लेखक परिचय

गिरीश पंकज

गिरीश पंकज

सुप्रसिद्ध साहित्‍यकार गिरीशजी साहित्य अकादेमी, दिल्ली के सदस्य रहे हैं। वर्तमान में, रायपुर (छत्तीसगढ़) से निकलने वाली साहित्यिक पत्रिका 'सद्भावना दर्पण' के संपादक हैं।

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Nat_Hindiहिंदी अब बलिदान मांगती …

अपनी खोई शान मांगती .

बहुत हो गया, हिंदी-जननी

अपनी इक पहचान मांगती.

हिंदी अब बलिदान मांगती .

अंगरेजी की जय-जय कब तक?

अपना गौरव- गान मांगती.

जहां खिले सारी भाषाए,

हिंदी वो उद्यान मांगती.

हिंदी अब बलिदान मांगती.

मै हूँ जन-गन-मन की भाषा

अपना यह सम्मान मांगती.

हिंदी अब बलिदान मांगती.

खून नहीं, हम प्यार बाँटते

हिंदी वही जहान मांगती

हिंदी अब बलिदान मांगती .

-गिरीश पंकज

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1 Comment on "हिंदी अब बलिदान मांगती.."

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Kanhaiya
Guest

Bahoot achhi rachna hai………..

subhkamnayen

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