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प्रवक्‍ता ब्यूरो

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soniyaनई दिल्ली। खबर है कि प्रेस क्लब से हटाये जाने के बाद पुष्पेद्र ने बड़ी चतुराई से सोनिया गाँधी से संपर्क करा है और एक चाल के तहत क्लब के सम्मानीय सदस्य सूची में अब सोनिया गाँधी का नाम जोड़ा जा रहा है ताकि ढेरों अनियमितताओं को चतुराई से ढका जा सके।

गौरतलब है कि तीन वर्षो से सचिव पद पर काबिज पुष्पेन्द्र पर आये दिन प्रेस क्लब के संविधान का निरंतर खुलकर के उल्लंघन करने के आरोप लगने लगे थे। तब पुष्पेन्द्रके तानाशाही रवैये की आलोचना क्लब में आम बात बन गयी थी। पत्रकारो का अपमान ओैर कार्यकारणी के साथियों की सलाह का अनादर पुष्पेन्द्र की कार्यशैली का अंग था। चुनी हुई वर्तमान कार्यकरणी की समिति के कई सदस्यों ने साथी पत्रकारों से इस बाबत नियमित चर्चा की। क्लब के संविधान के अनुसार चुनाव में चुने हुऐ सचिव को हटाने का अधिाकार केवल मात्र सदस्यों की आम बैठक में प्रस्ताव पारित करके ही हो सकता है।

मैनेजमेंट कमेटी की सलाह करे बिना ही केवल अपनी मर्जी से योग्य अयोग्य, पात्र कुपात्र, पत्रकार गैरपत्रकार को पुष्पेन्द्र सदस्य बनाये जा रहा था। आखिरकार हस्ताक्षर अभियान चला कर जीबीएम बुलाई गयी। पुष्पेन्द्र द्वारा इस बैठक को रोकने का प्रयास किये जाने का अंदेशा था, सो सूझबूझ दिखलाते हुऐ केविएट पहले ही डाल दी गयी। इसलिए जब पुष्पेन्द्र स्थगन आदेश के लिए न्यायालय गया तो उसे खाली हाथ लौटना पड़ा। वरिष्ठ पत्रकारो से खचाखच भरी आम बैठक में कोषाधयक्ष नदीम ने पुष्पेन्द्र की वित्तीय अनियमितताओं का पिटारा खोला।

क्लब के संविधान में प्रदत तय सीमा से ज्यादा धानराशि का कच्चे बिलों पर नियमित भुगतान पुष्पेन्द्र का नियमित कार्य रहा। इसके अलावा और भी कई भुगतान उसने अपनी मनमर्जी से किये।

सबसे बड़ी अचम्भे की बात थी कि कार्यकारणी से पूछे बगैर और कोषाधयक्ष को इत्ताला दिये बिना बैंक में प्रेस क्लब का दूसरा खाता खुलवा लिया।

आमबैठक में गहन विचार विमर्श और वादविवाद के बाद उपस्थित सदस्यों ने एकमत हो कर यह तय हुआ कि पुष्पेन्द्र को सचिव पद से अविलम्ब हटा दिया जाय तथा पी. बालाचन्द्रन को संयोजक नियुक्त करते हुऐ छ: सदस्यीय अतिंरिम कमेटी को चार्ज दे दिया जाय।

पुष्पेन्द्र ने माहोल अपने विरूध्द देख कर सहयोगात्मक रवैये का वादा किया तथा इस्तीफे के साथ 24घंटे में अपने सभी दस्तावेज को जमा करने का आदेश मानने का भरोसा दिया लेकिन मात्र 48घंटे में ही वह पलट गया और अदालत में जाकर जीबीएम को अवैधा घोषित करने की गुहार कर दी। इस बीच बैंक ने सभी खाते जाम कर दिये। नई समिति लेखा कार्य तथा नये सदस्यों के आवेदनों की जाँच कर रही है। कई सरकारी करो के भुगतान में भी क्लब ने नियमों का पालन नहीं किया है। विलम्ब के अलावा कई बार जुर्माना भी भुगतना पड़ा है।

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