लेखक परिचय

बीनू भटनागर

बीनू भटनागर

मनोविज्ञान में एमए की डिग्री हासिल करनेवाली व हिन्दी में रुचि रखने वाली बीनू जी ने रचनात्मक लेखन जीवन में बहुत देर से आरंभ किया, 52 वर्ष की उम्र के बाद कुछ पत्रिकाओं मे जैसे सरिता, गृहलक्ष्मी, जान्हवी और माधुरी सहित कुछ ग़ैर व्यवसायी पत्रिकाओं मे कई कवितायें और लेख प्रकाशित हो चुके हैं। लेखों के विषय सामाजिक, सांसकृतिक, मनोवैज्ञानिक, सामयिक, साहित्यिक धार्मिक, अंधविश्वास और आध्यात्मिकता से जुडे हैं।

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-बीनू भटनागर-
haridwar

उत्तराखण्ड का द्वार हरिद्वार,
यहां आई गंगा पहाड़ों के पार।
पहाड़ों के पार शहर ये सुन्दर।
सुन्दर शहर उत्तराखण्ड का मान।
मंसादेवी, चंडीदेवी के मन्दिर सुन्दर,
मंदिर का रास्ता बन गया है सुगम,
केबल कार की यात्रा अति मनोरम।
हर की पौड़ी शहर का मान,
गंगा की आरती, गंगा की भक्ति,
ऊपरी गंगा नहर और गंगा,
हरिद्वार का बनी है अभिमान।
तैरते हैं यहां प्रज्जवलित दीप हर शाम।
आयुर्वेद्यशाला पंतजलि संस्थान,
गुरुकुल कांगड़ी यहां विद्यमान।
हरिद्वार के निकट ही शहर ऋषिकेश,
आश्रमों में साधुओं का होता प्रवेश।
विशाल झूला सा पुल झूला लक्ष्मण,
राम के नाम का भी झूला विलक्षण।
युवा पर्यटकों का भी मन मोहे है ऋषिकेश,
डेरों में सब रहें यहां नदी के तट पर,
नदी में राफ़्टिग करें जी भर कर।
यहां से ही शुरू होती शुभ यात्रा,
गंगा की चारधाम तीर्थयात्रा।
गंगोत्री, जमनोत्री, केदारनाथ,
औ’ बद्रीनाथ की यात्रा।

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