लेखक परिचय

अरूण पाण्डेय

अरूण पाण्डेय

मूलत: इलाहाबाद के रहने वाले श्री अरुण पाण्डेय अपनी पत्रकारिता की शुरुआत ‘दैनिक आज’ अखबार से की उसके बाद ‘यूनाइटेड भारत’, ‘राष्ट्रीय सहारा’, ‘देशबंधु’, ‘दैनिक जागरण’, ‘हरियाणा हरिटेज’ व ‘सच कहूँ’ जैसे तमाम प्रतिष्ठित एवं राष्ट्रीय अखबारों में बतौर संवाददाता व समाचार संपादक काम किया। वर्तमान में प्रवक्ता.कॉम में सम्पादन का कार्य देख रहे हैं।

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पूरे देश में डेरा सच्चा सौदा को लेकर बेचेनी है । हर कोई उस पर आरोप लगाकर मीडिया की सुख्र्रियां बटोरना चाहता है लेकिन वास्तविकता से दूर बातें कितनी दूर तक चलती है । यह सच है कि हरियाणा में डेरा का सिक्का चलता है और वह उसका अपना है जो डेरे के भीतर चलता है और बाहर भी, उसने असंभव से असंभव काम कर दिखाया । वेश्याओं का नवयुवकों से विवाह करवाया ,विधवा विवाह करवाया, हिजडों को थर्ड जेंडर का दर्जा दिलवाया, शरीर दान की प्रकिया शुरू किया और सबसे बडा काम औरतों का शवदाह स्थल तक जाने की ही नहीं,उन्हें अर्थी को भी कंधा देने का तरीका सिखाया। प्रधानमंत्री इसलिये ही डेरा के कायल नहीं हैं। , उन्होने हरियाणा में अपनी जिन्दगी का तमाम हिस्सा बिताया है और वह डेरा व उसके कामों को अच्छी तरह जानते हैं। शायद इसलिये ही सफाई अभियान जिसे डेरा सच्चा सौदा ने शुरू किया था उसे देश का अभियान प्रधानमंत्री ने बनते ही बनाया। अभी हाल में ही डेरा सच्चा सौदा ने एक फिल्म ‘द मैसेंजर आफ गाड’ का दो भाग बनाया , फिल्म सुपरहिट रही तो वालीवुड वालो के होश पुख्ता हो गये। कहने लगे क्या अब बाबा जी फिल्म बनायेगें लेकिन वह यह भूल गये कि उनके इतने अनुयायी है कि सिर्फ वह देख लें तो वालीवुड का खर्च पूरा हो जाता है।

जहां तक डेरा सच्चा सौदा की बात है तो वह एक सामाजिक – आध्यात्मिक संगठन है कि दूसरों को उपदेश और प्रथाओं मानवतावाद और निःस्वार्थ सेवाओं. आश्रम का मुख्य केंद्र सिरसा (उत्तरी भारत) में स्थित है. दुनिया भर में चालीस लाख से अधिक लोगों को संगठन के वफादार अनुयायी हैं. डेरा भक्तों के लिए ध्यान और डेरा द्वारा निर्धारित सिद्धांतों का पालन करना सीखते है।परमपावन बेपरवाह मस्ताना जी महाराज ने 29 अप्रैल, 1948 को डेरा सच्चा सौदा की स्थापना करने के लिए जनता के बीच आध्यात्मिक जागृति के लिए प्रोत्साहित करने के लिए,मानवता के उत्थान के लिए, और एक बेहतर दुनिया बनाने. वह बलूचिस्तान, वर्तमान पाकिस्तान के हिस्से से पुकारा. भक्ति और कड़ी मेहनत के साथ, महाराज जी एक आध्यात्मिक बगीचे में सिरसा के बंजर भूमि और अपने अनुयायियों को ध्यान की शानदार विधि प्रदान किया. नारा धन धन सतगुरू तेरा ही आसरा जो डेरा आश्रम में भक्तों मंत्र, हमारे रक्षक के रूप में सर्वशक्तिमान ईश्वर की दया है. महामहिम गुरुजी के बारे में सच है, मानवता और कड़ी मेहनत के पथ के बाद प्रचार किया. 1960 में, वह अपने आध्यात्मिक उत्तराधिकारी, परम पिता शाह सतनाम सिंह जी महाराज के लिए सौंप दिया ।

डेरा की बागडोर. मस्ताना जी महाराज ने 18 अप्रैल, 1960 को दिव्य प्रकाश के साथ विलय कर दिया.परम पिता शाह सतनाम सिंह जी महाराज खुद को 25 जनवरी 1919 को  एक पवित्र स्थल साहिब की जमीन पर बनाया है. परमपावन तीस साल (1960-1990) के लिए मानव जाति की सेवा की और कई लोगों को उन पर गुरूमंत्र का आशीर्वाद बरस से मुक्ति के लिए रास्ते पर प्रबुद्ध. वह असंख्य भजन की रचना की और कई पवित्र पुस्तकें लिखी.डेरा सच्चा सौदा, दहेज के बिना विवाह का समर्थन कर रहे हैं और माता – पिता की सहमति के साथ हुई. इसके अलावा, यहाँ के लोग प्रेरित हो किसी विशेष व्यवस्था, अनुष्ठान, या चालबाजियों बिना सच सर्वशक्तिमान ईश्वर के साथ जुडे. उनका ऊंचा पवित्रता श्रद्धेय संत गुरमीत राम रहीम सिंह जी  23 सितंबर, 1990 को डेरा सच्चा सौदा की देवी प्रेरिताई पारित कर दिया. शाह सतनाम सिंह जी महाराज उनकी मानव पोशाक शेड और छपर – धाम (अनन्त निवास) वापस करने के लिए 13 दिसंबर 1991 को दीं.सर्वाधिक श्रद्धेय हजूर संत गुरमीत राम रहीम सिंह जी इंसा गोरेसवर मोडियां (जिला श्रीगंगानगर, राजस्थान) के आसपास महिमा और यह एक इंसान के रूप में खुद को अगस्त, 15 वीं 1967  द्वारा सबसे पवित्र जगह बनाया.।

वर्तमान में राम रहीम जी ने मानवीय प्रयासों में अग्रणी भूमिका निभाई है. अपने प्रेरिताई के दौरान डेरा बेपरवाह मस्ताना जी और परम पिता जी के पवित्र उपदेश के प्रति के रूप में शानदार ऊंचाइयों पर पहुंचा दिया है. पवित्र सभाओं के लिए डेरा की कई शाखाओं को दुनिया भर में स्थापित किया गया है. वर्तमान में, डेरा 72 सामाजिक कल्याण गतिविधियों के आसपास सड़क दुर्घटनाओं में मदद करने के साथ शुरू और जघन्य भ्रूण हत्या से बेटियों की सुरक्षा के लिए बढ़ा है और उन्हें इस घृणित पेशे को छोड़ने के लिए प्रेरणादायक  विवाह किया गया उपक्रम है. डेरा शैक्षिक संस्थानों की स्थापना की है भौतिकवादी, आध्यात्मिक, और समग्र ज्ञान के रूप में अच्छी तरह से प्रदान करते हैं.,

हूजूर ने बताया कि यह कोई धर्म परिवर्तन नहीं है बल्कि अपने-अपने धर्म में रहते हुए सर्वधर्म को एकव इंसानियत को मानना है। अपना उपनाम जैसे शर्मा, वर्मा, अरोड़ा, संधू आदि की जगह इन्सां लिखे।शराब नहीं पीना, मास अंडे का सेवन नहीं करना, पर स्त्री व पर पुरुष को आयु के अनुसार बड़े हैं तो माता-पिता के समान, बराबर के हैं तो भाई व बहनके समान तथा छोटे हैं तो बेटा या बेटी के समान मानना,. 7 दिन में से कम से कम एक दिन या 6 घंटे परमार्थी सेवा करना या महीने में 4- 5 दिन सेवा करे। सुबह उठने के बाद अपने से बड़ों के पाँवों को हाथ लगाना, नारा लगाना और छोटे बच्चों को प्यार से आशीर्वाद देना व नारा लगाना। लोगों को बुराईयाँ  छुड़वा कर नाम गुरुमंत्र के लिए प्रेरित  करें क्योंकि सतगुरु के वचन हैं कि किसी जीव को अगर आप बुराईयों से बचा कर मालिक से जोड़ते हैं तो उसका सैंकड़ों गाय पुण्य करने जितनाफल मिलता है।

इसके अलावा ठग्गी, बेईमानी, चोरी, डकैती, रिश्वतखोरी  भ्रष्टाचार की कमाई से सख्त परहेज  करना, सदा हक-हलाल व मेहनत की कमाई कर के खाना। दिन का आगाज मालिक की अरदास व सुमिरन से होना जरूरी करें, मालिक अच्छे कार्य करूँ व सबका भला करूँ, तेरे दशर्न कर सकूं।. कुछ भी खाने से पहले मालिक का सुमिरन व अरदास करना कि मालिक रूहानी तंदुरुस्ती व ताजगी देना, कमाई का 15वां हिस्सा सृष्टि की निरूस्वार्थ सेवा में अपने हाथों से दान करना या शाह सतनाम  जीग्रीन एस  वेल्फयर फोर्स विंग में देना ताकि जरूरतमंद की सहायता की जा सके। अगर दान ही करना है तो खूनदान, विद्यादान, मरणोपरांत नेत्रदान या पूरा शरीर दान करना व सृष्टि की सेवा के लिए पैसे खर्च करना।. व्यवहार (लेन-देन) का सच्चा व खरा होना जरूरी,. ऊँच-नीच व जात-पात का भेदभाव बिल्कुल नहीं करना। सभी नशीले पदार्थों से परहेज करना तथा दिनचर्या में कसरत को शामिल करना व सृष्टि कीसेवा के लिए पैसा खर्च करना। अधिक ब्याज दर पर पैसे नहीं देना तथा किसी लाचार व गरीब का शोषण नहीं करना।अभद्र शब्दों का प्रयोग न करके सदा मीठा बोलना, ख्याल, वचन व कर्म में सच्चाई का होना जरूरी, परनिंदा, ईर्ष्याव टाँग खिंचाई को छोड़कर लोगो ंको मालिक की तरफ प्रेरित करना है।

दीनता, नम्रता और सादगी में रहना,दहेज-प्रथा,बाल-विवाह, भ्रूण हत्या, बाल-श्रम आदि कुप्रथाओं को छोड़कर एक अच्छे समाज का निर्माण करना, ध्यान रहे कि लड़की को परिजनो द्वारा स्वेच्छा से दिया गया धन व समान दहेज नहीं ंहै बल्कि यह लड़की का हक है।. लड़के-लड़की को एक समान मानना व बराबर का हक देना। किसी को मुसीबत व दुर्घटना मे फँसा देखकर उसकी यथा संभव सहायता करना। हट्टे-कट्टे भिखारी को भिक्षा ना देकर उसे मेहनत करने के लिए प्रेरित करना। भूखे को खाना, प्यासे को पानी, लाचार कोसहारा, अनपढ़ को शिक्षा और संभव हो तो बेरोजगारको रोजगार देना, किसी की धार्मिक भावना को ठेस ना पहुँचाना,. कुसंगत से बचकर हमेशा भजन सुमिरन व अच्छी बातें करने वालों का संग करना,. पूरी गैरत (अणख) से सच के मार्ग पर चलना,. न जुल्म करो और न सहन करो, परोपकार ही धर्म है व इंसानियत ही जात है।. नियामानुसार लगातार सुमिरन करना कम से कम आधा घंटा सुबह और आधा घंटा शाम को सुमिरन करना। हो सके तो दो से चार सुबह नाम जपो आधा या एक घंटा फिर नाश्ता करना, मेहनत की कमाई, परिवार को समय, सोने से पहले आधा या एक घंटा नाम जपें, सही समय पर सोना। हमेशा पहन के रखना ताकि, हम एक व मालिक भी एक है, याद रहे,. अपने देश व अपने सच्चे सतगुरु की आन-बान-शान के लिए मर मिटना। अहिंसा का पालन करना अर्थात किसी भी जीव की हत्या नहीं करना और न ही उसे सताना।

डेरा ने सिखाया जब कोई औरत गर्भवती हो तो उसको चाहिए कि वह अपने धार्मिक ग्रंथ, शब्द, सत्संग व योद्धा-शूरवीरों की कथायें पढ़े और देखे इससे होने वाले बच्चे के जीवन पर बहुत अच्छा असर होता है। खाना खाते समय सत्संग या भजनों की कैसेट या सीडी ही सुनना औेर देखना। कहीं भी कोई अश्लीलता (अश्लील टी.वी. में, अश्लील फिल्म या अश्लील पत्रिका इत्यादि में) हो तो उससे परहेज करना,पेड़-पौधे लगाएं व उसकी संभाल भी करें ताकि वातावरण शुद्ध रहे। अगर कोई बहन छोटी उम्र में विधवा हो जाती है तो उसका दोबारा विवाह करवाना अगर नहीं करवा सकते तो डेरा सच्चा सौदा, सरसा के कमरा न. 50 में संपर्क करवाना। पाखंड व दिखावे से दूर रहना जैसे मढ़ी-मसाना, भूत-प्रेत,टोने-टोटके, मरणोपरांत फिजूल खर्चे, ढोंगी गुरु आदि से हमेशा दूर रहना। समाज में फैली कुरीतियों व बीमारियों के प्रति सजग रहना व सजग करना, बदलते हुए समय की मांग के अनुसार बुजुर्गों को चाहिए कि बच्चों को कुछ करने का मौका दें ओर गृहस्थ की जिम्मेवारी बच्चों पर डालकार खुद भक्ति मार्ग अपनाना।

कुछ मिला है तो उसका अहंकार न करें और जिसकी चाह है उसके लिए ईमानदारी से मेहनत व सुमिरन करना चिंता(टेंशन) नहीं करना,. जब भी गुस्सा आता है तो नारा लगाकर ठंडे पानी का गिलास पीकर पाँच मिनट सुमिरन करना जहाँ तक संभव हो क्रोध  से बचकर रहना,. मलिक की सृष्टि से निःस्वार्थ प्रेम करना है

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