लेखक परिचय

शादाब जाफर 'शादाब'

शादाब जाफर 'शादाब'

लेखक स्‍वतंत्र टिप्‍पणीकार हैं।

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web mediaमैं लगभग 20 सालो से प्रिंट मीडिया से जुडा हॅू अपने शुरूआती लेखक जीवन में, मैं क्षेत्रीय मीडिया से जुडा रहा। फिर कुछ समाचार न्यूज एजेंसियो के द्वारा मेरे लेख राष्ट्रिय समाचार पत्रो में प्रकाशित होने लगे। लगभग 10 सालो से मैं स्वतंत्र पत्रकार के रूप में राष्ट्रिय समाचार पत्रो में स्तम्भकार के रूप में मैं लिखने लगा। अब प्रवक्ता.कॉम और भाई संजीव सिंहा जी के प्रोत्साहन से लगभग 5 सालो से वेब पत्रकारिता से जुडा हॅू। और आज अंतरराष्ट्रिय स्तर पर वेब-पत्रकारिता या ऑनलाइन पत्रकारितामें एक वेब लेखक के रूप में अपनी पहचान बना चुका हॅू। वेब-पत्रकारिता या ऑनलाइन पत्रकारिता प्रिंट पत्रकारिता से बिल्कुल अलग है वेब-पत्रकारिता या ऑनलाइन पत्रकारिता पर कुछ खास लेखको का कब्जा या यू कहूँ कि कुछ लेखको की खानदानी विरासत नही है। वेब-पत्रकारिता या ऑनलाइन पत्रकारिता में हर किसी के लिए रास्ते खुले है अच्छे लेखक को एक ही रात और एक ही लेख से अंतरराष्ट्रिय स्तर पर पहचान मिल सकती है और उसे अंतरराष्ट्रिय स्तर पर पढा जाता है। 1970-1980 के दशक में जब कंप्यूटर का व्यापक प्रयोग होने लगा था तब यह किसे पता था कि यही कंप्यूटर एक दिन ऑनलाइन समाचार पत्र का जगह ले लेगा. 1980 में अमेरिका के न्यूयार्क टाइम्स, वॉल स्ट्रीट जनरल, डाव जोन्स ने अपने-अपने प्रिंट संस्करणों के साथ-साथ समाचारों का ऑनलाइन डेटाबेस रखना भी प्रारंभ किया . वेब-पत्रकारिता या ऑनलाइन पत्रकारिता को तब और गति मिली जब 1981 में टेंडी द्वारा लैपटॉप कंप्यूटर का विकास हुआ. इससे किसी एक जगह से ही समाचार संपादन, प्रेषण करने की समस्या जाती रही. वही ऑनलाइन समाचार पत्रों के प्रचलन में क्रांतिकारी परिवर्तन आया। 1983 से 90 के दशक आते-आते संवाददाता कंप्यूटर, मोडेम, इंटरनेट या सैटेलाइट का प्रयोग कर विश्व से कहीं भी तत्क्षण समाचार भेजने और प्रकाशित करने में हम सक्षम हो गये. 1998 में विश्व के लगभग 50 मिलियन लोग 40,000 नेटवर्क के माध्यम प्रतिदिन इंटरनेट का उपयोग किया करते थे. उनमें एक बड़ी संख्या में लोग समाचार, समाचार पत्र, समाचार एजेंसी और पत्रिकाएं विश्व को जानने समझने के लिए इंटरनेट पर तलाशते थे. एकमात्र अमेरिका की टाइम मैग्जीन ही ऐसी थी जिसने 1994 में इंटरनेट पर पैर रखा. उसके बाद तो मानो ऑलाइन समाचार पत्र पत्रिकसओ की होड लग गई और 450 पत्रिकाओं और समाचार पत्र प्रकाशनों ने इंटरनेट में स्वयं को प्रतिष्ठित किया. तब भी इंटरनेट पर कोई समाचार एंजेसी कार्यरत नहीं थी किन्तु एक अनुमान के अनुसार दिसम्बर 1998 के अंत तक लगभग 4700 मुद्रित समाचार पत्र इंटरनेट पर आनॅलाइन हो गये। .

जहाँ तक भारत में वेब-पत्रकारिता का सवाल है उसे मात्र 10 वर्ष हुए हैं. ये 10 वर्ष कहने भर को है दरअसल भारत की वेब-पत्रकारिता अभी शिशु अवस्था में है और इसके पीछे भारत में इंटरनेट की उपलब्धता, तकनीकी ज्ञान और रूझान का अभाव है, आज अंगरेज़ी की अनिवार्यता, बिजली की समस्या, नेट संस्करणों के प्रति पाठकों में संस्कार और रूचि का विकसित न होना तथा आम पाठकों की क्रय शक्ति भी है. भारत में यू तो इंटरनेट की सुविधा 1990 के मध्य में मिलने लगी थी और भारत में वेब-पत्रकारिता का पितामाह चैन्नई का ‘द हिन्दू’ पहला भारतीय अख़बार है जिसका इंटरनेट संस्करण 1995 को जारी हुए. इसके तीन साल के भीतर अर्थात् 1998 तक लगभग 48 समाचार पत्र ऑनलाइन हो चुके थे.

. ये समाचार पत्र केवल अंगरेज़ी में नहीं अपितु अन्य भारतीय भाषा जैसे हिंदी, मराठी, मलयालम, तमिल, गुजराती भाषा में थे. इस अनुक्रम में ब्लिट्ज, इंडिया टूडे, आउटलुक और द वीक भी इंटरनेट पर ऑनलाइन हो चुकी थीं . ऑनलाइन भारतीय समाचार पत्रों और पत्रिकाओं की पाठकीयता भारत से कहीं अधिक अमेरिका सहित अन्य देशों में है जहाँ भारतीय मूल के प्रवासी लोग रहते हैं या अस्थायी तौर पर रोजगार में संलग्न हैं .

वेब-पत्रकारिता आज दूरस्थ पाठकों के लिए समाचार प्राप्ति का सबसे खास माध्यम बन चुका है. इधर इंटरनेट आधारित पत्र-पत्रिकाओं की संख्या निरंतर बढ़ती जा रही है. इसमें दैनिक, साप्ताहिक, मासिक, त्रैमासिक सभी तरह की आवृत्तियों वाले समाचार पत्र और पत्रिकायें शामिल हैं . विषय वस्तु की दृष्टि से इन्हें हम समाचार प्रधान, शैक्षिक, राजनैतिक, आर्थिक आदि केंद्रित मान सकते हैं . यद्यपि इंटरनेट पर ऑनलाइन सुविधा के कारण स्थानीयता का कोई मतलब नहीं रहा है किन्तु समाचारों की महत्ता और प्रांसगिकता के आधार पर वर्गीकरण करें तो ऑनलाइन पत्रकारिता को भी हम स्थानीय, प्रादेशिक, राष्ट्रीय या अंतरराष्ट्रीय स्तर पर देख सकते हैं. भोपाल की वेब पोर्टल आवाज ए हिंद., नई दुनिया डॉट कॉम, या दैनिक छत्तीसगढ़ डॉट कॉम को प्रादेशिक, नवभारत टाइम्स डॉट कॉम को राष्ट्रीय और बीबीसी डॉट कॉम, डॉट, दिल्ली की प्रवक्ता.काम को अंतरराष्ट्रीय स्तर की ऑनलाइन समाचार पत्र व वेब पोर्टल मान सकते हैं।

आज वेब-पत्रकारिता के प्रति आम पत्रकारों में रूझान की कमी के पीछे इसमें कार्यरत पत्रकारों को भारत सरकार व राज्य शासनों द्वारा मिलने वाली सुविधाएं एवं मान्यता का अभाव भी है क्यो कि वेब पत्रकारो को प्रिंट मीडिया के पत्रकारो की तरह मिलने वाली सुविधाओ में काफी अंतर ही नही बल्कि सरकार द्वारा मिलने वाली तमाम सुविधाओ से वंचित है। किंतु मध्यप्रदेश शासन को खासतौर पर साधुवाद दिया जा सकता है जिसने भारत सरकार से कहीं पहले वेब पत्रकारिता को अधिमान्यता की श्रेणी में रख कर मिसाल कायम किया है. भारत सरकार भी अब वेब-पत्रकारिता को मान्यता देने वालों देशों में सम्मिलित हो चुका है . देश में वेब-पत्रकारिता को विकसित बनाने के लिए भारत सरकार के सूचना और प्रसारण मंत्रालय में इसके लिए पिछले वर्ष (यानी 12 सितम्बर 2006) आवश्यक संशोधन हो चुका है . अब वेब-पत्रकारिता को भी एक्रीडेशन या मान्यता मिल चुका है अर्थात् भारत सरकार द्वारा नियमों के संशोधन के बाद अपनी साधना में लगे वेब पत्रकारों को उनके कार्य में आसानी के साथ ही वह सभी सुविधायें मिलने लगेंगीं जो अन्य मीडिया के राष्ट्रीय मान्यता प्राप्त पत्रकारों को मिला करतीं थीं ! इस नये संशोधन से वेब पत्रकारिता को एक जिम्मेवारी और शक्ति दोंनों का इकजाया सयोग मिलेगा और अब इण्टरनेट पर अनेक वरिष्ठ व अनुभवी पत्रकार स्वतरू ही जगह बनाने का प्रयास करेगें, साथ ही अब उन नौजवानों के लिये भी प्रशस्ति व उल्लेखनीय कार्यों के लिये दरवाजे खुल गये हैं जो पत्रकारिता को कैरियर के रूप में अपनाना चाहते हैं ! सच्चे मायने में भारत उन विशेष देशों में शामिल हो गया है जो वेब पत्रकारों को प्रत्यायन प्रदान करते हैं. भारत सरकार द्वारा वेब पत्रकारों को निम्नांकित शर्तों के आधार पर अधिमान्यता प्रदान किया जा रहा है।

वही अंतरराष्ट्रिय स्तर पर वेब पत्रकारिता को आज विश्व ने स्वीकार कर लिया है जिस को देखते हुए देश के बड़े-बड़े पत्रकार प्रिंट माध्यम के साथ-साथ वेब-मीडिया में भी सक्रिय होते नज़र आने लगे हैं इनमें प्रसिध्द लेखक-पत्रकार खुशवंत सिंह, मशहूर संपादक व मानवाधिकारवादी कुलदीप नायर, पूर्व केंद्रीय मंत्री अरुण नेहरू, पूर्व सांसद व संपादक दीनानाथ मिश्र आदि को गिना जा सकता हैं जो प्रभासाक्षी में नियमित रूप से कॉलम लिखते हैं। विख्यात हिंदी कार्टूनिस्ट काक भी सतत् रूप से नज़र आते है. जो आज ऑनलाइन संस्करण में समूचे विश्व में पढ़े जा रहे हैं . यहाँ हम उन पत्रकारों का उल्लेख स्थानाभाव के कारण नहीं कर पा रहे हैं जो किसी न किसी ऐसे ऑनलाइन समाचार पत्र से संबंद्ध है जिसका अपना प्रिंट संस्करण भी बाजार में ज्यादा कारगर रूप में उपलब्ध है।

आज वेब पत्रकारिता एक ऐसा माध्यम जो अपने अंदर प्रिंट, टीवी और रेडियो को समेटे है. मीडिया का लोकतंत्रीकरण करने में वेब पत्रकारिता बड़ी भूमिका निभा रहा है. संचार माध्यम के रूप में इस प्लेटफार्म ने हर आदमी का आवाज बुलंद कर हजारों-करोड़ो लोगो तक पहुंचाया है. पहले जहां इंटरनेट कम्प्यूटर तक सीमित था, वहीं नई तकनीकों से लैस मोबाइलों, स्मार्ट फोन और टैब में भी इंटरनेट का चलन बढ़ता जा रहा. किसी भी जगह कहीं भी इंटरनेट का इस्तेमाल किया जा सकता है. यह वेब पत्रकारिता का ही कमाल है कि आप दुनिया के किसी भी कोने में बैठकर किसी भी भाषा में, किसी भी दिन और किसी भी देश का अखबार या खबरें पढ़ सकते हैं. यह ख़बरों का तीब्र माध्यम के रूप में भी स्वीकारा गया है. पहली बड़ी चुनौती कम्प्यूटर साक्षरता दर की है. दूसरी चुनौती भारत में अभी भी वेब पत्रकारिता की पहुंच अगली पंक्ति में खड़े लोगों तक ही सीमित है. इधर के दिनों में यह मध्यम वर्ग तक भी आया है. जहां तक अंतिम कतार में खड़े लोगों तक पहुंचने की बात है तो अभी यह कोसों दूर है. हालांकि अंतरजाल मुहैया कराने वाली कंपनियों ने मोबाइल फोन और ग्रामीण क्षेत्रों पर ज्यादा ध्यान दिया है और इंटरनेट अब गांवों तक पहुंच गया है. तीसरी चुनौती पत्रकारों के समक्ष तकनीकी ज्ञान की है. अन्य चुनौती के रूप में वेब पत्रकारिता में सबसे बड़ा सवाल विश्वसनीयता को लेकर भी है. आज लोगों को इतनी जगहों से समाचार मिल रहे हैं कि लोगों के लिए समाचारों की विश्वसनीयता एक बड़ा मुद्दा है. यह वेब पत्रकारिता के लिए भी एक बड़ी चुनौती है।

वर्ल्ड बैंक के मुताबिक 2011 तक भारत में 12.5 करोड़ लोग इंटरनेट इस्तेमाल कर रहे थें जिसकी संख्या में तीव्र वृद्धि हुई है। वेब पत्रकारिता का उज्जवल भविष्य इस बात से भी आंका जा सकता है कि भारत में मोबाइल तकनीक और फोन सेवा प्रदान करने बाले बड़े टेलिकॉम ऑपरेटरों ने 3G सेवाओं के लाइसेंस के लिए हाल ही में करीब 16 अरब डॉलर यानी 75,600 करोड़ रुपए की बोली लगाई. वेब पत्रकारिता की पहुंच एक निश्चित भौगोलिक सीमा तक नही है अपितु इसकी पहुंच वैश्विक है. वेब पत्रकारिता करने वालों का दायरा बहुत बड़ा हो जाता है. उनकी ख़बर एक पल में सारी दुनिया में पहुँच जाती है जो कि अन्य समाचार माध्यमों में संभव नहीं है।

आज वेब-संस्करण चलाने बाली समाचार-पत्र और पत्रिकाओं की संख्या कम है. पर आने वाले समय पत्रकारिता के क्षेत्र में बढती वेब मीडया की स्वीकार्यता से वेब पत्रकारिता का भविश्य उज्जवल नजर आ रहा है जिस से लगता है कि आने वाले समय में हर पत्र-पत्रिका ऑन-लाईन होगी. साथ ही साथ स्वतंत्र न्यूज पोर्टल की संख्या में भी वृद्धि होगी। आज हिन्दी दुनिया की तीसरी सर्वाधिक बोली-समझी जाने वाली भाषा है. विश्व में लगभग 80 करोड़ लोग हिन्दी समझते हैं, 50 करोड़ लोग हिन्दी बोलते हैं और लगभग 35 करोड़ लोग हिन्दी लिख सकते हैं।उसके हिसाब से हिंदी में पत्रकारितोन्मुख ऑनलाइन पत्र-पत्रिकाओं की संख्या अत्यल्प है. इस तरह से वर्तमान में अंगरेज़ी की प्रभूता के कारण हिंदी में ऑनलाइन पत्रकारिता शिशु अवस्था पर है पर इस सब के बावजूद आज पूरे विश्व में वेब-मीडिया या ऑनलाइन मीडिया का बोलबाला है वही इंटरनेट पर बढती हिंदी की मांग को देखते हुए ऐसा लगता है कि आने वाले दिनों में वेब पत्रकारिता में अंग्रेज़ी का प्रभुत्व बहुत दिन नहीं रहने वाला है. क्षेत्रीय और स्थानीय भाषा में बन रहे वेब पोर्टलों और वेबसाइटों का प्रभाव बहुत तेज़ी से बढ़ रहा है और इनका भविष्य उज्ज्वल दिखाई देता है।

 

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