लेखक परिचय

डा. राधेश्याम द्विवेदी

डा. राधेश्याम द्विवेदी

Library & Information Officer A.S.I. Agra

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floraडा. राधेश्याम द्विवेदी
भारत कई प्रकार के जंगलों जीवों का, अनेक पेड़ पौधों और पशु-पक्षियों का घर है। शानदार हाथी,मोर का नाच, ऊँट की सैर, शेरों की दहाड़ सभी एक अनोखे अनुभव है। यहाँ के पशु पक्षियों को अपने प्राकृतिक निवासस्थान में देखना आनन्दायक है। भारत में जंगली जीवों को देखने पर्यटक आते हैं। यहाँ जंगली जीवों की बहुत बड़ी संख्या है। भारत में 70 से अधिक राष्ट्रीय उद्यान और 400 जंगली जीवों के अभयारण्य है इसके अतिरिक्त पक्षी अभयारण्य भी हैं। यू.एस.ए. में नेशनल वाइल्डलाइफ वीक नेशनल वाइल्डलाइफ फेडरेशन (एन.डब्ल्यू.एफ.) द्वारा 1938 से मनाया जा रहा है. यह वाइल्डलाइफ शिक्षा का सबसे लम्बा कार्यक्रम होता है. इस अभियान के तीन उदेश्य हैं :
1. समुदायों व परिवारों को प्रकृति से जोड़ना,
2. संरक्षण की भावना पैदा करना तथा
3. वन्यजीव व पर्यावरण के प्रति जीवन पर्यन्त जागरुकता के लिये प्रेरित करना.
भारत सरकार ने किसी भी भारतीय वन्यजीव प्रजाति को विलुप्त होने से बचाने के उद्देश्य से वर्ष 1952 मंा तत्कात प्रभाव से भारतीय वन्यजीव बोर्ड (IBWL) की स्थापना की. बोर्ड द्वारा वन्य जीव संरक्षण हेतु जनता को जागरुक करने के लिए निरंतर अग्रणी कार्य किये जा है. अति प्राचीन काल से, हमारे महाकाव्यों और हमारे इतिहास के साथ, हमारी पौराणिक मान्यताओं और हमारे folklores के साथ हमारे वन्य जीवों का निकट संबद्ध रहा है. विभिन्न प्रकार के वन्य जीवों से ही प्रकृति के संतुलन का निर्माण होता है, जिसके बिना हमारा जीना दूभर हो जायेगा. वास्तव में वन्यजीव संरक्षण सक्रिय और योजनाबद्ध वन्यजीव प्रबंधन है, जिसमें मानव हितों को बिना हानि पहुँचाये सभी जीव जन्तु मानव के साथ साथ अपने अपने प्रभावक्षेत्र में उपयोगिता के अनुसार प्रगति करे. इस दृष्टिकोण को मध्यनजर रखते हुए देश भर में उपयुक्त इलाकों में वन्यजीव अभयारण्यों और राष्ट्रीय पार्कों की स्थापना कर इन्हें विकसित किया गया है.वन्य जीवों की सुरक्षा के लिये आम आदमी में सामान्य जागृति लाने के लिये, भारतीय वन्य जीव बोर्ड (IBWL) ने वन्यजीव सप्ताह मनाने का निर्णय लिया और तब से 2 से 8 अक्टूबर तक हर वर्ष वन्यजीव conservation से संबंधित विभिन्न गतिविधियों का आयोजन कर इस सप्ताह मनाया जाता है. हर वर्ष 2 से 8 अक्टूबर तक केंद्र व राज्य सरकारों, पर्यावरणविदों, कार्यकर्ताओं, शिक्षकों आदि द्वारा लोगों में वन्यजीवों के संरक्षण के प्रति जागरूकता में तेजी लाने के लिए विभिन्न गतिविधियों का आयोजन किया जाता है. भारत में विभिन्न प्रजातियों का विशाल भण्डार है. इसलिए भी भारत में कई सम्मेलनों, जागरूकता कार्यक्रमों, और प्रकृति प्रेमियों के बीच सार्वजनिक बैठकों का आयोजन किया जाता है. स्कूलों और शिक्षण संस्थानों में बच्चों के लिए वन्यजीवों से संबंधित निबंध लेखन, चित्रकला, संभाषण, फिल्म स्क्रीनिंग आदि प्रयोगिताओं का आयोजन किया जाता है.वन्य जीव सप्ताह मनाने की गंभीरता; स्कूली बच्चों, युवा लोगों और आम जनता को वन्य जीवन के बारे में शिक्षित व जागरूक करने के साथ साथ सरकार के काम करने में, नीतियों को डिजाइन करने में तथा आज के बदलते परिवेश में वन्यजीव संरक्षण के मुद्दों का समाधान करने में भी मदद करती है.
प्रकृति की अमूल्य देन:-वन्य जीवन प्रकृति की अमूल्य देन है। भविष्य में वन्य प्राणियों की समाप्ति की आशंका के कारण भारत में सर्वप्रथम 7 जुलाई, 1955 को वन्य प्राणी दिवस मनाया गया। यह भी निर्णय लिया गया कि प्रत्येक वर्ष दो अक्तूबर से पूरे सप्ताह तक वन्य प्राणी सप्ताह मनाया जाएगा। वर्ष 1956 से वन्य प्राणी सप्ताह मनाया जा रहा है। भारत के संरक्षण कार्यक्रम की आवश्यकताओं को पूरा करने के लिए एक मज़बूत संस्थागत ढांचे की रचना की गयी है। जूलॉजिकल सर्वे ऑफ इण्डिया, बोटेनिकल सर्वे आफ इण्डिया जैसी प्रमुख संस्थाओं तथा भारतीय वन्य जीवन संस्थान, भारतीय वन्य अनुसंधान एवं शिक्षा परिषद, इंदिरा गांधी राष्ट्रीय वन अकादमी तथा सलीम अली स्कूल ऑफ आरिन्थोलॉजी जैसे संस्थान वन्य जीवन संबंधी शिक्षा और अनुसंधान कार्य में लगे हैं। प्रकृति प्रेमियों के लिए यह जंगल स्वर्ग है परन्तु अब यहाँ के कुछ जीव जैसे चीते, शेर, हाथी, बंगाल के शेर और साइबेरियन सारस अब ख़तरे में है। भारत की लम्बाई और चौडाई में फैला यह जंगल क्षेत्र, रणथंभौर राष्ट्रीय उद्यान, राजस्थान से हज़ारी बाघ जंगली जीव अभयारण्य, बिहार से,हिमालय के जिम कोर्बेट राष्ट्रीय उद्यान, अन्डमान के छह राष्ट्रीय उद्यानों तक एक शानदार जंगल की सैर कर सकते हैं। हाथी, चीते, जंगली भैंसा, याक, हिरन, जंगली गधे एक सींग वाला गेंड़ा, साही, हिम चीते आदि जन्तु हिमालय में दिखने को मिलते हैं। भारत में, विश्व के अस्सी, प्रतिशत एक सींग वाले गेंड़ों का निवास है। काज़ीरंगा खेल अभयारण्य गेंड़ों के लिए उपयुक्त निवास है और प्राकृतिक संस्थाओं के लिए और जंगली सैर करने वाले के लिए भी अच्छी जगह है। भारत के सोन चिड़िया और ब्लैक बक, करेश अभयारण्य में होते हैं। ‘माधव राष्ट्रीय उद्यान’ में, जो शिवपुरी राष्ट्रीय उद्यान कहलाता था, जीवों का एक निवास है। कोर्बोट राष्ट्रीय उद्यान सबसे प्रसिद्ध है्। उत्तर भारत में जंगली जानवरों के पर्यटकों के लिए अच्छी जगह है। ऐसे अभयारण्य और राष्ट्रीय उद्यान, भारत में काफ़ी संख्या में हैं। भारत में शेरों (बाघ) की संख्या बहुत थी। भारत का राष्ट्रीय पशु, शेर, तेजी और ताक़त का चिह्न है। भारत में बारह बाघ निवास है। शाही बंगाल के बाघ, सबसे शानदार जाति के पशुओं में से है। विश्व के साठ प्रतिशत शेरों की संख्या भारत में रही है। मध्य प्रदेश, शेरों के निवास की सबसे प्रसिद्ध जगह है। यहाँ बंगाल के शेर, चीतल, चीते, गौर, साम्भर और कई जीव देखने को मिलते हैं। भारत में जंगली जीवों के साथ-साथ, पक्षियों की भी संख्या अच्छी है। कई सौ जातियों के पक्षी भारत में मिलते हैं। घना राष्ट्रीय उद्यान या भरतपुर पक्षी अभयारण्य (राजस्थान) में घरेलू पक्षी और ज़मीन पर जीने वाले पक्षी भी हैं। दुधवा जंगली जीव अभ्यारण में बंदर, गिद्ध और चील पक्षी भी है। अंडमान के निकोबर में भी कबूतर पाये जाते हैं।
मनुष्य के शरीर व मस्तिष्क को स्वस्थ व सकारात्मक ऊर्जा से भरपूर रखने के लिये हमारे पर्यावरण को शुद्ध व साफ सुथरा रखना अत्यावश्यक है. पर्यावरण को शुद्ध व साफ सुथरा रखना वन व वन्यजीवों बिना असंभव है. पेड़ पौधों की चर्चा तो अनेकानेक कार्यक्रमों में होती रहती है. वन्यजीवों की ओर ध्यानाकर्षण कम होता है. जबकि बिना वन्यजीवों के मनुष्य का अस्तित्व ही संकट में पड़ जायेगा. इसलिए वन्यजीवों के महत्व को समझाने व इनके प्रति जागरुकता लाने के पूरे विश्व में लम्बा चलने वाला कार्यक्रम वन्यजीव सप्ताह मनाया जाता है.
प्रकृति, पेड़-पौधों व जीव-जन्तुओं की, जैवविविधता (Biodiversity) से परिपूर्ण है. मानव के लिये इसे समझना तो दूर, वह इसे पहचान भी नहीं पा रहा है. इन सब बातों को शब्दों बांधना नामुमकिन है. मैं ग्रीन हॉउस इफेक्ट, ब्लेक होल, केमिकल्स… आदि आदि की विस्तार में बात नहीं करुंगा. मैं यहाँ आपके साथ केवल एक उद्धरण शेयर करना चाहूँगा. गिद्ध ऐसा पक्षी जो केवल मृत जानवर के शव (carcass) को ही खाता है. मृत जानवरों का निस्तारण(सफाई) बहुत मुश्किल कार्य है. इनके खुले में सड़ने से कई तरह की बिमारियां ही नहीं महामारियां फ़ैल सकती है. गिद्ध मानव का मुफ्त का सफाईकर्मी है. परन्तु उसके लालच ने उसको भी मार दिया. गिद्ध की Indian vulture (Gyps indicus) व कई अन्य भारतीय प्रजातियाँ प्राय: लुप्त हो चुकी है, या लुप्त होने की कगार पर है.
भारत का वन्य जीवन:- संसार में पौधों की 2,50,000 ज्ञात प्रजातियों में से 15,000 प्रजातियां भारत में मिलती हैं। इस प्रकार संसार में जीव-जन्तुओं की कुल 15 लाख प्रजातियों में से 75,000 प्रजातियां भारत में पाई जाती हैं। भारत में पक्षियों की 1,200 प्रजातियां और 900 उप-प्रजातियां पाई जाती हैं। भारत के सुविख्यात पक्षियों में बहुरंगी राष्ट्रीय पक्षी मोर उल्लेखनीय है। पांच फुट की ऊंचाई वाला भव्य सारस तथा संसार का दूसरा सबसे भारी पक्षी हुकना (सोहनचिड़िया) महत्त्वपूर्ण पक्षी हैं। संसार में प्रसिद्ध केवलादेव (भरतपुर) के राष्ट्रीय उद्यान में ढाई लाख पक्षियों का घर है।

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