लेखक परिचय

प्रवक्ता.कॉम ब्यूरो

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-फखरे आलम-   aap

दिल्ली से भारतीय राजनीति की नई शुरुआत हुई है और इस पहल को न सिर्फ सराहा जाना चाहिए, बल्कि इस आगाज का जोरदार समर्थन भी होना चाहिए। इस नई राजनीति का हमें स्वागत करना चाहिए न कि नाक-भौं चढ़ाकर इसकी कार्यप्रणाली और प्रशासन की शैली पर संदेह करना चाहिए। 66 वर्षों के भारतीय राजनीति की यह कटू शुरुआत है। पार्टी की स्थापना, कार्यशैली चुनाव लड़ने की पद्धतियों ने काफी सुर्खियां बटोरीं, पार्टी की जीत चकित कर देने वाला था। राष्ट्रीय पार्टियों के गठन और उनके सत्ता में धमाकेदार प्रवेश ने कभी भी इतना चकित नहीं किया, जितना दिल्ली विधानसभा में आप पार्टी की जीत से हुई। आप पार्टी की सपफलता के लिए अगर लोग श्रेय उनके जुझाड़ू नेतृत्व और लगातार संघर्ष करने वाले नेतृत्व को लौह देते आ रहे हैं। वहीं सबसे पहले धन्यवाद के पात्र देश और दिल्ली की जनता है जिन्होंने वे राष्ट्रीय पार्टी और सत्ताधरी दल कांग्रेस से नाराजगी और मुख्य विपक्षी दल भाजपा से दूरी बनाकर दिखाया है।

मुझे दिल्ली में दोनों राष्ट्रीय पार्टी की विफलता और असपफलताओं पर आंसू नहीं बहाना है। अगर उन चार अन्य प्रदेशों में जहां पर तीन राज्यों में भाजपा की वापसी हुई, वहीं एक राज्य में कांग्रेस ने सरकार बनाई, उनमें विकल्प नहीं था। दिल्ली की जनता के पास आप पार्टी के तौर पर विकल्प थी तो दिल्ली की जनता ने सत्ता पक्ष कांग्रेस के प्रति अपने गुस्से का इजहार आप पार्टी को समर्थन देकर किया। भाजपा को जितना भी सफलता हाथ लगी, उसमें भी सत्ता पक्ष के प्रति नाराजगी का योगदान रहा, क्योंकि दिल्ली विधानसभा में स्पष्ट बहुमत न प्राप्त होने के कारण बड़ी अनिश्चितता की स्थिति बनी रही और लगने लगा था कि दिल्ली की जनता ने गुस्से में आकर कहीं गलत निर्णय तो नहीं ले लिया। लोगों को पुनः मतदान का डर सताने लगा था। मगर कांग्रेस ने आप पार्टी को समर्थन देकर जहां दिल्ली की जनता को राहत दी, वहीं आप पार्टी को अखाड़े में उतरकर अपने वादे और काबिलियत साबित करवाना पर बाध्य कर गई। आप पार्टी कहती रही कि उसे किसी का समर्थन नहीं चाहिए। मगर कांग्रेस आप की कुशलता और योग्यता का प्रदर्शन जनता के मध्य करना चाहती थी, क्योंकि भाजपा सरकार के गठन के करीब से चुकी थी तो उसके मन में सत्ता न पाने का मलाल आज भी सरकार के गठन और बहुमत साबित होने पर भी देखा जा सकता है। लगातार भाजपा आप पार्टी पर और उनकी नवगठित सरकार पर अर्थहीन बाण चला रही है।

अभी दिल्ली में आप पार्टी के गठन को कुछ ही दिन बीते हैं, मगर आप पार्टी की बढ़ती लोकप्रियताओं और उनमें दिखाई पड़ने वाले असंख्य आशाओं के कारण न केवल दोनों राष्ट्रीय पार्टी बल्कि शक्तिशाली और प्रदेश में शासन चलाने वाली क्षेत्रीय पार्टी भी सहमी सी है। दिल्ली आम आदमी पार्टी के लिए प्रयोगशाला है। और दिल्ली की प्रयोगशाला देश की राजनीति को अवश्य ही प्रभावित करेगी। लगातार मिलते समर्थन, आर्थिक सहायता और प्रत्येक वर्ग का आप पार्टी में शामिल होना भारतीय राजनीति इतिहास की एक घटना है।

दिल्ली में आप पार्टी की सरकार का गठन, उनके मुख्यमंत्री और मंत्रियों पर शुरू से न केवल दिल्ली वालों की बल्कि देश की निगाहें लगी रही हैं। उनके शपथ-ग्रहण से विधानसभा में कार्यप्रणाली उनके द्वारा किए जानेवाले वादे! सादगी का बखान, भ्रष्टाचार को खत्म करने का जुनून लोगों को अवश्य ही लुभाता है। राजनीति के इस युग से न केवल दिल्ली वाले बल्कि देशवालों को बहुत उम्मीदें हैं। एक अलग पहनावा, एक प्रकार के रिक्शा से यात्रा करना, लोगों की राय लेकर सरकार का गठन करना। बड़ी अच्छी और भारतीय राजनीति में पहली घटना है। सरकार के गिराये जाने का इल्जाम कांग्रेस पर अवश्य ही लगेगा। बीजेपी जनता पर, उनके निर्णय के लिए खिल्ली जरूर उड़ाएगी। मगर जिस वादों के साथ आप सत्ता में आई है, उस वादों को वादा न रहने दिया जाए। भ्रष्टाचार, महंगाई, बेरोजगारी और व्यवस्था परिवर्तन के लिए आप की सरकार को मूलभूत सुविधओं के साथ-साथ शिक्षा और स्वास्थ्य को प्राथमिकता देना होगा, क्योंकि व्यवस्था में बदलाव के लिए स्वास्थ्य और शिक्षित नागरिकों की आज पार्टी को 2014 में अधिक आवश्यकता पड़ने वाली है।

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