लेखक परिचय

कुमार सुशांत

कुमार सुशांत

भागलपुर, बिहार से शिक्षा-दीक्षा, दिल्ली में MASSCO MEDIA INSTITUTE से जर्नलिज्म, CNEB न्यूज़ चैनल में बतौर पत्रकार करियर की शुरुआत, बाद में चौथी दुनिया (दिल्ली), कैनविज टाइम्स, श्री टाइम्स के उत्तर प्रदेश संस्करण में कार्य का अनुभव हासिल किया। वर्तमान में सिटी टाइम्स (दैनिक) के दिल्ली एडिशन में स्थानीय संपादक हैं और प्रवक्ता.कॉम में सलाहकार-सम्पादक हैं.

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1991 में टेलिविजन में नया अध्याय आया जब डच सीरीज ‘न्यूमर 28’ आया, जो धीरे-धीरे सुर्खियों में रहा। प्रचलित हुआ। इसे नाम दिया गया वर्ल्ड रिएलिटी टेलिविजन शो। एक्सपेरिमेंट होने लगे। वर्ष 2000 आते-आते आइडल्स, बिग ब्रदर जैसे कई रिएलिटी टेलिविजन शो दर्शकों के बीच थे। भारत में भी इसका अनुसरण शुरू हुआ। हमारे देश में प्रयोग होने लगे तो क्रिएटिव डायरेक्टर्स, प्रोड्यूसर्स और रिएलिटी प्रोड्यूसर्स ने मिलकर ऐसी क्रिएटिविटी कर डाली कि नमक-मिर्च के साथ मसाले भी परोसे जाने लगे। होड़ मचने लगी टीआरपी की। चूंकि भारत में जैसे ही इंडियन आयडल आया कि कई सारे रिएलिटी शोज- सारेगामापा, सुर संग्राम… डांस पर आधारित अलग, कॉमेडी पर आधारित अलग… ढेरों आने लगे।

टीआरपी के चक्कर में ऐसे प्रयोग होने लगे कि कहीं जजों को आपस में लड़ाकर सुर्खियां बटोरी जाने लगीं, तो कहीं भावनात्मक खेल की स्क्रिप्ट तैयार कर। पर्दे के पीछे हर एक कंटेसटेंट की कुंडली निकाली गई और उस पर स्क्रिप्ट तैयार हुआ। उसे रुलाया गया… यही नहीं, भावनात्मक तौर पर जिस हद तक टीआरपी के लिए ले जाना था, ले जाया गया। लेकिन टेलिविजन के पुरोधाओं ने एक बात पर ज़रा भी गौर नहीं किया कि जिस किसी के काम या प्रोफेशन को लेकर उनके या उनके बच्चों का भावनात्मक स्क्रिप्ट तैयार करवा रहे हैं, इससे उसी प्रोफेशन से जुड़े हिन्दुस्तान में लाखों लोगों पर क्या असर पड़ेगा। किसी मोची का बेटा पहुंचता है किसी रिएलिटी शो में तो ऐसी स्टोरी मिलते ही प्रोड्यूसर और डायरेक्टर की बाहें फुल जाती हैं। उसका प्लॉट तैयार होता है। वह पर्दे पर आता है और रोते हुए कहता है कि मेरे पिताजी मोची का काम करता है और फूटकर रोता है… शो में उसके पिताजी को भी लाकर रुलायाजाता है। सवाल है कि करोड़ों लोग जिस शो को देख रहे हैं, उनके से जो मोची का काम करता है, वह या उसका परिवार क्या अपने प्रोफेशन पर लज्जित नहीं हो रहा है होता है ? यह सवाल उन रिएलिटी शो के महारथियों से है, जो टीआरपी के चक्कर में रिएलिटी शो में रिएलिटी नाम का कुछ छोड़े ही नहीं हैं। प्रोफेशन और आजीविक चलाने का साधन तो कुछ भी हो सकता है। काम कोई छोटा या बड़ा नहीं होता, लेकिन किसी को इस तरह प्रस्तुत करके उस आजीविका से जुड़े लाखों लोगों और उसके परिवार केसामने उसके लज्जित करना उस सोच पर दाग है, जिसपर प्रोड्यूसर्स और क्रिएटिल डायरेक्टर्स इतराते हैं।

हालांकि देशवासियों को अब इनकी असलियत भी पता होने लगी है। इसलिए तो टीआरपी के चक्कर में रिएलिटी शो में होने वाली रोने-धोने की नौटंकी से अब लोग बोर हो गए हैं, इसलिए आने वाले सिंगिग रिएलिटी शो ‘द वाइस ऑफ इंडिया किड्स’ को इस नौटंकी से दूर रखा गया है। खुद इस बारे में शो के लॉन्च पर जज बने मशहूर सिंगर शेखर का कहना है कि इस शो में दर्शकों को सिर्फ टैलेंट देखने को मिलेगा कोई नौटंकी नहीं।

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