लेखक परिचय

विकास कुमार

विकास कुमार

मेरा नाम विकास कुमार है. गाँव-घर में लोग विक्की भी कहते है. मूलत: बिहार से हूँ. बारहवीं तक की पढ़ाई बिहार से करने के बाद दिल्ली में छलाँग लगाया. आरंभ में कुछ दिन पढ़ाया और फिर खूब मन लगाकर पढ़ाई किया. पत्रकार बन गया. आगे की भी पढ़ाई जारी है, बिना किसी ब्रेक के. भावुक हूँ और मेहनती भी. जो मन करता है लिख देता हूँ और जिसमे मन नहीं लगता उसे भी पढ़ना पड़ता है. रिपोर्ट लिखता हूँ. मगर अभी टीवी पर नहीं दिखता हूँ. बहुत उत्सुक हूँ टेलीविज़न पर दिखने को. विश्वास है जल्दी दिखूंगा. अपने बारे में व्यक्ति खुद से बहुत कुछ लिख सकता है, मगर शायद इतना काफ़ी है, मुझे जानने .के लिए! धन्यवाद!

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-विकास कुमार-
film-festival

भारतीय संस्कृति पर वर्तमान समय में हिन्दी फिल्मों का बुरा प्रभाव पढ़ रहा हैं| आजकल आने वाली लगभग सभी फिल्मों में हिन्दी फिल्मों में अश्लीलता, चरित्रहीनता आदि बातो को दर्शाया जा रहा है| जिसका हमारे देश के युवाओं पर बुरा प्रभाव पढ़ रहा है| फ़िल्म निर्माता अपने लाभ के लिये फिल्मो में अश्लीलता का अंगप्रदर्शन करवाते हैं, ताकि उनको अत्यधिक लाभ मिले| ये फिल्म निर्माता लाभ कमाने के लिये किसी भी सीमा को लांघने के लिए तत्पर रहते हैं, चाहे वह बात भारतीय संस्कृति की क्यों न हो| ये भारतीय संस्कृति की मर्यादा का लगातार उल्लंघन कर रहे हैं और हमारी देश की जनता तथा सरकार इस अपमान को आंख मूंदकर सहन कर रही है| वर्तमान समय मे जीतनी भी फिल्मे आ रही है सभी फिल्मों में अश्लीलता, चरित्रहीनता का नंगा नाच हो रहा है जिससे हमारे देश की संस्कृति तथा विशेषकर युवा वर्ग पर इसका बुरा प्रभाव हो रहा है| वर्तमान में हिन्दी फिल्मों में मुख्य अभिनेता, अभिनेत्री के चरित्र को आलसी कामचोर तथा अय्याश की तरह प्रदर्शित किया जा रहा है जबकि पहली फिल्मों में उनके चरित्र को मेहनती, कर्मठ, तथा ईमानदार दिखाया जाता था| आजकल की अभिनेत्रियां लाभ कमाने तथा लोकप्रय होने के लिये अपने अंग प्रदर्शन करके बढ़ा गर्व महसूस करती है और उन्हें यह लगता है की यदि उन्होंने अपना अंग प्रदर्शन नही किया तो वे समाज में लोकप्रिय नहीं हो सकती है| हमारे युवा इन फिल्मो को देख कर उनसे उन सभी बातो को सीख रहे हैं जो उनके जीवन के लिये घातक है और उनकी मानसिकता को कमजोर करती है| जिनसे उनका जीवन अंधकार की और अग्रसर हो रहा है| वहीं दूसरी और महिलायें नारी सुरक्षा की बात करती है तो बताइये नारी सुरक्षा किस प्रकार सम्भव है| इस प्रकार की फिल्मों पर सरकार को कुछ ठोस कदम उठाने चाहिये तथा इस प्रकार की फिल्मो पर रोक लगानी चाहिए| effect of films on indian culture

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1 Comment on "वर्तमान में भारतीय संस्कृति पर हिन्दी फिल्मों का बुरा प्रभाव"

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Dr.Ashok Kumar Tiwari
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Dr.Ashok Kumar Tiwari
केवल हिंदी फिल्मों पर दोष देना उचित नहीं है :———————- हिंदी ही नहीं भारतीय सभ्यता और संस्कृति भी तार-तार हो रही है वहाँ। मानवाधिकारों का खुलेआम उल्लंघन हो रहा है पर सब उनकी जेब में.. November 26, 2012 at 8:11am हिंदी ही नहीं भारतीय सभ्यता और संस्कृति भी तार-तार हो रही है वहाँ। मानवाधिकारों का खुलेआम उल्लंघन हो रहा है पर सब उनकी जेब में.. बात केवल हिंदी की ही नहीं है रिलायंस के के0 डी0 अम्बानी विद्या मंदिर जामनगर ( गुजरात ) में मनोज परमार मैथ टीचर को इतना टार्चर्ड किया गया कि प्रिंसिपल सुंदरम के सामने स्कूल में… Read more »
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