लेखक परिचय

मन ओज सोमक्रिया

मन ओज सोमक्रिया

स्वतंत्र वेब लेखक व ब्लॉगर

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इस वर्ष की सर्दियाँ!?! बाप रे बाप! पानी में हाथ डालो तो हाथ अकड़ कर सुन्न पड़ जाएं। कड़ाके की ठंड में ठिठुरते हुए स्कूल जाते छोटे बच्चों की परेशानी, जो लगभग 10 दिन तक बनी रही, सब ने देखी। किन्तु यदि नहीं देखी तो दिल्ली की शीला सरकार (Sheila Government) ने ही नहीं देखी।

बच्चों के माता-पिता लगभग 10 दिन तक इंतजार करते रहे कि दिल्ली सरकार (Delhi Government) अब स्कूलों की छुट्टी घोषित करेगी या तब करेगी। यहाँ तक कि कईं अभिभावकों ने तो राजमाता के दरबार में हाजिरी देकर गुहार भी लगाई, लेकिन मैडम हैं कि उनके सिर पर जूँ तक नहीं रैंगी। 10 दिन तक ठंड में ठिठुरते मासूम छोटे-छोटे बच्चे मजबूरी में लाचार हालत में स्कूल जाते रहे।

सुबह-सुबह जब सर्दी अपना विकराल रूप धरे रहती है और यहाँ तक कि बच्चों के माता-पिता तक भी इस ठिठुरन में घड़ी का अलार्म सुनने के बाद भी उसे बंद करने के लिए नहीं उठ पाते। ऐसे में उन्हें रोज सुबह उठकर बच्चों को तैयार करना, उनका नाश्ता एवं टिफिन बनाना और फिर उन्हें धुँध की चादर ओढ़े सुनसान पड़ी सड़कों पर स्कूल बस तक छोड़ने जाना पड़ता था। ऐसे में अधिकत्तर लोग सोचने पर मजबूर हो गए कि इतनी ठंड जो न जाने कितने वर्षों के पश्चात दिल्ली में ही नहीं बल्कि संसार के हर कोने में पड़ रही है, इससे कैसे बचा जाए। और अपनी प्रचन्डता के नित नए रिकॉर्ड तोड़ रही इस सर्दी के समय में जब सभी पड़ोसी राज्य तक बच्चों की छुट्टियाँ घोषित कर चुके थे तो दिल्ली सरकार की आखिर ऐसी क्या मजबूरी थी कि वह स्कूलों को कुछ दिनों के लिए बंद नहीं कर रही थी।

पिछले साल जब कि दिल्ली में केवल चार दिन के लिए सामान्य ठंड पड़ी थी तब तो दिल्ली सरकार ने सभी स्कूलों की छुट्टियाँ घोषित करने में बिल्कुल भी देर नहीं की। अरे साहब! वो इसलिए कि… शी!! मगर किसी से कहना नहीं – तब तो चुनाव करीब थे न। वहीं इस साल जबकि पारा सामान्य से भी अधिक नीचे जा चुका है, सरकार को कुछ दिनों के लिए स्कूल बंद करने में आखिर क्या परेशानी हो सकती थी। कहीं इसके पीछे कोई पैसे से संबंधित बात तो नहीं थी?

यह बात है रविवार, 10 जनवरी 2010 की जब दिल्ली नगर पालिका (Municipal Corporation of Delhi- MCD) ने दिन में ही अपने सभी स्कूलों को भीषण ठंड के चलते कुछ दिन तक बंद करने की घोषणा कर दी। सभी न्यूज चैनलों (News Channels) ने भी अपने प्रसारण में दिल्ली नगर पालिका द्वारा प्रशासित सभी स्कूलों को ठंड की वजह से बन्द करने की घोषणा कर दी थी। ये खबर सुन कर लोगों में अचानक खुशी की लहर दौड़ उठी थी… अरे अरे! किन्तु… रुकिए तो सही जनाब! ये घोषणा तो केवल नगर पालिका (MCD) द्वारा चलाए जा रहे स्कूलों के लिए ही है। एक तो पहले ही सनडे – छुट्टी का दिन, और ऊपर से छुट्टी का कन्फ्यूज़न! (Confusion over the School Vacations in Winters) बस फिर क्या था, स्कूली बच्चों के अभिभावकों ने गड़ा दीं अपनी नजरें समाचार चैनलों पर।

12 बजे तक माता-पिता बार-बार टी.वी. पर अपने मतलब की खबर का इन्तजार करते रहे। किन्तु आह! कोई फायदा नहीं हुआ और अंततः वे थकहार कर अगले दिन फिर से जल्दी उठने के लिए सो गए। घटना में नाटकीय मोड़ तो उस वक्त आया जब लगभग रात 12:15 बचे करीब न्यूज-चैनलों ने दिल्ली के सभी स्कूलों में ठंड के कारण 17 जनवरी तक छुट्टियों की खबर प्रसारित की। कुछ अभिभावक तो इतने लक्की रहे कि उन्होंने ये बहुप्रतीक्षित खबर देर रात ही सुन ली थी और अगले दिन बच्चों को स्कूल नहीं भेजा। और जो लोग ये खबर नहीं सुन पाए, वे फिर ठिठुरते हुए पहुँच गए सोमवार सुबह बच्चों को बस में चढ़ाने। हास्यास्पद तो ये रहा कि स्कूलों की बसें भी बच्चों को स्कूल लिवाने के लिए अपने नीयत समय पर पहुँच गईं। और बच्चे? वो पहुँच गए स्कूल, जहाँ तब तक छुट्टी की खबर मिल चुकी थी। फिर तो आधा बच्चे तो स्कूल पहुँचे और बाकी के नहीं। और फिर माता-पिता को जब छुट्टी घोषित किए जाने का पता चला तो फिर से कन्फ्यूज़न!?! अब बच्चे स्कूल से कब लौटेंगे? अभी या दिन में पूरे समय पर? स्कूल में कन्फ्यूज़न कि अब आधे बच्चों को क्या पढ़ाया जाए?

तो जनाब सोमवार का दिन रहा कन्फ्यूज़न से भरपूर! और ये सारा कन्फ्यूज़न पैदा किया निगोड़ी दिल्ली नगर पालिका (MCD)ने। यदि वे रविवार को सुबह ही ठंड के कारण अपने स्कूलों की छुट्टियाँ घोषित न करते तो शीला सरकार को भी आनन-फानन में ऐसा न करना पड़ता और इस तरह सोमवार भी कन्फ्यूज्ड मनडे न बनता। क्या आप अभी भी नहीं समझे? लेडीज़ ऐंड जैंटलमैन – दिल्ली नगर पालिका पर भारतीय जनता पार्टी (BJP) काबिज है ना! और यदि कांग्रेस की शीला सरकार दिल्ली सरकार के अधीन अथवा अन्य स्कूलों को ठंड के कारण बन्द करने में एक दिन की भी देरी करती तो बस, जरा कल्पना कीजिए – पहले से ही इतनी अधिक समस्याओं से त्रस्त दिल्ली की जनता इस बेरहम दिल्ली सरकार का क्या हाल करती? भारतीय जनता पार्टी को दिल्ली की जनता की सहानुभूति मिल जाती और कांग्रेस को राजनैतिक स्तर पर हानि उठानी पड़ती? निश्चिततः उस फायदे से ज्यादा जो उसने स्कूलों को खुले रखने पर कमाया होता।

लेकिन, अभी रुकिए सर! जाते-जाते एक बात तो जान लीजिए यानि कि असहनीय ठंड में बच्चों के स्कूलों की छुट्टियाँ भी अब बन गई है – राजनीति!

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1 Comment on "आखिरकार स्कूलों की छुट्टियाँ घोषित करनी ही पड़ीं दिल्ली सरकार को!"

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समीर लाल
Guest

इसमें भी राजनीति??

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