लेखक परिचय

टी के मारवाह

टी के मारवाह

स्वतंत्र वेब लेखक व ब्लॉगर

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टी के मारवाह

यूँ तो ये पूरी दुनिया ही मंडियों से अटी पड़ी हे

सब कुछ बिकाऊ ,पर आज कल एक मंडी पुरी दुनिया मैं आज सबसे ज्यादा चल रही हे और बहुत जोरों और शोरों मैं हे |इस मंडी ने आज हमारा सामाजिक ढांचा ही बदल के रख दिया हे ,दिन बाद मैं शुरू होता हे फेसबुक मंडी अल सुबह से ही अपने योवन पर आ जाती हे ,आइये अब इस तारो ताज़ा मंडी की सैर करते हैं, यहाँ वो सब कुछ हे जो खुदा के पास भी नहीं बस जरुरत हे एक स्मार्ट फ़ोन ,लैपटाप,या फिर दफ्तर का डेस्क टाप जो भी हो बस इंटरनेट से लेस हो और आपकी लाइफ हो गयी झींगा लाला…आप कहीं भी हों घर या दफ्तर या कहीं और काम मैं मसरूफ हों या जाम मैं फंसे ,आपका दोस्त फैस बुक आपकी हर तरह की सेवा को तत्पर हे इस पर दोस्ती करने के लिए आपको १२ साल से शुरू होकर ८० साल तक के युवा और युवतियां (यहाँ फुके हुए अधेड़ों का कोई अलग वर्ग नहीं हे ) आप ८० बरस के होते हुए भी शाहरुख़ का फोटो अपने फोटो की जगह लगाकर अपनी बची खुची जिन्दगी तक बड़े आराम से अनुष्का /कटरीना खेल सकते हैं ,और तो और खुद आपके परिवार के लोगों को भी नहीं पता लगेगा की आप उम्र के इस पड़ाव पर कोनसा आई पी एल खेल रहे हैं ,यही इस फैस बुक की खासियत हे .की एक हाथ को दुसरे हाथ का पता नहीं चलता हे ,जब की खेल बिंदास और धडल्ले से बेखोफ चलता हे ,इस पर आपको दुनिया भर के बेहतरीन अविष्कारों ,बाग़ बगीचों ,हसीन माडलों तपती दोपहर मचलती शामे और लुढ़कती रातें सब मोजूद हे ,ढेरों कवितायेँ ,ढेरों शेर और करोड़ों तुकबन्दियाँ एक क्लिक पर हाज़िर हैं …दिलेरी इतनी की ग़ालिब का शेर भी हर किसी की अपनी फक्ट्री का उत्पाद हो गया हे ,और खुद ग़ालिब भी अपने उस शेर को क्लेम नहीं कर सकता ? अभी हाल मैं एक बड़ा मजेदार किस्सा हुआ दफ्तर मैं अधेड़ उम्र का बॉस अपने लेपटोप पर एक कमसिन से इश्क इश्क खेल रहा था वहीँ उसकी सेक्रेटरी बॉस के सामने ही अपनी टेबल पर रखे डेस्क टास्क पर उस बॉस के जवान लड़के से इश्क फरमा रही थीं …आधुक्निता का इजाफा अपना अपना रूम अपना अपना वाशरूम अपना अपना स्मार्ट फोन और अपने अपने साइज़ का इश्क सब फैस बुक पर चल रहा हे ,अगर आपका जवान लड़का या लड़की वाशरूम मैं समय ज्यादा लगा रहे हों तो फ़िक्र न करें वो अकेले नहीं हैं फैस बुक की छत्र छाया उनके साथ हे ,इस पर सिर्फ दिलवाले ही नहीं अब तो दिलजले भी आ गए हैं जो दिन भर भूखे भेड़िये की तरह फेसबुक पर नज़र गडाए रहते हैं जहाँ अपने मतलब का कोई अच्छा सामान नज़र आया की चाट चाट खेलने शुरू और ”जी ,बेहतर हे ,शुक्रिया ,धन्यवाद का दौर शुरू ,सामनेवाला अगर आपको झेलने के मूड मैं हो तो गाड़ी चल सकेगी कुछ दूर तक …और यदि नहीं तो धीरे से शुक्रिया बोल के आप तुरंत गायब /अद्रश्य हो सकते हैं वहां से …अब तो पुलिस भी कंट्रोल रूम मैं फैस बुक से लेस हो गयी हे ? अच्छे से अच्छे अपराधी माल उड़ाने के बाद माल ढूँढ़ते हुए यहीं पाए जाते हैं और हमारी पुलिस मीना /रीना /शीना बन कर उन्हें बड़ी शान से पिंजरे तक ले आते हैं …आप यहाँ अपने नेताओं को जी भर के कोस सकते हैं उसके लिए भी यहाँ कई पेज हैं जहाँ दिन भर आपको क्रांतिकारी उपलब्ध रहते हैं …जरा सा एक शब्द आपके तरकश से निकला नहीं की वहां मोजूद शिकारी झुण्ड के झुण्ड बना कर आप पर टूट पड़ेंगे और हर तरह के शब्दों से आपकी मरम्मत कर आपको मानसिक रूप से लहुलोहान कर देंगे यहाँ हर धरम खास कर दुनिया का सबसे बड़े दो धरम जो हरवक्त ही रहते हैं गरम यानि हिन्दू मुस्लिम इस धरम के हिमायती चोबिसों घंटे शाब्दिक हथियारों से हर दम चाक चोबंद रहते हैं ,एक शब्द का किसी धरम के खिलाफ इस्तेमाल हुआ और बीसियों जवान गिद्ध की तरह टूट पड़ेंगे और तब तक दम नहीं लेंगे जब तक अपना सिस्टम पूरा आफ न करदें …आज कल एक वर्ग और बहुत जोरों से फैस बुक पर आ गया हे धन्देबाज़ जो ”कोई मरे चाहे जिए खुसरा घोल बतासा पिए ” उधर फैस बुक पर राजनितिक मारा मरी चल रही हे ,वहीँ धर्म युद्ध भी चल रहा हे उधर इन सबसे बेखबर दो दिल रूमानियत मैं खोये हुए हैं और ये धन्देबाज दिन भर शिवजी को शहद से निहलवा रहा हे साथ मैं अपना फ़ोन नंबर लेके बैठा दुनिया के हर गम से निजात दिलाने का दावा कर रहा हे यानि जिस वक़्त इसके जनक मार्क जुबेर ने इसकी पारी कल्पना की होगी उस वक़्त खुद उन्होंने भी नहीं सोचा होगा की वो कोनसा भिन्डी का बीज बो रहे हैं …;तो दोस्तों कैसी लगी ये मंडी आपको …

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