लेखक परिचय

हिमकर श्‍याम

हिमकर श्‍याम

वाणिज्य एवं पत्रकारिता में स्नातक। प्रभात खबर और दैनिक जागरण में उपसंपादक के रूप में काम। विभिन्न विधाओं में लेख वगैरह प्रकाशित। कुछ वर्षों से कैंसर से जंग। फिलहाल इलाज के साथ-साथ स्वतंत्र रूप से रचना कर्म। मैथिली का पहला ई पेपर समाद से संबद्ध भी।

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चाक घुमा कर हाथ से, गढ़े रूप आकार।

समय चक्र ऐसा घुमा, हुआ बहुत लाचार।।

 

चीनी झालर से हुआ, चौपट कारोबार।

मिट्टी के दीये लिए, बैठा रहा कुम्हार।।

 

माटी को मत भूल तू, माटी के इंसान।

माटी का दीपक बने, दीप पर्व की शान।।

 

कोई मालामाल है, कोई है कंगाल।

दरिद्रता का नाश हो, मिटे भेद विकराल।।

 

चकाचौंध में खो गयी, घनी अमावस रात।

दीप तले छुप कर करे, अँधियारा आघात।।

 

दीपों का त्यौहार यह, लाए शुभ सन्देश।

कटे तिमिर का जाल अब, जगमग हो परिवेश।।

 

ज्योति पर्व के दिन मिले, कुछ ऐसा वरदान।

ख़ुशियाँ बरसे हर तरफ़, सबका हो कल्याण।।

earthen

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2 Comments on "दिवाली पर दोहे – हिमकर श्याम"

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हिमकर श्‍याम
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हिमकर श्याम

हार्दिक आभार!!

मनमोहन आर्य
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कविता की पंक्तिया प्रभावशाली हैं। लेखक महोदय को धन्यवाद।

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