लेखक परिचय

लक्ष्मी जायसवाल

लक्ष्मी जायसवाल

दिल्ली विश्वविद्यालय से हिंदी पत्रकारिता में स्नातकोत्तर डिप्लोमा तथा एम.ए. हिंदी करने के बाद महामेधा तथा आज समाज जैसे समाचार पत्रों में कुछ समय कार्य किया। वर्तमान में डायमंड मैगज़ीन्स की पत्रिका साधना पथ में सहायक संपादक के रूप में कार्यरत। सामाजिक मुद्दों विशेषकर स्त्री लेखन में विशेष रुचि।

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वो पहली नज़र का पहला प्यार
वो दिल ही दिल में खुद से होता
ख़ामोशी भरा अनजाना इकरार।
सोचा न था कभी भी मैंने ये
एक मुलाकात से बदल जाएगी
दुनिया मेरी और मेरी पहचान।
एक वक़्त ऐसा भी आएगा जब
मैं करूंगी अपने प्यार का इज़हार।
ज़िन्दगी में मेरी भी ये पल आया है
जब मैंने प्यार को दिल में बसाया है।
और बदले में मिला है मुझे भी उस
उस अपने का साथ और बेहद प्यार।
प्यार का ये रिश्ता प्यार से ही सजा रहे
सपने पलकों में मेरी भी सजते रहें।
बस तमन्ना है सिर्फ एक ही अब कि

इस रिश्ते में न आए कोई भी दीवार।

 

 

इंतज़ार रहेगा मुझे…
इंतज़ार रहेगा मुझे उस दिन का
जब तेरी ज़िन्दगी में जगह बना पाऊं।
इंतज़ार रहेगा मुझे उस दिन का
जब तेरे सपनों को सिर्फ मैं ही सजाऊं।
इंतज़ार रहेगा मुझे उस दिन का
जब तेरे ख्यालों में तस्वीर अपनी बनाऊं।
इंतज़ार रहेगा मुझे उस दिन का
जब तेरे सपनों में मैं भी रंग भर पाऊं।
इंतज़ार रहेगा मुझे उस दिन का
जब तेरी ज़िन्दगी की बगिया महकाऊं।
इंतज़ार रहेगा मुझे उस दिन का
जब तेरी ज़ुबां से अपना नाम सुन पाऊं।
इंतज़ार रहेगा मुझे उस दिन का
जब तेरे ख्यालों पर मैं भी छा जाऊं।
इंतज़ार रहेगा मुझे उस दिन का
जब मैं तेरे लिए कुछ भी कर पाऊं।
इंतज़ार रहेगा मुझे उस दिन का
जब गीत कोई तेरे लिए गुनगुनाऊं।
इंतज़ार रहेगा मुझे उस दिन का
जब तेरी ज़िन्दगी का नगमा बन पाऊं।
इंतज़ार रहेगा मुझे उस दिन का
जब तेरे लबों का तराना मैं बन जाऊं।
इंतज़ार रहेगा मुझे उस दिन का
जब मैं यह इंतज़ार ख़त्म कर पाऊं।

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