लेखक परिचय

सत्येन्द्र गुप्ता

सत्येन्द्र गुप्ता

M-09837024900 विगत ३० वर्षों से बिजनौर में रह रहे हैं और वहीं से खांडसारी चला रहे हैं

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पैगाम मेरा लेकर जो बादे सबा गई

पैगाम मेरा लेकर जो बादे सबा गई

सुनते हैं नमी आँख में उनके भी आ गई।

मैं आईने के सामने पहुँची जिस घडी

मेरी बुराई साफ़ नज़र मुझको आ गई।

एक मैकदा सा बंद था उसकी निगाह में

मदहोश कर गई मुझे बेखुद बना गई।

 

 

 

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