लेखक परिचय

सत्येन्द्र गुप्ता

सत्येन्द्र गुप्ता

M-09837024900 विगत ३० वर्षों से बिजनौर में रह रहे हैं और वहीं से खांडसारी चला रहे हैं

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हवा से न कहना, वो सब को बता देगी

तेरा हर ज़ख्म दुनिया को दिखा देगी।

तू डूबा हुआ होगा अपने गम में कहीं

वो जमाने भर में बहुत शोर मचा देगी।

चाहना उसे दिल से एक फासला रखकर

शुहरत बिगड़ गई तो हस्ती मिटा देगी।

तू दरिया प्यार का है, वो चाँद सूरत है

जिंदगी हर घडी तेरे होश उड़ा देगी।

मौत ने आना है, वो आएगी भी जरूर

फैसला भी अपना एकदम ही सुना देगी।

नादान है बहुत तू ,ये दुनिया शन्शाह है

जायेगा खाली हाथ तुझे ऐसा बना देगी।

हफ्तों, महीनों, सालों की तो बात न कर

दुनिया तेरे जाते तेरा किस्सा भुला देगी।

 

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2 Comments on "गज़ल ; हवा से न कहना – सत्येंद्र गुप्ता"

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Jeet Bhargava
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दिल को छू लेने वाली रचना. साधुवाद.

mahendra gupta
Guest

हवा से ना कहना वो सबको बता देगी, तेरा हर जखम दुनिया को दिखा देगी. बहुत ही सुन्दर रचना ,भावों से भरी.

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