लेखक परिचय

सत्येन्द्र गुप्ता

सत्येन्द्र गुप्ता

M-09837024900 विगत ३० वर्षों से बिजनौर में रह रहे हैं और वहीं से खांडसारी चला रहे हैं

Posted On by &filed under गजल.


कभी गरीब

प्याज ,गुड ,मिर्च से

चने -बाजरे की रोटी

खाता था ।

 

प्याज तो, कब का गायब

हो गया था,

उसकी थाली से !

गुड भी अब गायब

हो गया है ,

उसकी थाली से !

 

बाकी रह गयी- मिर्च ,

क्या यह भी कभी

गायब हो जायेगी ,

उसकी थाली से ?

 

शायद- नहीं ,

मिर्च, कभी गायब नही होगी ,

उसकी थाली से ,

क्योंकि, मिर्च खाने से,

आँख में आंसू आते हैं

और आंसू ही तो

गरीब का मुकद्दर है ।

 

Leave a Reply

Be the First to Comment!

Notify of
avatar
wpDiscuz