लेखक परिचय

राजेश कश्यप

राजेश कश्यप

स्वतंत्र पत्रकार, लेखक एवं समीक्षक।

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 राजेश कश्यप 

देश में पाखण्डी बाबाओं, गुरूओं, योगियों और धर्मोपदेशकों की बाढ़ आई हुई है। लगभग सभी धर्म के नाम पर गोरखधंधा कर रहे हैं। जो जितना बड़ा संत, बाबा, गुरू अथवा योगी के रूप में उभरता है, थोड़े दिन बाद उसकी काली कारतूतों का लंबा चौड़ा पिटारा खुलकर सामने आ जाता है। इस समय निर्मल बाबा की अपार कृपा का काला सच सबके सामने उजाकर हो रहा है। एक आम इंसान की भांति गरीबी, बेकारी और बेरोजगारी के साथ-साथ पारिवारिक चुनौतियों की दलदल में घिरा निर्मलजीत सिंह नरूला उर्फ निर्मल बाबा, न तो ईंट-भट्ठे के काम में सफल हो पाता है, न लकड़ी के व्यापार में कामयाब हो पाता है और न कपड़े की दुकानदारी ही चला पाता है और वही बेबस आदमी, गिने-चुने दिनों में सालाना करोड़ों कमाने लगता है, कोठियों, बंगलों, कारों आदि का मालिक बन जाता है और देश के सिरमौर तीन-चार दर्जन समाचार चैनलों पर सुबह-शाम अपनी कृपा बरसाने में लगा रहता है। कितने बड़े कमाल की बात है कि ईमानदारी और मेहनत वाले हर काम में असफल रहने वाला नाकारा व्यक्ति, देश के करोड़ों कर्मठ लोगों का भाग्य-विधाता बन बैठा!

यह कोई एक निर्मल बाबा का किस्सा नहीं है। देश में करोड़ों सुहृदयी आस्तिक लोगों की भावनाओं पर कुठाराघात करके ऐशोआराम का जीवन जीने वाले संतों, स्वामियों, सतगुरूओं, धर्माचार्यों, धर्मोपदेशकों और योगियों की एक लंबी फेहरिस्त बन चुकी है। आज कोई भी संत निर्मल नजर नहीं आता है। सितम्बर, 2010 में ‘आज तक’ समाचार चैनल ने एक स्ट्रिंग आप्रेशन के जरिए देश के कई प्रख्यात धार्मिक गुरूओं की पोल खोलकर देश में सनसनी मचाकर रख दी थी। इस स्ट्रिंग आप्रेशन में देशभर में साढ़े तीन सौ से अधिक आश्रमों का संचालन करने वाले आध्यात्मिक गुरू आशाराम बापू को आर्थिक धोखबाजी, डकैती और संगीन अपराधिक प्रवृति के लोगों को अपने आश्रम में शरण देने और उनका बाल भी बांका न होने देने का ठोस आश्वासन देते हुए दिखाई दिए। उनके अहमदाबाद स्थित आश्रम में जुलाई, 2008 में दो छात्र रहस्यमयी परिस्थितयों में मृत पाए जा चुके हैं और उन पर तांत्रिक क्रिया करने जैसे गंभीर आरोप भी लग चुके हैं। उनके 200 अनुयायियों को नवम्बर, 2009 में पुलिस पर पथराव करने के आरोप में गिरफ्तार भी किया गया था। इसके अगले महीने, दिसम्बर, 2009 में उनके सबसे करीबी पूर्व अनुयायी राजू चांडक ने यह खुलासा करके भयंकर सनसनी मचाकर रख दी थी कि आशाराम बापू का कई महिलाओं से अवैध संबंध है और यह संत के वेश में हवस का पुजारी है। ये आध्यात्मिक गुरू गत 11 अप्रैल, 2012 को इंदौर में अपने 72वें जन्मशती समारोह में प्रवचन करते-करते अमर्यादित व शर्मनाक आचरण पर उतरते नजर आए। उन्होंने सत्संग के दौरान लोगों को पानी पीला रहे एक सेवक को सरेआम अभद्रता की चरमसीमा लांघते हुए नीच आदमी’, ‘गंदे कहीं के’, ‘पागल सेवादार’ और ‘बेशर्म कहीं के’जैसे अनैतिक शब्दों से संबोधित किया और उसे ‘नंगा करके घर भेजने’ तक की घुड़की दे डाली। क्या यह सब कारनामें एक आध्यात्मिक गुरू के लिए अति शर्मनाक नहीं हैं?

‘आज तक’ समाचार चैनल के स्ट्रिंग आप्रेशन में प्रख्यात सद्गुरू सुधाशुं महाराज रिपोर्टर को मॉरीशस से काला धन लाने के उपायों के साथ-साथ काले धन को सफेद कैसे बनाया जाए, जैसे ईजाद किए गए तरीके बताने का वायदा करते नजर आए। इसके अलावा भी उन पर कई तरह के गंभीर आरोप लग चुके हैं। वर्ष 2009 में नागपुर से प्रकाशित हिन्दी समाचार पत्र ‘दैनिक 1857’ के एक विज्ञापन ने देशभर में खूब तहलका मचाया। इस विज्ञापन में सुधांशु महाराज के करीबी रहे महावीर प्रसाद मानसिंघका ने उनसे 22 गंभीर सवाल पूछे। इन सवालों के जरिए महाराज द्वारा संस्थापित एवं संचालित विश्व जागृति मिशन के माध्यम से समृद्ध दानदाताओं से हासिल मोटी रकम के गोलमाल और नकली आयकर रसीदों को जारी करने जैसे अनेक गंभीर आरोप लगाए। इसके साथ ही उन्होंने महाराज को स्वलंकृत धार्मिक चेतना के पुरोधा, श्रद्धापर्व के प्रस्तोता, अनाथों के नाथ, दुःखियों के मसीहा, मानवसेवा के अग्रदूत, आदिवासी वन बन्धुओं के कर्णधार, तरूणों के सांस्कृतिक रक्षक, युगऋषि, कलयुग के अवतार, परम पावन सद्गुरू जैसे अलंकार को उनके कृत्यों के एकदम उलट बताते हुए, अपनी वास्तविक सच्चाई बताने के लिए भी कहा। विज्ञापन के जरिए महाराज से उनके श्रीमुख से उच्चारित गुरूओं के बारे में भी भेद खोलने का आग्रह किया गया।

वर्ष 2010 में शाजापुर की एक अदालत ने फर्जी आयकर मामले में विश्व जागृति मिशन संस्था एवं चेरमैन सुधांशु महाराज सहित दस व्यक्तियों के विरूद्ध भी धोखाधड़ी के आरोप में आपराधिक प्रकरण पर गैर जमानती वारंट जारी किए थे।

क्या इस तरह के लांछन और आपराधिक कृत्य किसी संत को शोभा देते हैं?

स्ट्रिंग आप्रेशन में स्वामी सुमनानंद तो उत्तराखण्ड में 150 करोड़ का एक पॉवर प्रोजेक्ट दिलवाने की ऐवज में 10 से 20 प्रतिशत तक का कमीशन मांगते साफ दिखाई दिये। इतना ही नहीं उन्होंने अपनी राजनीतिक पहुंच के बलबूते यह प्रोजेक्ट दिलवाने के ठोस आश्वासन के साथ ही पूरी तरह काले शीशे वाली एक गाड़ी, एक समझदार, तगड़ा व भरोसेमंद ड्राईवर और एक विदेशी पिस्तौल की मांग तक कर डाली। क्या यह सब स्वामी के चेहरे और चरित्र की असलियत का सहज अन्दाजा लगाने के लिए काफी नहीं है? इनके अलावा शनिदेव के कथित महाभक्त और ‘नमोः नारायण’की टीवी चैनलों पर भयंकर गर्जना करके लोगों की नींद हराम करने वाले बहुचर्चित दाती महाराज समाचार चैनल के स्ट्रिंग आप्रेशन में शनि के प्रकोप से बचाने के लिए 10 से 15 लाख रूपये की रकम मांगते नजर आए। इन्होंने दक्षिणी दिल्ली के छत्तरपुर इलाके में विराट और भव्य आश्रम

बना रखा है। क्या यह सब नेक कमाई से संभव हो सकता है? इनसे भी बढ़कर स्ट्रिंग आप्रेशन में तांत्रिक भैरवानंद उर्फ महाकाल का चेहरा, चाल व चरित्र बेनकाब हुआ। ये तांत्रिक तंत्र-मंत्र के जरिए किसी भी व्यक्ति का एक्सीडेंट आसानी से करवाने, किसी भी व्यक्ति को रास्ते से हटाने के साथ-साथ पूर्व में ऐसे ही कारनामों को अंजाम दिए जाने जैसे चौंकाने वाले दावे करते नजर आए। इसके साथ ही वे दावे के साथ कहते नजर आए कि देश के बहुत सारे प्रधानमंत्रियों और राष्ट्रपतियों से न सिर्फ उनकी पहचान है, बल्कि, वे सब उनके चरण छुते रहे हैं। यदि इन सब दावों में जरा भी सच्चाई है तो क्या किसी लोकतांत्रिक देश पर यह गहरा बदनुमा दाग नहीं है?

अप्रैल, 2010 में दक्षिण भारत के प्रमुख टीवी समाचार चैनल ‘सन’ ने अपने स्ट्रिंग आप्रेशन के तहत दुनिया भर में विख्यात स्वामी नित्यांनद को दक्षिण भारत की प्रसिद्ध अभिनेत्री रंजीता के साथ हम बिस्तर होते दिखाया तो देश व दुनिया में भूचाल-सा गया। कभी खदानों का धंधा करने वाले स्वामी नित्यानंद का यह शैतानी चेहरा व चरित्र जानकर उनके भक्तों का आक्रोश फूट पड़ा और उन्होंने न केवल स्वामी के पुतले जलाए, बल्कि उनके फोटों पर सरेआम जूते-चप्पल भी चलाए। गत मार्च, 2012 में उन्हीं स्वामी नित्यानंद पर अपने एक विदेशी भक्त पर जबरदस्ती समलैंगिक संबंध स्थापित करने के आरोप लगे।

सीआईडी ने उनके खिलाफ रामा नगरम अदालत में चार्जशीट तक दाखिल की। क्या स्वामी नित्यानंद जैसे संतो के ऐसे घटिया कारनामें देशवासियों की धार्मिक श्रद्धा, भक्ति, आस्था और विश्वास पर गहरा कुठाराघात नहीं है? क्या ऐसे संत व आध्यात्मिक गुरू सबसे बड़े देशद्रोहियों की श्रेणी में नहीं गिने जाने चाहिए?

आज देश को कोने-कोने में, हर गली व हर नुक्कड़ में कोई न कोई पाखण्डी व देशद्रोही संत, योगी, सतगुरू और धर्माचार्य मौजूद है। मार्च, 2010 में कॉमनवैल्थ खेलों से ठीक पहले जब एक इच्छाधारी बाबा उर्फ भीमानंद उर्फ राजीव रंजन द्विवेदी उर्फ शिवमूरत के सेक्स रेकेट का पर्दाफाश हुआ तो पूरा देश सकते में आ गया। बाद में पता चला कि यह इच्छाधारी बाबा संत के चोले में सेक्स रेकेट चलाता था और देश विदेश की पाँच सौ से अधिक लड़कियों को अपने चक्रव्युह में फंसाए हुए था। यह ढोंगी बाबा ऐसी लड़कियों को फांसता था, जो शार्टकट तरीके से अकूत धन-दौलत कमाने की ख्वाहिश रखती थी।

उसके सेक्स रेकेट में ज्यादातर ऐसी लड़कियां पाईं गईं जो एमबीए, एयरहोस्टेस, अभिनेत्री आदि बनने की इच्छा रखती थीं। यह बाबा इन लड़कियों से कालगर्ल के रूप में इस्तेमाल करता और उनकीं काली व गन्दी कमाई का साठ प्रतिशत खुद रखता और चालीस प्रतिशत उन लड़कियों का देता था। कई धनी व बड़े व्यवसायी बाबा के उपभोक्ता थे। बाबा अपनी निजी डायरी में न केवल लड़कियों की सप्लाई का पूरा हिसाब रखते थे, बल्कि कंडोमों के प्रयोग का भी बराबर लेखाजोखा रखते थे। इस समय संगठित अपराधियों के लिए लगने वाले कानून मकोका के तहत यह इच्छाधारी बाबा हवालात की हवा खा रहा है। पुलिस का मानना है कि यह बाबा पकड़ में आने से पहले 25 हजार करोड़ से भी अधिक कमाई कर चुका था।

संत के चोले में इस तरह के काले कारनामे करने वालों की देशभर में कोई कमी नहीं है।

डेरा सच्चा सौदा के संत गुरमीत राम रहीम सिंह, सतलौक आश्रम संचालक व कथित तत्वदर्शी संत राम पाल, प्रख्यात चन्द्रास्वामी के पूर्व रसोईए स्वामी सदाचारी, बंगाली कापलिक बाबा आदि असंख्य बाबा, योगी, सतगुरू और धर्मोपदेशक गंभीर आरोपों के घेरे में रहे हैं। आजकल धार्मिक चैनलों की भी बाढ़-सी आई हुई है। इन सभी चैनलों पर ये कथित संत, योगी, गुरू व धर्माचार्य चौबीसों घण्टे अलौकिक ज्ञान का बखान करते देखे व सुने जा सकते हैं। आश्चर्य का विषय है कि इन सभी संतों की पदवियों और उपाधियों के नाम एक से बढ़कर एक श्रेष्ठ मिलते हैं और सभी स्वयं को सबसे बड़ा चिन्तक, विद्वान और दिग्दर्शी कहलाते मिलते हैं। इन कथित गुरूओं ने धार्मिक चैनलों के साथ-साथ देश के सिरमौर समाचार चैनलों पर भी विज्ञापन कार्यक्रमों के जरिए अपनी घूसपैठ कर ली है। देश की 80 प्रतिशत जनता, जो मात्र 20 रूपये में गुजारा करने को विवश है, अपने दुःखों, कष्टों और पीड़ाओं के निवारण की आशा से इन ढ़ोंगी बाबाओं के झूठे व छल से भरे दावों के मकड़जाल में फंस जाती है। इस मकड़जाल में एक बार फंसने के बाद कोई भी बाहर नहीं निकल पाता, क्योंकि इसके बाद ढ़ोंगी बाबा उनकीं आंखों पर ऐसी काली पट्टी बांध देते हैं कि वे चाहकर भी उसे उतार नहीं पाते।

जब तक धर्म की आड़ में सरेआम धंधा करने वाले, अय्याशी करने वाले, अंधविश्वास फैलाने वाले, डराने-धमकाने वाले, धार्मिक भावनाओं को ठेस पहुंचाने वाले, सच्ची श्रद्धा व विश्वास को भंग करने वाले, अनैतिक व गैर-कानूनी आचरण करने वाले, साम्प्रदायिकता को भड़काने वाले, अधर्म पर चलने वाले, पाखण्ड व ढ़ोंग रचने वाले, मिथ्या ज्ञान बांटने वाले, असंभव दावे करने वाले, चमत्कारों के नाम पर ठगी करने वाले और इंसानियत के साथ बलात्कार करने वाले ढ़ोंगी संत, गुरू, धर्मोपदेशक, धर्माचार्य पीठाधीश और बाबा जेल की सलाखों के पीछे नहीं पहुंचाये जाएंगे, तब तक स्थिति में कोई सुधार नहीं होगा। आम जनमानस को भी एकदम सचेत होना होगा और अपने विवेक से काम लेना होगा। मीडिया को भी इन ढ़ोंगी बाबाओं के काले कारनामों पर नजर रखनी चाहिए, बल्कि उनके विज्ञापन वाले कार्यक्रमों पर भी रोक लगा देनी चाहिए। देश के माननीय न्यायाधीशों को भी ऐसे प्रकरणों पर स्वयं संज्ञान लेना चाहिए और लोगों की धार्मिक आस्था व विश्वास पर कुठाराघात करने वाले इन बाबाओं पर ‘देशद्रोह’के तहत केस चलाने चाहिए।

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2 Comments on "क्या लोगों की धार्मिक आस्था एवं विश्वास पर कुठाराघात ‘देशद्रोह’ नहीं है?"

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Bipin Kumar Sinha
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श्रीमान कश्यप जी मदारी का खेल अगर चल रहा है तो देखने वाले भी क्या कम जिम्मेवार है और देश द्रोह की परिभाषा क्या है शायद शब्दों का चयन ठीक से नहीं हुआ
बिपिन

Mahendra Gupta
Guest

सब कुछ हम सरकार से ही अपेक्षा क्यों रखतें है , क्या हमारा खुद का कोई फर्ज नहीं है कि ऐसी बातों के चंगुल में न आयें. सरकार को तो करना चाहिए पर इस सरकार से क्या ज्यादा उम्मीद की जा सकती है जो खुद अपनी ही उत्पन्न परेशानियों से रोजाना झूज्ती रहती है.जरूरत जागृति की है

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