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प्रवक्‍ता ब्यूरो

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blogvaniहिन्दी ब्लॉग एग्रिगेटर ब्लॉगवाणी एक बार फिर से आज शुरू हो गया है। जैसा कि ज्ञात हो कि 28 सितम्बर को ब्लॉगवाणी को औपचारिक रूप से बंद करने की घोषणा कर दी गयी थी, लेकिन 24 घंटे में ही ब्लॉगवाणी को दुबारा फिर से शुरू कर दिया गया। ब्लॉगवाणी के बंद होने से हिंदी ब्लॉग की दुनिया में हड़कंप सा मच गया था। कई ब्लॉगर्स का तो यन्हां तक मानना था कि ब्लॉगवाणी के बंद होने का सीधा असर ब्लॉग की लोकप्रियता पर भी पड़ सकता है। कुल मिलाकर ब्लॉगवाणी का बंद होना और फिर उसका शुरू होना, दोनों ही अपने आप में नाटकीय रहा। ब्लॉगवाणी के बंद होने के जो कारण ब्लॉगवाणी टीम ने बताये थे उसपर भी कई ब्लॉगर्स ने सवालिया निशान लगाया। बहरहाल ब्लॉगवाणी के फिर से ऑनलाइन हो जाने के बाद ब्लॉगर्स में ख़ुशी का माहौल है। ब्लॉगवाणी को पुन: शुरु करते हुये ब्लॉगवाणी टीम ने कुछ इस प्रकार कहा :

ब्लागवाणी आपकी है तो आरोप सिर्फ हमारे ऊपर ही क्यों?

ब्लागवाणी को बन्द करने की सोचना भी हमारी गलती थी। आपकी प्रतिक्रिया देख कर लगता है कि यह फिनोमिना हमारी सोच से भी बड़ी हो गई थी। पिछले 24 घंटो में हमें अनगिनत SMS, ई-मेल और फोन आये यह देख कर लगता है कि ब्लागवाणी शुरु करने का फैसला तो हमारे हाथ में था, लेकिन बन्द करने का फैसला अकेले हमारे हाथ में नहीं है। यह फैसला दबाव में ही लिया गया था। लेकिन यह दबाव आर्थिक या काम के बोझ का नहीं था, हम तो हतप्रभ रह गये थे कि ब्लागवाणी की व्यवस्था बनाये रखने के लिये गये उपायों पर भी कोई पक्षधरता के आरोप लगाये जा रहे थे। यही शायद असहनीय बन गया। आपकी प्रतिक्रिया देखकर लगता है कि ब्लागवाणी को बन्द करना संभव नहीं है.

लेकिन ब्लागवाणी को इस रूप में चलाना भी अब संभव नहीं है क्योंकि क्रेडिबिलिटी पर उठने वाले सवाल सबसे ज्यादा चोट पहुंचाते हैं, खास कर तब जब आपने अपनी कोशिश में कहीं कमी नहीं छोड़ी हो। वैसे भी ब्लागवाणी जब आपकी है तो आरोप हम क्यों सहें। इसलिये ब्लागवाणी का मोडरेशन अब कोई मोडरेटर नहीं बल्कि ब्लागर कम्युनिटी खुद करेगी.

1. ब्लागवाणी के प्रयोक्ता ही यह फैसला करेंगे कि कौन सा ब्लाग जोड़ना है और कौन सा छोड़ना।

2. सिर्फ ब्लागवाणी के सदस्य ही पसंद कर सकेंगे और यह सब देख सकेंगे कि पसंद किसने की थी ताकी फिर कोई अर्नगल आरोप न लगा सके कि यहां-वहां गड़बड़ है। साथ ही जो नकली पसंद करेगा वो भी जग-जाहिर हो जायेगा। हां यह जरूर है कि अब पसन्द/नापसन्द के साथ अनोनिमिटी नहीं रहेगी। यह शायद एक जरूरी पैनल्टी है।

3. पसंद के साथ ही नापसंद भी लाया जायेगा जिसका प्रयोग भी सिर्फ ब्लागवाणी के सदस्य कर सकेंगे।

ब्लाग जोड़ने आदि की सारी शक्तियां ‘माडरेटर” जैसा दर्जा प्राप्त ब्लागिंग में सक्रिय लोगों की होगी। इनकी चुनाव प्रक्रिया स्वाचलित और पारदर्शी होगी। आगे की जानकारी आपको इसी ब्लाग में मिलती रहेगी.

यह ब्लागवाणी अस्थायी ब्लागवाणी है

आज से हम नयी ब्लागवाणी पर काम शुरु कर रहे हैं। इतना सब कुछ बनाने में वक्त लगेगा इसलिये फिलहाल इस ब्लागवाणी को इसलिये चालू किया जा रहा है ताकी व्यवस्था में खलल न पड़े। हमें लगता है कि नई ब्लागवाणी पर कार्य 1 से 1.5 महीने में पूर्ण किया जा सकेगा। इसके लिये भी आपके सुझाव आमंत्रित हैं। क्योंकि काम नये सिरे से शुरु होगा इसलिये नयी ब्लागवाणी नयी सुविधायें भी लेकर आयें जिससे ब्लागिंग का दायरा बढ़े और जैसा कि कुछ पोस्टों में कहा गया है कि ब्लागर के साथ अधिकाधिक संख्या में पाठक भी आयें.

साथ ही ब्लागवाणी पसंद की क्रेडिबिलिटी पर उठे सवालों के लिये यह कहना चाहेंगे कि जिन सदस्यों की ब्लागवाणी पसंद से शिकायत की वजह से यह सारा बवाल उठा अगर वह सार्वजनिक रूप से मांग करते हैं तो हम उनकी पसंद की सारी जानकारी (किस पोस्ट पर किस आइपी से कब पसंद आयी) सार्वजनिक कर देंगे और ब्लागवाणी के प्रयोक्ता खुद देख सकेंगे की ब्लागवाणी का सुरक्षा तंत्र नकली पसंद हटाने का काम सही कर रहा था या नहीं.

ब्लागवाणी में आने वाली समस्याओं के बारे में लोग पहले बतायें ताकि इनका निदान हो सके। इसके लिये माध्यम मौजूद हैं लेकिन शायद कम पड़े इसलिये जल्द ही एक फोरम शुरु हो जिसमें ब्लागिंग से संबंधित बातचीत हों और अगर कोई ऐसी घटना हुई जिससे ब्लागवाणी के कामकाज पर खलल पड़ रहा हो (जैसे नकली पसंदे) तो कम्युनिटी उसे बारे में बातचीत कर निदान खोज पायें.

आशा है कि जैसा दबाव हमने महसूस किया ऐसा दोबारा नहीं करना पड़े। आपके सहयोग कि अपेक्षा के साथ.

टीम ब्लागवाणी

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