लेखक परिचय

परमजीत कौर कलेर

परमजीत कौर कलेर

मैं प्रोडूयसर के तौर पर 4 रीयल न्यूज में काम कर रही हूं । फीचर लिखती हूं । प्रसार भारती दिल्ली के वूमेन सैक्शन के लिए भी लिखती हूं ।आकाशवाणी पटियाला में रिकार्ड हुए प्रोग्राम वेहड़ा शगना दा, तीआं तीज दीआं विभिन्न विषयों पर फीचर लिख सकती हूं। लिखने का है शौक पंजाब के मैगजीन समुदरों पार , चढ़दीकला पटियाला, पटियाला भास्कर, माईल स्टोन मैगजीन में प्रकाशित हुए हैं फीचर

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परमजीत कौर कलेर

हर तरफ फैली हैं खुशियां… ये खुशियां लेकर आई है दीवाली ….अंधकार को मिटाकर दीवाली लाई है रोशनी और प्रकाश …हर घर में छाईं है खुशियों की बहार …हर घर में छाई है रौनक ….बच्चे , जवान ,बुजुर्ग सब हैं इस खुशी में गलतान … आया पर्व है खुशियों का । जगमगाते , झिलमिलाते , दीयों की रात क्या आती है …वो अपने साथ लेकर आती है …ढेर सारी खुशियां…खुशियां हो भी क्यों न …भई ये त्यौहार ही ऐसा है जो सारे अंधकार को तो खत्म करता ही है साथ ही दिलों में फैले अंधेरे कोनो को भी भर देता है प्रकाश से …

दीपावली जिसका नाम सुनते ही हमारे अंधेरे मन के कोनों में मानो रोशनी फैल जाती है …हर एक के चेहरे पर छा जाती है… खुशियों की बहार ।भई रोशनी …प्रकाश का त्यौहार है तो नूर तो फैलेगा ही हर इंसान के चेहरे पर …दीवाली को दीपावाली भी कहते हैं…दीपावली जो कि नाम से ही स्पष्ट है दीपकों की माला …दीयों का माला …यानि कि रोशनी का त्यौहार …इस त्यौहार को मनाने के लिए लोग महीना पहले तैयारियां करनी शुरू कर देते हैं… और रोशनी के इस त्यौहार का करते हैं बड़ी बेसब्री से इंतजार…गांव से शहर नगर से महानगर … का हर हिस्सा रोशनी से नहाया नज़र आता है…बाजार भी दुल्हन की तरह सज जाते हैं …लोग अपने घरों को सजाने के लिए महीना पहले ही तैयारियां शुरू कर देते हैं …पहले क्या होता था कि महीना पहले ही घरों को सजाने को लेकर तैयारियां शुरू हो जाती थी …गांव में कच्चे घरों को लीपा पोता जाता था और पक्के घरों को रंग रोगन करवाया जाता था … हर किसी की ख्वाहिश होती है कि उनका घर ही सबसे खूबसूरत दिखे…भई आखिर लक्ष्मी जी को खुश करने का सवाल जो है…… कहते है लक्ष्मी जी को साफ सफाई बेहद भाती है …और वो उसी घर में प्रवेश करती है …यहां साफ सफाई रहती है… इसलिए हर किसी की चाहत होती है कि उसका घर ही सबसे खूबसूरत दिखे …इसलिए सभी जुट जाते हैं … घरों की सजावट करने में …दुकानदार भी अपनी दुकानों की साफ सफाई करते हैं तभी तो हर कोई दुकानों की खूबसूरती को देखकर खींचा चला आता है…बाजार की ओर …और खरीददारी किए बिना नहीं रह सकते…यही नहीं दीवाली से पहले घरों में ही तरह तरह की मिठाईयां बनाई जाती थी …लेकिन आज के आधुनिक युग में किसी के पास समय नहीं है कि वो मिठाईयों को घर बना सके ,इसलिए इन मिठाईयों को घर में बनाने की बजाए बाजार से खरीद लिया जाता है ।

दीवाली का पावन पर्व क्या शुरू होता है … लोग करते हैं बाजारों का रूख… इस दिन खरीददारी भी खूब होती है …हर एक के चेहरे पर होती है मुस्कराहट …बच्चे , जवान ,बुजुर्ग हर कोई इस त्यौहार को लेकर उत्साहित नज़र आता हैं । बच्चों की खुशी का तो कोई ठिकाना नहीं रहता…बच्चे नए नए कपड़े पहन कर अपने माता पिता के साथ पटाखे खरीदने जाते हैं उनकी खुशी का कोई ठिकाना नहीं रहता …वो अपनी पसंद के गिफ्ट खरीदतते हैं … उन्हें इस बात का भी पता है कि माता पिता उनके साथ है तो उनकी हर ख्वाहिश पूरी होगी … वहीं बच्चों को अपने माता पिता के साथ खरीददारी करके बड़ा मजा आता है…इस दिन एक दूसरे को गिफ्ट भी दिए जाते हैं .. आपसी भाईचारे और सद्भाना के त्यौहार को …मजबूत करने के लिए एक दूसरे को दिए जाते हैं गिफ्ट के साथ साथ मिठाईयां … इन रिश्तों में आपसी भाईचारे के साथ रहे मिठास… इसलिए दी जाती हैं मिठाईयां । मगर अब सभी लोग हो चुके हैं अपने स्वास्थ्य के प्रति सुचेत…और सावधान …मिठाईयों में मिलावट के चलते लोग मिठाईयां खरीदने से परहेज करने लगे हैं … और अब इसकी जगह ले ली है ड्राई फ्रूट ने … यही नहीं वो मिठाईयों की जगह चॉकलेट , टॉफिया और फ्रूट को ही एक दूसरे को आदान प्रदान करने लगे हैं…इन ड्राई फ्रूट और फलों को बाजारों में बड़ी ही खूबसूरती से सजाया जाता है …कि कोई भी इन्हें खरीदें बिना नहीं रह सकता । मन तो सारा बाजार ही खरीदने को करता है…लेकिन हर कोई अपनी जेब को देखकर इस दिन खरीददारी जरूर करता है …

दीपावली जो कि आती है कार्तिक अमावस्या को …ये भारत का सबसे बड़ा त्यौहार है …भारतवासी इस त्यौहार को बड़े ही हर्षोल्लास के साथ मनाते हैं …भारत एक धर्मनिरपेक्ष देश है …इस त्यौहार को मनाने में कोई भी पीछे नहीं रहना चाहता । कार्तिक अमावस्या की काली रात में दीए जलाने की परम्परा भी बड़ी पुरानी है…इस दिन श्री रामचन्द्र जी चौदह सालों का बनवास काट कर और रावन का वध कर अयोध्या वापिस लौटे थे … लोगों ने श्री रामचन्द्र जी के लौटने की खुशी में घी और सरसों के तेल के दिए जलाए थे । उस परम्परा को आज भी हम मनाते हैं और मर्यादा पुरूषोत्तम श्री राम को याद करते हैं … दीपावली के शुभ अवसर पर मंदिरों की खूबसूरती के साथ साथ गुरूव्दारों में भी धार्मिक कार्यक्रम होते हैं और सबके भले के लिए अरदास की जाती है …पंजाब के अमृतसर की दीवाली तो खास महत्व रखती है …हरिमंदिर साहिब में हुई दीपमाला से सरोवर में पड़ रही रोशनी मानो ऐसे लगती है मानो सारा शहर ही रोशनी से नहाया हो…अमृतसर की दीवाली के बारे में तो कहा जाता है…

दाल रोटी घर दी…

दीवाली अमृतसर दी

कहने का मतलब है कि अमृतसर की दीवाली का तो देखने लायक होती है …हरिमंदिर साहिब में हुई दीपमाला सबको अपनी और आकर्षित तो करती ही है वहीं बिना किसी स्वार्थ और आपसी भाईचारे राष्ट्र और समाज की खुशहाली के लिए की जाती है अरदास …सिख समाज में दीवाली का अहम महत्व है …इस दिन सिखों के छठे गुरू हरगोबिन्द साहिब जी 52 हिन्दु राजाओं को ग्वालियर के किले से छुड़वा कर लाए थे…इन राजाओं को मुगल शासक जहांगीर ने बंदी बनाकर ग्वालियर की जेल में बंद कर रखा था…दीवाली वाले दिन ही इन बन्दी हुए राजाओं को गुरू हरगोबिन्द साहिब जी मुक्त करवा कर लाए थे … औऱ फिर गुरू की नगरी अमृतसर में पहुंचे …हरमंदिर साहिब में गुरू के दर्शनों के लिए संगत इक्टठी हो गई …तभी से सिख समाज में दीपावली की खुशियां बंदी छोड़ दिवस के रूप में मनाई जाती है …

दीपकों के त्यौहार… दीवाली को आता देखकर साफ सफाई तो कई दिन पहले शुरू हो जाती है …बारिश और उमस से जो कीट पतंगे पैदा हुए होते हैं …दीवाली को मौके पर साफ सफाई होने से उनका खात्मा हो जाता है …इससे वर्ष भर की सफाई हो जाती है और हर तरफ साफ और स्वच्छ वातावरण दिखाई देता है …चारो और रोशनी ही रोशनी…ये रोशनी करते हैं दिए …पहले दीवाली की रात को सरसों के तेल और घी के दिए जलाए जाते थे…इनकी जगह अब रंग बिरंगी मोमबतियों ने ले ली है ..इन दिए और मोमबतियों की जगह ले ली हैं रंग बिरंगे बल्बों की झालरों ने …रंग बिरंगी जगमगाती इन झालरों को देखकर कोई भी इन्हें खरीदे बिना नहीं रह सकता… आधुनिकता का रंग दीवाली पर भी चढ़ा है …ऐसा नहीं है कि अब दीए और मोमबतियां मिलती नहीं है …जरूर मिलती है बाजार में हर तरह की चीज़ मिलेगी …बस आपको जरा जेब ढीली करनी होगी…आज कल तो दीए भी रंग बिरंगे मिलेगे वो भी न जाने कितने ही डिजाइन में …उसी तरह रंग बिरंगी मोमबतियां के भी न जाने कितने ही डिजाइन मिलेंगे आपको…

दीवाली का त्यौहार चमक, … रोशनी और प्रकाश का तो त्यौहार है ही वहीं हर कोई अपनी खुशी का इजहार करना चाहता है पटाखे चलाकर …इस दिन खूब आतिशबाजी की जाती है…इस दिन लोग हजारों लाखों के पटाखे फूंक देते हैं … इस रात को अगर आपने पटाखे चलाने भी है तो आप शगुन के तौर पर थोड़े बहुत पटाखे चला सकते हैं क्यों न जो पैसे पटाखे चलाने में खर्च करते हैं …उन पैसों से किसी गरीब जरूरतमंद को मिठाईयां या भर पेट खाने को दिया जाए … इससे उन्हें भर पेट खाने को तो मिलेगा ही …वहीं बदले में मिलेंगी बहुत सारी दुआएं…ज्यादा पटाखे चलाने का भी नुकसान होता है और इससे वातावरण होता है प्रदूषित । इस रात को कई लोग जुआ भी खेलते है जो कि बुरी आदत है …यही नहीं दीवाली का जश्न मनाया जाता है शराब कबाबों के साथ…जो बड़ी ही बुरी आदत है…दीवाली की रात को लोग लक्ष्मी की पूजा करतें हैं ..इस दिन घर की लक्ष्मी यानि की औरतें सज संवर कर बड़ों का आशीर्वाद लेकर पूजा करती हैं और सुख समृद्धि की कामना की जाती है …इस दिन घरों के दरवाजें खोल कर रखे जाते हैं …ऐसा माना जाता है कि दीवाली की रात लक्ष्मी आती है वो दरवाजे बंद हुए देखकर कही वापिस न चले जाए …इसके लिए रात को लोग अपने घरों के दरवाजे खुले रखतें हैं…दीपावली का ये पावन पर आपको अंधकार से प्रकाश … अज्ञान से ज्ञान प्रकाश की और ले जाता है … आप के जीवन में ये उजियारा यूं ही बरकरार रहें …यही हमारी तमन्ना है

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