग ही ऋत है, योग ही रस, अमृत, मधु, घृत है |

योग प्रेम है, योग क्षेम है, योग ही संबल प्रभु श्रुति पथ है॥

यदि चाहो तन स्वस्थ बनाना||

योग करो……..

योग है ऊर्जा, योग स्फूर्ति, योग ही मोद, प्रमोद, विनोद है |

योग ही धर्म है ,योग ही मर्म है, योग ही तप, स्वाध्याय, सुकर्म है |

यदि चाहो मन स्वस्थ बनाना||

योग करो……..

योग दे सम्मति ,योग दे सम्पति, योग ही दूर करे दुःख दुर्मति |

योग है शिक्षा, योग है दीक्षा, योग है दर्शन कला पद्धति।

यदि चाहो सुख – वैभव पाना ||

योग करो……..

पतंजलि ने योग दिया था, श्रीकृष्ण ने योग किया था|

योगी बनकर ऋषि मुनियों ने, ईश्वर का साक्षात् किया था|

यदि चाहो प्रभु दर्शन पाना||

योग करो……..

जो करते हैं योग नित्य प्रति, खुशियों से भर जाते हैं |

छोड़ पाप, दुर्व्यसन व दुर्गुण ,जीवन विमल बनाते हैं |

यदि चाहो मोक्षानंद पाना||

योग करो……..

योग दिवस की शुभ कामनाएँ, योग दिवस की लाख बधाई|

संकल्पित हों योग दिवस पर, नित प्रति योग करेंगे भाई|

यदि चाहो जग आर्य बनाना ||

21 जून को सफल बनाना||

योग करो……..

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